जानें कौन हैं जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ? जिनके नाम की सिफारिश चीफ जस्टिस यूयू ललित ने सरकार को भेजी

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 11 Oct 2022 2:00 PM

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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ वर्तमान सीजेआइ ललित के बाद सबसे वरिष्ठ हैं, इसलिए ऐसे कयास पहले से ही लगाये जाने लगे थे कि उनके नाम की सिफारिश ही की जा सकती है. यहां चर्चा कर दें कि सीजेआइ ललित का कार्यकाल 8 नवंबर 2022 को समाप्त हो जाएगा.

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भारत के प्रधान न्यायाधीश यू यू ललित ने केंद्र से अपने उत्तराधिकारी के तौर पर न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ के नाम की सिफारिश मंगलवार को की है. आपको बता दें जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के भारत के 50वें मुख्य न्यायाधीश बनाये जाने की चर्चा पहले से ही मीडिया में है. केंद्र सरकार की ओर से कानून मंत्रालय ने सीजेआइ ललित से अनुरोध किया था कि वे अपने उत्तराधिकारी के नाम कि सिफारिश भेजने का काम करें. इसके बाद आज सिफारिश भेज दी गयी है.

वर्तमान सीजेआइ ललित के बाद सबसे वरिष्ठ हैं डीवाई चंद्रचूड़

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ वर्तमान सीजेआइ ललित के बाद सबसे वरिष्ठ हैं, इसलिए ऐसे कयास पहले से ही लगाये जाने लगे थे कि उनके नाम की सिफारिश ही की जा सकती है. यहां चर्चा कर दें कि सीजेआइ ललित का कार्यकाल 8 नवंबर 2022 को समाप्त हो जाएगा. वे केवल 74 दिनों तक इस पद पर अपनी सेवा देंगे. पूर्व सीजेआइ एनवी रमण का कार्यकाल पूरा होने के बाद जस्टिस ललित 26 अगस्त 2022 को देश के 49वें प्रधान न्यायाधीश नियुक्त करने का काम किया गया था. जस्टिस ललित का कार्यकाल मात्र ढाई महीने का है. वहीं इससे पूर्व प्रधान न्यायाधीशों के औसत कार्यकाल की बात करें तो ये करीब 1.5 साल का रहा है.

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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का कार्यकाल कितने दिनों का

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बात करें तो उनका कार्यकाल दो साल का होगा. वह 10 नवंबर 2024 को सेवानिवृत्ति हो जाएंगे. यहां चर्चा करते चलें कि सुप्रीम कोर्ट के जज 65 वर्ष की आयु में और हाई कोर्ट के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त हो जाते हैं.

जानें कौन हैं न्यायमूर्ति चंद्रचूड़

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ की बात करें तो वे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं. वह इस पद पर नियुक्त होने तक 29 मार्च 2000 तक बंबई हाई कोर्ट के न्यायाधीश थे. बंबई हाई कोर्ट ने न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ को जून 1998 में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में पदस्थ किया और उन्हें उसी साल अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया था. दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से अर्थशास्त्र में बीए ऑनर्स करने के बाद न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कैम्पस लॉ सेंटर से एलएलबी की डिग्री ली और अमेरिका के हार्वर्ड लॉ स्कूल से ज्यूरिडिकल साइंस में डॉक्टरेट तथा एलएलएम की डिग्री ली. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और बंबई हाई कोर्ट में वकालत की और मुंबई विश्वविद्यालय में संवैधानिक कानून के अतिथि प्रोफेसर भी रहे.

13 मई 2016 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ नौ नवंबर को 50वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण कर सकते हैं. न्यायमूर्ति चंद्रचूड़़ 13 मई 2016 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने थे. वह देश के सबसे लंबे समय तक सीजेआई रहे न्यायाधीश वाई वी चंद्रचूड़ के बेटे हैं. उनके पिता 22 फरवरी 1978 से 11 जुलाई 1985 तक न्यायपालिका के शीर्ष पद पर काबिज रहे.

भाषा इनपुट के साथ

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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