Pahalgam Attack : ये टूरिस्ट प्लेस भी थे आतंकियों के निशाने पर, 15 अप्रैल को हो चुकी थी रेकी
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 01 May 2025 11:54 AM
Pahalgam Attack : 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले से एक सप्ताह पहले 15 अप्रैल को आतंकवादियों ने क्षेत्र में तीन स्थानों की टोह ली थी. पहलगाम हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें अधिकतर पर्यटक थे. जानें क्या बात आई सामने.
Pahalgam Attack : पहलगाम में हुए आतंकी हमले की जांच जारी है. इस बीच इंडिया टुडे ने अपने सूत्रों के हवाले से खबर प्रकाशित की है. खबर में बताया गया है कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले से एक सप्ताह पहले 15 अप्रैल को आतंकवादियों ने इलाके में तीन स्थानों की टोह ली थी. पहलगाम हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें से अधिकतर पर्यटक थे. आतंकवादियों में से एक ने पहलगाम में मनोरंजन पार्क की रेकी की थी, लेकिन कड़ी सुरक्षा के कारण इस स्थल पर हमला करने की योजना को छोड़ दिया गया. सूत्रों ने बताया कि पहलगाम की बैसरन घाटी में हमले के दौरान आतंकवादियों को अल्ट्रा-स्टेट कम्युनिकेशन सिस्टम का इस्तेमाल करते हुए पाया गया. इस सिस्टम से आतंकवादियों को सिम कार्ड का उपयोग किए बिना बतचीत करने और मैसेज भेजने में मदद मिली.
आतंकवादियों ने हेलमेट पर बॉडी कैम लगाए थे
कश्मीर में पहलगाम आतंकी हमला इजरायल में इस्तेमाल की जाने वाली हमास की रणनीति से काफी मिलता-जुलता है. जांचकर्ताओं ने बताया कि पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों ने हेलमेट पर बॉडी कैम, पहचान जांच और एन्क्रिप्टेड ऐप का इस्तेमाल किया. इस हमले में गैर-मुस्लिमों, खासकर हिंदुओं को निशाना बनाया गया, जो एक पर्यटक क्षेत्र में रहते थे. सुरक्षा एजेंसियां स्थानीय समर्थन और हमलावरों द्वारा इस्तेमाल किए गए हाई टेक्नोलॉजी वाले डिवाइस के स्रोत की जांच कर रही हैं.
पहलगाम आतंकी हमला जिसे देश नहीं भूल पाएगा
22 अप्रैल को, पांच से छह आतंकवादियों ने पहलगाम से लगभग 5 किलोमीटर दूर बैसरन घास के मैदान में पर्यटकों के एक ग्रुप पर गोलीबारी की. घास के मैदान (जिसे ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ भी कहा जाता है) तक केवल पैदल या घोड़े की पीठ पर ही पहुंचा जा सकता है. पहलगाम नरसंहार हाल के वर्षों में कश्मीर घाटी में सबसे घातक नागरिक हमलों में से एक था. इसे शायद ही कोई भारतीय भूल पाएगा. लश्कर-ए-तैयबा से संबंध रखने वाले द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने हमले की जिम्मेदारी ली है.
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प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आतंकवादी आस-पास के देवदार के जंगलों से निकले. उन्होंने पिकनिक मना रहे, टट्टू की सवारी कर रहे या खाने के स्टॉल पर खाना खा रहे लोगों पर गोलियां चलाईं. ज्यादातर पीड़ित पर्यटक थे, जिनमें यूएई और नेपाल के दो विदेशी और दो स्थानीय लोग शामिल थे.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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