क्या खत्म हो जायेगा पंजाब कांग्रेस का घमासान ? ये हो सकती है नये सीएम की टीम, सात नये चेहरे शामिल होंगे
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 26 Sep 2021 7:24 AM
दिल्ली से लौटने पर, चन्नी ने शनिवार को पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित से मुलाकात की, और 15 कैबिनेट मंत्रियों को अब रविवार को शाम 4.30 बजे पद की शपथ दिलाई जाएगी. इस सूची में सात नये चेहरों के शामिल होने की संभावना है और अमरिंदर सिंह की टीम के पांच मंत्री बचे रहेंगे.
पंजाब में जारी घमासान में कांग्रेस रणनीतिक तौर पर अब पंजाब में कैबिनेट में मंत्रियों का ऐलान करने जा रही है. लंबे समय से चर्चा चल रही थी कि इस कैबिनेट में किन मंत्रियों को जगह दी जाये, किन्हें हटाये जाये. लंबी परिचर्चा के बाद नाम फाइनल हो गये हैं. सीएम चरणजीत सिंह चन्नी की राहुल गांधी के साथ बैठक के बाद इस सूची को फाइनल किया गया है.
दिल्ली से लौटकर चन्नी ने शनिवार को पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित से मुलाकात की और 15 कैबिनेट मंत्रियों को अब रविवार को शाम 4.30 बजे पद की शपथ दिलाई जाएगी. इस सूची में सात नये चेहरों के शामिल होने की संभावना है और अमरिंदर सिंह की टीम के पांच मंत्री बचे रहेंगे.
सूत्रों ने कहा कि पार्टी ने पीपीसीसी के तीन वफादारों नवजोत सिंह सिद्धू-परगट सिंह, कुलजीत सिंह नागरा और अमरिंदर सिंह राजा वारिंग के नामों को शामिल करने की मंजूरी दे दी है। पार्टी के एक प्रमुख ओबीसी नेता संगत सिंह गिलजियान, विधायक राजकुमार वेरका अरकद गुरकीरत कोटली (पूर्व सीएम बेअंत सिंह के पोते) के नामों को भी मंजूरी दी गई है.
एक आश्चर्यजनक कदम में, पूर्व सिंचाई मंत्री राणा गुरजीत सिंह के मंत्रिपरिषद में वापसी की उम्मीद है. वह पहले निवर्तमान सीएम अमरिंदर सिंह के मंत्रिमंडल में मंत्री थे, लेकिन रेत खदानों के आवंटन में एक कथित घोटाले के बाद अपने पूर्व कर्मचारियों से जुड़े होने के बाद उन्होंने पद छोड़ दिया था.
इस बीच, सूत्रों ने कहा कि पार्टी की योजना पूर्व स्वास्थ्य मंत्री- बलबीर सिद्धू, राजस्व मंत्री- गुरप्रीत सिंह कांगड़, उद्योग मंत्री- सुंदर शाम अरोड़ा, समाज कल्याण मंत्री- साधु सिंह धर्मसोत और खेल मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी को हटाने की है। उनमें से ज्यादातर अमरिंदर के वफादार माने जाते हैं. ऐेसे में पार्टी बड़े फेरबदल की रणनीति तैयार कर रही है.
सूत्रों ने यह भी कहा कि चन्नी मंत्री अरुणा चौधरी को बनाये रखने के पक्ष में मतदान किया, जबकि मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा पीपीसीसी के पूर्व प्रमुख सुनील जाखड़ के अगले सीएम बनने की दौड़ में हारने के विवाद के बीच सबसे वरिष्ठ हिंदू विधायक के रूप में कैबिनेट में जगह बनाने में सफल हो रहे हैं सिख होने के नाते. निवर्तमान वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल के विरोध के बावजूद वॉरिंग आगे बढ़ने में कामयाब रहे
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