एंटी पेपर लीक बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी: पेपर लीक किया तो होगी 10 साल की जेल और 10 करोड़ तक का जुर्माना

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू लोगों को संबोधित करते हुए, फोटो पीटीआई

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू लोगों को संबोधित करते हुए, फोटो पीटीआई

पेपर लीक मामलों पर लगाम लगाने के लिए बनाए गए कड़े कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है. इस विधेयक में राज्यों में फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन और दोषियों के खिलाफ कठोर सजा का प्रावधान किया गया है.

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शुक्रवार को जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक, 2026 को अपनी मंजूरी दे दी है। संसद के दोनों सदनों ने इस सप्ताह की शुरुआत में इस विधेयक को पारित किया था. नए कानून के तहत अब प्रश्नपत्र लीक के मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य कर दिया गया है.

सजा और जुर्माने का प्रावधान

व्यक्तिगत मामले में सजा और जुर्माना

  • सजा: कम से कम 5 वर्ष से लेकर अधिकतम 10 वर्ष तक का कारावास.
  • जुर्माना: 50 लाख रुपये तक का जुर्माना.

पेपर लीक से जुड़ा संगठित अपराध में सजा और जुर्माना

  • सजा: कम से कम 7 वर्ष का कारावास.
  • जुर्माना: 10 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना.

30 जुलाई को राज्यसभा से बिल को मिली थी मंजूरी

30 जुलाई को राज्यसभा से लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ को मंजूरी मिली थी. जबकि 29 जुलाई को लोकसभा से बिल को मंजूरी मिली थी.

कांग्रेस ने कहा- पेपर लीक रोकने के लिए 'फास्ट-ट्रैक' बनाना पर्याप्त नहीं

कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि प्रश्नपत्र लीक के मामलों में केवल कड़ी सजा का प्रावधान करना या अदालतों को 'फास्ट-ट्रैक' घोषित करना पर्याप्त नहीं है. जयराम रमेश ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा था, 2024 में भी कांग्रेस का यही रुख था और अब 2026 में भी उसका लगातार यही कहना है कि प्रश्नपत्र लीक की समस्या से निपटने के लिए केवल कड़ी सजा का प्रावधान करना या विशेष अदालतों को 'फास्ट-ट्रैक' बनाना पर्याप्त नहीं है.

''हमें अपनी शिक्षा व्यवस्था के व्यावसायीकरण और भ्रष्टाचार पर बड़ी, अधिक ईमानदार बातचीत करने की जरूरत है. यही छात्र आंदोलन की भावना थी, जिसका मोदी सरकार को सम्मान करना चाहिए.'' - जयराम रमेश


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अरबिंद कुमार मिश्रा

लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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