बाघों वाले नेशनल पार्क में अफीम की खेती: पुलिस ने नष्ट किए 95,850 पौधे, बाजार की कीमत लगभग दो करोड़ रुपये
सिमिलिपाल नेशनल पार्क में अफीम की खेती को ओडिशा पुलिस ने नष्ट कर दिया. फोटो- एआई जेनेरेटेड.
ओडिशा के मयूरभंज जिले में स्थित सिमिलिपाल राष्ट्रीय उद्यान के अंदर अवैध रूप से उगाई जा रही अफीम की खेती पर प्रशासन ने कार्रवाई की है. जशीपुर क्षेत्र में करीब एक एकड़ से ज्यादा जमीन पर फैली इस खेती को रविवार को नष्ट कर दिया. इस कार्रवाई में लगभग 95 हजार पोस्ता के पौधे खत्म किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब दो करोड़ रुपये बताई जा रही है.
ओडिशा के मयूरभंज जिले में स्थित सिमिलिपाल नेशनल पार्क आमतौर पर घने जंगल, बाघों की मौजूदगी और नैचुरल ब्यूटी के लिए जाना जाता है. लेकिन हाल ही में इस शांत जंगल के भीतर एक ऐसी बात सामने आई, जिसने प्रशासन को भी चौंका दिया. जंगल के एक दूर-दराज इलाके में अवैध रूप से अफीम की खेती की जा रही थी, जिसकी भनक लगते ही पुलिस और अन्य विभाग हरकत में आ गए.
यह मामला जशीपुर थाना क्षेत्र का है, जहां जंगल के भीतर लगभग एक एकड़ से ज्यादा जमीन पर पोस्ता उगाया गया था. यह इलाका इतना दुर्गम है कि वहां आम लोगों का पहुंचना लगभग नामुमकिन है. आसपास बाघों और दूसरे जंगली जानवरों की आवाजाही रहती है, इसलिए कोई भी आसानी से उस इलाके में जाने की हिम्मत नहीं करता. शायद इसी वजह से तस्करों ने इस जगह को अपनी अवैध खेती के लिए चुना था.
रविवार को पुलिस, आबकारी विभाग और वन विभाग की एक संयुक्त टीम ने जंगल में अभियान चलाया. काफी मशक्कत के बाद टीम उस जगह तक पहुंची, जहां दो अलग-अलग हिस्सों में अफीम की खेती की गई थी. चारों ओर पोस्ता के हरे-भरे पौधे खड़े थे, जैसे किसी ने जंगल के बीच खेत बसा दिया हो. यह इलाका मानवीय गतिविधियों से लगभग अलग-थलग है. सिमलीपाल को पिछले साल अप्रैल 2025 में देश का 107वें नेशनल पार्क के रूप में मान्यता दी गई.
सोमवार को आधिकारिक बयान में कहा गया कि टीम ने बिना देर किए पूरी फसल को नष्ट करने की कार्रवाई शुरू की. मौके पर ही हजारों पौधों को काटकर खत्म कर दिया गया. अधिकारियों के अनुसार, कुल 95,850 अफीम के पौधे नष्ट किए गए, जिनकी बाजार कीमत लगभग दो करोड़ रुपये (1.91 करोड़ रुपये) के आसपास बताई जा रही है.
अगर यह फसल बाजार तक पहुंच जाती, तो इससे न सिर्फ कानून-व्यवस्था बल्कि समाज पर भी बुरा असर पड़ सकता था. अधिकारियों ने बताया कि नेशनल पार्क के अंदर इस तरह की खेती करना न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि यह जंगल और वन्यजीवों के लिए भी बड़ा खतरा है. इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है और जंगली जानवरों की सुरक्षा पर भी असर पड़ता है.
इस मामले में जशीपुर थाने में दो अलग-अलग केस दर्ज किए गए हैं. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरी साजिश के पीछे कौन लोग शामिल हैं और इतनी बड़ी खेती जंगल के भीतर कैसे की जा रही थी. यह भी जांच की जा रही है कि क्या इसमें किसी स्थानीय नेटवर्क या बाहरी गिरोह की भूमिका थी. इस कार्रवाई के बाद प्रशासन ने साफ संदेश दिया है कि जंगल और संरक्षित क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सिमिलिपाल जैसे संवेदनशील इलाके में कानून का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.
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