आज लंदन से भारत आएगी भगवान शिव की दुर्लभ मूर्ति, 22 साल पहले राजस्थान से हुई थी चोरी

Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 30 Jul 2020 9:37 AM

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Shiva statue, stolen Shiva statue, Shiva statue London to India, Ghateshwar temple, Chittorgarh :राजस्थान के चित्तौड़गढ़ स्थित घाटेश्वर मंदिर से 22 साल पहले चोरी हुई मूर्ति आज लंदन से वापस भारत आ रही है. बताया जा रहा है कि यह मूर्ति नटराज शिव की है, जिसे 2005 में लंदन में बरामद किया गया था, जिसके बाद मूर्ति को लेकर कई प्रक्रियाएं चली और अंततः मूर्ति को भारत भेजा जा रहा है.

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Shiva statue : राजस्थान के चित्तौड़गढ़ स्थित घाटेश्वर मंदिर से 22 साल पहले चोरी हुई मूर्ति आज लंदन से वापस भारत आ रही है. बताया जा रहा है कि यह मूर्ति नटराज शिव की है, जिसे 2005 में लंदन में बरामद किया गया था, जिसके बाद मूर्ति को लेकर कई प्रक्रियाएं चली और अंततः मूर्ति को भारत भेजा जा रहा है.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार तस्करों ने साल 1998 में राजस्थान के चित्तौड़गढ़ स्थित घाटेश्वर मंदिर से भगवान शिव की नटराज मूर्ति को चोरी कर लिया. बाद में इस मूर्ति को लंदन में बेच दिया. हालांकि लंदन में तस्कर से यह मूर्ति बरामद हुआ, जिसके बाद अधिकारियों ने भारतीय उच्चायोग से इसको लेकर संपर्क साधा.

2017 में हुई पुष्टि– मूर्ति भारत की है, इसको लेकर कई प्रकिया चली, जिसके बाद साल 2017 में इसकी पुष्टि हुई. बताया जा रहा है कि इस मूर्ति को 2005 में भारतीय उच्चायोग को सौंप दिया गया. आज उच्चायोग इसे भारत भेजेगा, जिसके बाद यह मूर्ति फिर से घाटेश्वर मंदिर में स्थापित किया जाएगा.

अब तक ये मूर्तियां आ चुकी है वापस- बता दें कि भारत में अब तक विदेशों से चोरी की गई कई मुर्तियां वापस आ चुकी है. इसमें कृष्ण की मूर्ति अमेरिका ने और स्कॉटलैंड ने बुद्ध की मूर्ति को वापस किया था. हाल ही में एक और 12वीं शताब्दी की मूर्ति गुजरात में वापस आ गई थी.

राजस्थान में अब भी हो रही है चोरी- बता दें कि राजस्थान में मूर्ति चोरी की घटनाएं अब भी कई जगहों पर सामने आ रही है. बीते दिनों ही भरतपुर के जैन मंदिर से अष्टधातु की मूर्ति चोरी की खबर सामने आई थी, उससे पहले लॉकडाउन के दौरान के जयपुर स्थित नरैना में मूर्ति के मुकुट को लेकर चोर उड़ गए थे. गौरतलब है कि राजस्थान में सदियों पूर्व मूर्ति स्थापित करने की रिवाज थी, जिसके कारण आज भी वहां कई सदियों पूर्व मूर्ति स्थापित है.

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Posted By : Avinish Kumar Mishra

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