राजस्थान चुनाव: मौजूदा मंत्री और विधायकों के टिकट काटेगी कांग्रेस? जानिए क्या रहा है ट्रेंड
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 10 Jul 2023 7:03 AM
Rajasthan Election 2023 : राजनीतिक जानकारों की मानें तो सरकार के खिलाफ एंटी-इंकम्बेंसी इसलिए हो जाती है क्योंकि राजस्थान में विकास की जरूरतें बहुत ज्यादा है. जानें क्या रहा है राजस्थान विधानसभा चुनाव का ट्रेंड
राजस्थान में कांग्रेस का संकट टलता नजर आ रहा है. कांग्रेस इस बार राजस्थान में सरकार रिपीट करने का दावा कर रही है. इस संबंध में पार्टी के कई नेताओं के बयान सामने आ चुके हैं. हालांकि राजस्थान विधानसभा चुनाव के ट्रेंड को देखकर ऐसा नहीं लग रहा है. सच तो यही है कि राजस्थान में सत्ताधारी दल फिर से सत्ता पर काबिज नहीं होती है. पिछले चुनावों में ऐसा देखा गया है कि जो भी पार्टी सत्ता में रही, उसने अपने पुराने चेहरों के भरोसे ही चुनाव जीतने का प्रयास किया लेकिन पूरी मेहनत बेकार चली गयी. दिग्गज मंत्री भी अपनी सीट गंवा बैठे. ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या कांग्रेस अपने मौजूदा विधायकों और मंत्री के टिकट काटेगी जिससे उसके फिर से सत्ता में वापसी की कुछ संभावना बने.
पिछले 20 साल में राजस्थान में हुए चार विधानसभा चुनाव पर नजर डालें तो कोई भी पार्टी लगातार दूसरी बार सरकार बनाने में सफल नहीं हो पायी है. सत्ताधारी पार्टी के विधायक दोबारा चुनाव मैदान में उतरते हैं तो उनमें से ज्यादातर को हार का मुंह देखना पड़ता है. जनता का सबसे ज्यादा गुस्सा मंत्रियों पर निकलता है, पिछली चार सरकारों में मंत्री रहे ज्यादातर नेता अगले चुनाव में हारते दिखे. राजस्थान की राजनीति में जानकारी रखने वाले विशेषज्ञों की मानें तो जब कोई पार्टी सत्ता में आती है तो प्रदेश की जनता की उम्मीदें उससे जुड़ जाती हैं. लेकिन जब पांच साल में उम्मीदें पूरी नहीं होती तो चुनाव आते-आते लोगों की नजर से वे उतर जाते हैं. यही वजह है कि सरकार के खिलाफ एंटीइन्कमबेंसी बढ़ जाती है और इसका असर चुनाव में नजर आता है.
2018 के चुनाव पर नजर डालें तो उस वक्त की सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा के 16 मंत्री हार गये थे. यही नहीं 94 विधायकों को फिर से टिकट दिया गया था. इनमें से 54 हार गये थे. भाजपा ने 2018 के चुनाव में 163 विधायकों में से 94 को फिर से टिकट दिया था. इनमें से केवल 40 ने ही जीत दर्ज की थी. 54 विधायकों को हार का सामना करना पड़ा था. तत्कालीन वसुंधरा सरकार के मंत्री रहे 16 नेता चुनावी समर में डूब गये थे. विधानसभा चुनाव में हार का सामना करने वालों में युनूस खान, प्रभुलाल सैनी, राजपालसिंह शेखावत, धनसिंह रावत जैसे बड़े नाम शामिल हैं.
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यहां चर्चा कर दें कि इस साल नवंबर-दिसंबर में राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इसको लेकर कांग्रेस ने गुरुवार को दिल्ली में राजस्थान के नेताओं के साथ बैठक की. बैठक में नेताओं ने विधानसभा चुनाव से पहले एकजुट होने को लेकर सहमति जतायी है. पार्टी नेताओं की ओर से बयान आया कि कांग्रेस की परंपरा के अनुसार किसी भी नेता को मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में पेश नहीं किया जाएगा. कांग्रेस में पिछले कई महीनों से जारी कलह को लेकर कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल ने नेताओं को अपनी शिकायतें या विचार पार्टी मंच तक ही सीमित रखने की सलाह दी है.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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