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पीएम मोदी भारतीय परंपराओं और संस्कृति को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे, जेपी नड्डा ने कही ये बात

जेपी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की नीयत साफ है, इसलिए नीति भी स्पष्ट है. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति और स्वास्थ्य नीति, दोनों ही भारत की जड़ों से जुड़ी हुई हैं नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भाषा का विशेष ध्यान रखा गया है.

By Prabhat khabar Digital
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जेपी नड्डा
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भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय परंपराओं-संस्कृति को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे. यह बात भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने शनिवार को कही. दिल्ली के केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में जे.पी. नड्डा ने कहा कि जहां तक भाजपा का सवाल है, हम संस्कृति के रक्षक हैं और संस्कृति को आगे बढ़ाने की दृष्टि से काम करने वाले लोग हैं इसलिए जहां संस्कृत होगी, वहां हमारी विचारधारा होगी और उसके साथ खड़ी विचारधारा मिलेगी.

ज्ञान, विज्ञान, अर्थ सबकी उत्पत्ति और जननी संस्कृत है

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने आगे कहा कि संस्कृत को किस तरीके से आगे बढ़ाया जाए, इसे जनता तक कैसे पहुंचाया जाए इसके लिए आप कार्य कर रहे हैं और इसे आप आगे बढ़ाएंगे... ज्ञान, विज्ञान, अर्थ सबकी उत्पत्ति और जननी संस्कृत है, ज्ञान, विज्ञान, अर्थ, गणित सभी की उत्पत्ति का बीज संस्कृत ही है. संस्कृत सिर्फ भाषा ही नहीं है, बल्कि विभिन्न आयामों को आगे बढ़ाने का रास्ता भी है. उन्होंने कहा कि हमारे पुरातन ज्ञान को संजोकर रखने वाली भाषा भी संस्कृत है. जहां संस्कृत है, वहीं संस्कृति है. वहीं संस्कृति के साथ-साथ विकास के माध्यम भी हैं. अंधेरे से उजाले की ओर ले जाने का माध्यम संस्कृत ही है.

हम संस्कृति के रक्षक हैं : जे.पी. नड्डा

जे.पी. नड्डा ने कहा कि हम संस्कृति के रक्षक हैं और संस्कृति को आगे बढ़ाने की दृष्टि से कार्य करने में लगे हुए हैं. इसलिए जहां संस्कृत होगी, वहां हमारी विचारधारा होगी. भारतीय परंपरा, भारतीय संस्कृति, भारतीय उल्लेखों को आगे बढ़ाने के लिए भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी कोई कसर नहीं छोड़ने वाले हैं. उन्होंने कहा कि दुनिया में भारत का जो कोई मुकाबला नहीं है, उसका मूल कारण हमारी संस्कृति ही है. कई देश यदि मानवता की दृष्टि से काम करने का सोच सकते हैं तो ये प्राथमिक स्तर पर ही है. लेकिन भारत में ये बहुत विकसित है. हमारी ये जो ताकत है, वो हमारी संस्कृति से ही हमें मिलती है.

संस्कृत के केंद्रीय विश्वविद्यालय पहले की सरकार में क्यों नहीं बने? : जे.पी. नड्डा

भाजपा अध्‍यक्ष ने कहा कि संस्कृत के केंद्रीय विश्वविद्यालय पहले की सरकार में क्यों नहीं बने? आज ही क्यों केंद्रीय विश्वविद्यालय बन रहे हैं. प्रधानमंत्री जी ने राजनीतिक दृष्टि से न सोचते हुए तीनों विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की नीयत साफ है, इसलिए नीति भी स्पष्ट है. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति और स्वास्थ्य नीति, दोनों ही भारत की जड़ों से जुड़ी हुई हैं नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भाषा का विशेष ध्यान रखा गया है. संस्कृत के बारे में इसमें चिंता की गई और चर्चा को आगे बढ़ाया गया है नई शिक्षा नीति को भारतीय परिवेश को ध्यान में रखकर ही बनाया गया है.

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