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World Population Day : विश्व की तेजी से बढ़ रही जनसंख्या, जानें, कब भारत बनेगा सबसे ज्यादा आबादी वाला देश

Updated at : 11 Jul 2022 12:38 PM (IST)
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World Population Day : विश्व की तेजी से बढ़ रही जनसंख्या, जानें, कब भारत बनेगा सबसे ज्यादा आबादी वाला देश

Prabhat Khabar Special: संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि वर्ष 2050 की सबसे बड़ी चुनौती होगी लोगों का पेट भरना. उस वक्त तक दुनिया की आबादी बढ़कर 9 अरब हो जायेगी. और इन लोगों को सेहतमंद रखने के लिए पोषक आहार देना बड़ी चुनौती होगी.

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World Population Day Special: वर्ष 2011 में विश्व की आबादी 7 अरब हुई थी. वर्ष 2021 में विश्व की आबादी 7.8 अरब थी. वर्ष 2031 में दुनिया की आबादी बढ़कर 8.6 अरब हो जायेगी. पिछले एक दशक में दुनिया की आबादी 1.1 फीसदी की दर से बढ़ रही थी. इस पर अब जाकर ब्रेक लगा है. इस वक्त दुनिया की आबादी 0.9 फीसदी प्रति वर्ष की दर से बढ़ रही है.

2031 में भारत की आबादी होगी 151 करोड़

यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड (UNFPA) के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया में सबसे तेजी से सब-सहारा अफ्रीका में आबादी बढ़ रही है. 2.5 फीसदी की दर से. UNFPA ने कहा है कि वर्ष 2031 में भारत की आबादी 151 करोड़ हो जायेगी. उस वक्त भारत की आबादी चीन से भी ज्यादा होगी. यानी दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाला देश भारत बन जायेगा.

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2050 में लोगों को नहीं मिल पायेगा पोषक आहार

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि वर्ष 2050 की सबसे बड़ी चुनौती होगी लोगों का पेट भरना. उस वक्त तक दुनिया की आबादी बढ़कर 9 अरब हो जायेगी. और इन लोगों को सेहतमंद रखने के लिए पोषक आहार देना बड़ी चुनौती होगी. यह तभी संभव हो पायेगा, जब विकसित राष्ट्रों का कृषि उत्पादन 60 फीसदी बढ़े और विकासशील देश अपने उत्पादन को दोगुना करें. यानी 100 फीसदी वृद्धि.

140 करोड़ के पार हो चुकी है भारत की आबादी

बहरहाल, इस वक्त भारत की आबादी 140.66 करोड़ हो चुकी है. जनसंख्या 0.9 फीसदी प्रति वर्ष की दर से बढ़ रही है. भारत ने कई मामलों में बहुत तरक्की कर ली है, लेकिन कई पैमानों पर अब भी उसका प्रदर्शन बहुत खराब है. बाल विवाह अब तक पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. 27 फीसदी बच्चियों की शादी 18 साल की उम्र से पहले हो जाती है.

भारत की आबादी

  • 25 फीसदी आबादी 0-14 साल के बीच

  • 18 फीसदी आबादी 10-19 साल के बीच

  • 27 फीसदी आबादी 10-24 साल की उम्र की

  • 68 फीसदी आबादी 15-64 साल के बीच

  • 07 फीसदी आबादी 65 साल या इससे अधिक

भारत में स्वास्थ्य की स्थिति

  • प्रजनन दर 2.1 प्रति महिला

  • पुरुषों की जीवन प्रत्याशा – 69 साल

  • महिलाओं की जीवन प्रत्याशा – 72 साल

  • 81 फीसदी प्रसव कुशल स्वास्थ्यकर्मी की निगरानी में हुए (2014 से 2020 के बीच )

  • 1000 में 12 किशोरियां (15 से 19 साल) बच्चों को जन्म देती हैं (वर्ष 2004-2020)

  • 18 फीसदी महिलाओं को अपने पार्टनर की हिंसा झेलनी पड़ती है

  • 1000 में 62 महिलाएं (15 से 49 साल) अनचाहे गर्भवती हुईं (2015-2019)

  • मातृ मृत्यु दर 145 (1 लाख महिला में से 145 की मौत बच्चे के जन्म के समय या उसके बाद हो जाती है)

  • 81 फीसदी प्रसव कुशल स्वास्थ्यकर्मी की देखरेख में होते हैं

  • 1000 में 0.04 व्यक्ति एचआईवी से संक्रमित हुआ वर्ष 2020 में

  • वैश्विक स्वास्थ्य कवरेज इंडेक्स में भारत का स्थान 61वां है (वर्ष 2019 में)

परिवार नियोजन

  • 74 फीसदी लोग परिवार नियोजन के उपाय करते हैं

  • 44 फीसदी महिलाएं अपनाती हैं परिवार नियोजन के उपाय

  • 57 फीसदी शादीशुदा या लिव इन में रहने वाली महिलाएं परिवार नियोजन के उपाय अपनाती हैं

  • 15 से 49 साल की महिलाएं, जो गर्भनिरोधक उपाय अपनाती हैं

  • 39 फीसदी महिलाएं

  • 51 फीसदी महिलाएं शादीशुदा हैं या लिव-इन में रह रही हैं

15-49 साल की महिलाएं, जिन तक गर्भनिरोधक उपाय की पहुंच नहीं

  • 09 फीसदी महिलाएं

  • 12 फीसदी शादीशुदा या लिव-इन में रहने वाली

  • 74 फीसदी महिलाएं आधुनिक गर्भनिरोधक उपायों से संतुष्ट हैं

भारत में शिक्षा

  • 95 फीसदी बच्चों का प्राइमरी स्कूल में दाखिला कराया जाता है

  • 85 फीसदी बच्चे लोअर सेकेंड्री की पढ़ाई करते हैं

  • 58 फीसदी बच्चे अपर सेकेंड्री की पढ़ाई करते हैं

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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