जेपी नड्डा की खोदी कब्र, तेलंगाना के नलगोंडा जिले में लोगों ने विरोध का अजीबोगरीब तरीका अपनाया

जेपी नड्डा को प्रतीकात्मक रूप से कब्र में दफन करने वाले लोगों ने कब्र पर फूल-माला भी चढ़ाया है. साथ ही Regional Fluoride Mitigation & Research Center का बोर्ड भी कब्र पर लगाया गया है.
तेलंगाना के नलगोंडा जिले में कुछ लोगों ने विरोध का अजीबोगरीब तरीका अपनाया है और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को प्रतीकात्मक रूप से कब्र में दफन कर दिया है. कुछ अज्ञात लोगों ने जेपी नड्डा की कब्र खोदी है और उनकी तस्वीर कब्र पर लगायी है.
जेपी नड्डा को प्रतीकात्मक रूप से कब्र में दफन करने वाले लोगों ने कब्र पर फूल-माला भी चढ़ाया है. साथ ही Regional Fluoride Mitigation & Research Center का बोर्ड भी कब्र पर लगाया गया है.
Telangana | Unidentified persons dug a grave & symbolically buried BJP president JP Nadda alleging that Regional Fluoride Mitigation & Research Center is yet to be set up in Choutuppal area in Munugode, Nalgonda district pic.twitter.com/g2aB5EDblF
— ANI (@ANI) October 20, 2022
गौरतलब है कि इन लोगों ने क्षेत्रीय फ्लोराइड शमन और अनुसंधान केंद्र की स्थापना चौटुप्पल में अबतक नहीं किये जाने का विरोध करने के लिए यह तरीका अपनाया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक तेलंगाना की एक बड़ी आबादी जिसमें 1200 से अधिक बस्तियां शामिल हैं बुरी तरह से फ्लोरोसिस की समस्या से ग्रस्त है.
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By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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