रूस के विक्ट्री डे परेड 2020 से क्या है इंडिया का कनेक्शन, जानें भारतीय सेना क्यों हुई शामिल
Author : Rajneesh Anand Published by : Prabhat Khabar Updated At : 24 Jun 2020 2:39 PM
Russia Victory Day Parade 2020: रूस का विक्ट्री डे परेड 2020 इस बार बहुत ही खास है, क्योंकि यह द्वितीय विश्व युद्ध में रूस के बलिदान और मित्र देशों के विजय के प्रतीक के रूप में आयोजित किया गया है. विक्ट्री डे परेड में इस वर्ष भारतीय सेना के साथ-साथ 11 अन्य देशों की सेनाओं ने भी हिस्सा लिया. भारतीय सेना के तीनों अंग थल सेना, वायुसेना और नेवी के जवान विक्ट्री डे परेड में शामिल हुए.
रूस का विक्ट्री डे परेड 2020 इस बार बहुत ही खास है, क्योंकि यह द्वितीय विश्व युद्ध में रूस के बलिदान और मित्र देशों के विजय के प्रतीक के रूप में आयोजित किया गया है. विक्ट्री डे परेड में इस वर्ष भारतीय सेना के साथ-साथ 11 अन्य देशों की सेनाओं ने भी हिस्सा लिया. भारतीय सेना के तीनों अंग थल सेना, वायुसेना और नेवी के जवान विक्ट्री डे परेड में शामिल हुए.
विक्ट्री डे परेड का आयोजन रूस की राजधानी मास्को के रेड स्क्वयार में किया गया. 1945 में आज ही के दिन रूस ने जर्मनी को परास्त किया था और ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी, जिसकी आज 75वीं जयंती है.
इस परेड में भारतीय सेना की भागीदारी द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान रूस ने जो बड़ा त्याग किया था, उसके प्रति सम्मान का भाव है. साथ ही यह उन भारतीय सैनिकों को भी सम्मान है, जो द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान शहीद हुए थे. दूसरे विश्वयुद्ध के समय भारत पर अंग्रेजों का कब्जा था. इसलिए भारतीय सैनिक भी नाजी जर्मनी के विरुद्ध युद्ध में शामिल थे. इस युद्ध में लगभग 20 लाख भारतीय सैनिक शामिल हुए थे और देसी रियासतों ने युद्ध के लिए अंग्रेजों को बड़ी धनराशि भी दी थी.
चीन के विक्ट्री परेड में शामिल होने के लिए भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मास्को गये हुए हैं. विक्ट्री डे परेड में भारतीय सेना उस वक्त शामिल हो रही है, जब भारत का पड़ोसी देश चीन से सीमा विवाद चल रहा है. रूस भारत का पुराना सहयोगी है और भारत के मित्र राष्ट्रों में शामिल है. यही कारण है कि इस परेड में भारत के शामिल होने के मायने अहम हैं. भारतीय सेना के 75 सैनिक और अधिकारी इस परेड में शामिल हो रहे हैं.
भारत के अतिरिक्त और 11 देशों के सैनिक भी इस परेड में शामिल हो रहे हैं, जिनमें चीन भी शामिल हैं. यह सभी देश द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान रूस के साथ खड़े थे और जर्मनी के खिलाफ युद्ध लड़ा था. यह विश्वयुद्ध 1939 से शुरू हुआ था और 1945 में जर्मनी की हार के बाद समाप्त हुआ. इस युद्ध में मित्र राष्ट्रों की जीत हुई थी. लेकिन नुकसान बहुत ज्यादा हुआ था क्योंकि इस युद्ध में परमाणु बम का प्रयोग हुआ था.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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