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वकील साहब के घायल बेटे को नहीं मिली व्हीलचेयर, तो अस्पताल के थर्ड फ्लोर पर चढ़ा दी स्कूटी

Updated at : 17 Jun 2023 5:06 PM (IST)
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वकील साहब के घायल बेटे को नहीं मिली व्हीलचेयर, तो अस्पताल के थर्ड फ्लोर पर चढ़ा दी स्कूटी

वकील मनोज जैन को बेटे को दिखाने के लिए कोटा के एमबीएमस अस्पताल के थर्ड फ्लोर पर स्थित ऑर्थोपेडिक्स वार्ड में जाना था. व्हीलचेयर नहीं मिलने पर वे अपने बेटे को इलेक्ट्रिक स्कूटर पर लेकर लिफ्ट के माध्य से थर्ड फ्लोर पर जा पहुंचे.

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कोटा : राजस्थान के कोटा शहर के एक अस्पताल में वकील साहब को उनके घायल बेटे को ऑर्थोपेडिक्स विभाग तक ले जाने के लिए व्हीलचेयर नहीं मिली, तो उन्होंने अस्पताल के थर्ड फ्लोर पर अपनी स्कूटी को ही चढ़ा दिया. यह घटना गुरुवार की दोपहर की है. अब सोशल मीडिया पर उनका यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. अंग्रेजी के अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर प्रकाशित समाचार के अनुसार, वकील साहब का नाम मनोज जैन है और उनके बेटे लवित्र जैन की टांग टूट गई थी. अपने बेटे के पैर का इलाज कराने के लिए मनोज जैन कोटा के एमबीएस अस्पताल गए. वहां पर उन्हें अपने बेटे को अस्पताल के थर्ड फ्लोर पर स्थित ऑर्थोपेडिक वार्ड में ले जाने के लिए व्हीलचेयर नहीं मिली. इसके विरोध में उन्होंने अपनी स्कूटी को ही थर्ड फ्लोर पर चढ़ा दी.

लिफ्ट से थर्ड फ्लोर पर चढ़ाई स्कूटी

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, वकील मनोज जैन को बेटे को दिखाने के लिए कोटा के एमबीएमस अस्पताल के थर्ड फ्लोर पर स्थित ऑर्थोपेडिक्स वार्ड में जाना था. व्हीलचेयर नहीं मिलने पर वे अपने बेटे को इलेक्ट्रिक स्कूटर पर लेकर लिफ्ट के माध्य से थर्ड फ्लोर पर जा पहुंचे. रिपोर्ट में कहा गया है कि वकील साहब जब वार्ड से लौट रहे थे, तो वार्ड प्रभारी की नजर उन पर पड़ गई और उन्होंने वकील साहब को रोक लिया. इसके बाद उन्होंने स्कूटी की चाबी निकाल ली, जिसके बाद वकील साहब ने अस्पताल में कुप्रबंधन के विरोध में जमकर हंगामा किया.

पुलिस में रिपोर्ट नहीं

रिपोर्ट में बताया किया है कि किसी की ओर से शिकायत नहीं किए जाने की वजह से स्थानीय पुलिस ने वकील साहब के खिलाफ कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की और बाद में दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर सुलह करा दिया गया. एमबीएस अस्पताल की ओपीडी में गुरुवार दोपहर करीब 1.30 बजे एक असामान्य दृश्य दिखाई दिया, जब एक काले कोट वाला व्यक्ति अपनी इलेक्ट्रिक स्कूटी के साथ लिफ्ट में जाते देखा गया. यहां तक कि वह अपनी स्कूटी के साथ लिफ्ट में घुसे और तीसरी मंजिल पर आर्थोपेडिक वार्ड में अपने बेटे को ले जाने के लिए पहुंचे. बेटे के एक पैर में प्लास्टर लगा हुआ था.

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क्या कहते हैं वकील साहब

वकील साहब का दावा है कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया. वे अपना इलेक्ट्रिक स्कूटी थर्ड फ्लोर तक ले जाने के लिए मजबूर थे, क्योंकि उन्हें कोई व्हीलचेयर नहीं मिली. उन्होंने इस अव्यवस्था के लिए अस्पताल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया. इस बीच, एमबीएस में न्यू ओपीडी के प्रभारी देवकीनंदन ने कहा कि वकील साहब को रोकना और चाबी निकालना उनका कर्तव्य था, क्योंकि वार्ड में वाहन ले जाना नियमों के विरूद्ध है.

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