संसद का शीतकालीन सत्र भी हो सकता है हंगामेदार, विपक्ष ने सरकार को घेरने की बनाई रणनीति

Published by : Pritish Sahay Updated At : 06 Dec 2022 4:38 PM

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New Delhi: Defence Minister Rajnath Singh with Union Minister for Parliamentary Affairs Pralhad Joshi and other leaders during an all-party meeting ahead of the Winter Session of Parliament, at Parliament House in New Delhi, Tuesday, Dec. 6, 2022. (PTI Photo/Shahbaz Khan)(PTI12_06_2022_000154A)

संसद का शीतकालीन सत्र इस बार भी हंगामेदार हो सकता है. शीतकालीन सत्र से पहले सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई. जिसमें विपक्ष ने नेताओं ने कई मुद्दों पर चर्चा की मांग की. वहीं, सरकार ने विपक्ष के नेताओं को आश्वस्त किया है कि सदन में चर्चा होगी.

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संसद का शीतकालीन सत्र इस बार भी हंगामेदार हो सकता है. शीतकालीन सत्र से पहले सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई. बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, बीजद, आप सहित 31 दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया. बैठक में विपक्षी दलों ने महंगाई, बेरोजगारी, चीन से लगी सीमा की स्थिति, कॉलेजियम के मुद्दे से जुड़ा विषय, केंद्र राज्य संबंध एवं संघीय ढांचे का विषय एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को आरक्षण पर अदालती फैसले सहित कुछ अन्य मुद्दों को उठाने एवं चर्चा कराने के लिये पर्याप्त समय देने की मांग की है.

सरकार ने दिया बहस का आश्वासन: वहीं, सर्वदलीय बैठक में सरकार ने विपक्ष के नेताओं को आश्वस्त दिया है. सरकार ने कहा कि विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति की अनुमति से नियमों के तहत जिस भी मुद्दे पर चर्चा करेगा, सरकार उसपर बहस करने को तैयार है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि इस बार भी संसद का शीतकालीन सत्र हंगामेदार हो सकता है.

इस मुद्दों पर चर्चा चाहता है विपक्ष: विपक्षी दलों के साथ सरकार की बैठक के बाद कांग्रेस ने कहा कि देश में कई ऐसे मुद्दे हैं जिसपर संदन में चर्चा होना चाहिए. कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि देश में आज मुद्दे ही मुद्दे है जिसपर विपक्ष सदन में बहस करना चाहता है. ऐसे में सरकार को सदन में इन मुद्दों पर चर्चा का समय देकर कामकाज का माहौल तैयार करना चाहिए.

कांग्रेस इन मुद्दों पर चाहती है चर्चा: कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा सदन में विपक्ष सरकारी प्रतिष्ठानों का कथित दुरूपयोग, केंद्र राज्य संबंध एवं संघीय ढांचे पर आघात से जुड़ा मुद्दा उठाएंगे. इसके अलावा सीमा पर चीन को लेकर जो सवाल खड़े हो रहे हैं उसपर भी विपक्ष बहस करना चाहता है. चौधरी ने कहा कि इस मुद्दे पर भी विपक्ष चर्चा करना चाहता है. उन्होंने कहा कि कश्मीर से हिन्दुओं का पलायन मुद्दे पर भी सदन में चर्चा की जाएगी.

शीतकालीन सत्र में होंगी 17 बैठकें: बता दें, संसद का शीतकालीन सत्र सात दिसंबर से शुरू हो रहा है. सत्र 29 दिसंबर तक चलेगा. इस बार के शीतकालीन सत्र में कुल 17 बैठकें होंगी. इससे पहले सरकार ने पिछले सप्ताह शीतकालीन सत्र के दौरान पेश किये जाने वाले 16 विधेयकों की सूची जारी की थी .

भाषा इनपुट के साथ

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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