Nobel Prize: तीन वैज्ञानिकों को दिया गया रसायन का नोबेल पुरस्कार, देखें इनकी उपलब्धियां

बर्टोज्जी कैलिफोर्निया में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में हैं, मेल्डल डेनमार्क के कोपेनहेगन विश्वविद्यालय से हैं और शार्पलेस कैलिफोर्निया के स्क्रिप्स रिसर्च से संबद्ध हैं. शार्पलेस ने पहले 2001 में नोबेल पुरस्कार जीता था. वह दो बार पुरस्कार प्राप्त करने वाले पांचवें व्यक्ति हैं.
रसायन विज्ञान में इस वर्ष का नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize ) कैरोलिन आर बर्टोज्जी (R. Bertozzi), मोर्टन मेल्डल (Morten Meldal ) और के बैरी शार्पलेस (K. Barry Sharpless ) को संयुक्त रूप से दिया गया. रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज के महासचिव हैंस एलेग्रेन ने स्वीडन के स्टॉकहोम में करोलिंस्का इंस्टीट्यूट में विजेताओं की घोषणा की.
अणुओं के एक साथ विखंडन का तरीका किया विकसित
कैरोलिन आर बर्टोज्जी, मोर्टन मेल्डल और के बैरी शार्पलेस को नोबेल पुरस्कार अणुओं के एक साथ विखंडन का तरीका विकसित करने के लिए प्रदान किया गया है. उनके काम को क्लिक रसायन और बायोऑर्थोगोनल प्रतिक्रियाओं के रूप में जाना जाता है. इसका उपयोग कैंसर की दवाएं बनाने, डीएनए मैपिंग करने और एक विशिष्ट उद्देश्य के अनुरूप सामग्री बनाने के लिए किया जाता है.
Nobel Prize in Chemistry jointly awarded to Carolyn R. Bertozzi, Morten Meldal and K. Barry Sharpless “for the development of click chemistry and bioorthogonal chemistry.” pic.twitter.com/isIRaFvxsH
— ANI (@ANI) October 5, 2022
बैरी शार्पलेस को 2001 में भी मिला था नोबेल पुरस्कार
बर्टोज्जी कैलिफोर्निया में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में हैं, मेल्डल डेनमार्क के कोपेनहेगन विश्वविद्यालय से हैं और शार्पलेस कैलिफोर्निया के स्क्रिप्स रिसर्च से संबद्ध हैं. शार्पलेस ने पहले 2001 में नोबेल पुरस्कार जीता था. वह दो बार पुरस्कार प्राप्त करने वाले पांचवें व्यक्ति हैं.
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इन वैज्ञानिकों को भी मिला नोबेल ���ुरस्कार
निएंडरथल डीएनए के रहस्यों को उजागर करने वाले स्वीडिश वैज्ञानिक स्वैंते पैबो को चिकित्सा के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया. जबकि तीन वैज्ञानिकों फ्रांस के एलै एस्पै, अमेरिका के जॉन एफ क्लाउसर और ऑस्ट्रिया के एंतन साइलिंगर ने संयुक्त रूप से मंगलवार को भौतिकी में यह पुरस्कार जीता कि छोटे कण अलग होने पर भी एक दूसरे के साथ संबंध बनाए रख सकते हैं.
नोट – भाषा इनपुट के साथ
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By अरबिंद कुमार मिश्रा
अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.
झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.
करियर का सफरनामा
अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग
खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:
34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.
पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.
पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.
शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)
UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.
बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.
एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.
लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.
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