Net Zero Explainer: क्या है नेट जीरो? भारतीय रेलवे को कैसे नेट जीरो बनायेंगे पीएम मोदी, यहां जानें

Updated at : 28 Jun 2022 7:09 AM (IST)
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विकास कार्यों की वजह से रांची मंडल से चलने वाली कई ट्रेनें रद्द.

Net Zero Explainer: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आज जी7 में संबोधन के बाद इस बात की चर्चा तेज हो गयी है कि भारतीय रेलवे नेट जीरो कैसे बनेगा. नेट जीरो है क्या? क्या भारत में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन पूरी तरह से बंद हो जायेगा? इन सवालों के जवाब यहां पढ़ें...

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Net Zero Explainer: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी7 के शिखर सम्मेलन में सोमवार को कहा कि इस दशक में भारत की विशाल रेल प्रणाली को ‘नेट जीरो’ बनाया जायेगा. इसके बाद से सवाल उठने लगे हैं कि नेट जीरो है क्या? किस तरह से रेलवे (Indian Railways) को ‘नेट जीरो’ (Net Zero) बनाया जायेगा. तो आज हम आपको बतायेंगे कि नेट जीरो क्या है (What is Net Zero) और इसके लक्ष्य को कैसे हासिल किया जा सकता है. इसे हासिल कर पाना संभव है या नहीं.

धरती का तापमान और बढ़ा, तो जीवन होगा मुश्किल

नेट जीरो इन दिनों काफी चर्चा में है. यह ग्रीनहाउस गैसों (Green House Gases) के उत्सर्जन को नियंत्रित करने से जुड़ा है. यानी ग्रीनहाउस गैस (GHG) ने जलवायु को बहुत ज्यादा प्रभावित किया है. यानी ये गैस जलवायु और वातावरण (Climate Change) दोनों के लिए हानिकारक है. इसकी वजह से धरती और समुद्र दोनों का तापमान बढ़ (Temperature of Sea) रहा है. ग्लेशियर पिघल (Glaciers Melting) रहे हैं. दुनिया में गर्मी बढ़ रही है. दुनिया भर के वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि अगर जल्द इसे नियंत्रित नहीं किया गया, तो धरती पर जीवन मुश्किल हो जायेगा.

Also Read: G7 शिखर सम्मेलन में बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी- इस दशक में रेलवे को बनायेंगे ‘नेट जीरो’
ग्रीनहाउस गैसों पर नियंत्रण जरूरी

इसलिए ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर नियंत्रण जरूरी हो गया है. आज के दौर में ग्लोबल लीडर्स जब मिलते हैं, तो जलवायु संकट पर चर्चा अवश्य होती है. भारत ने दुनिया को दिशा दिखाने की कोशिश की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने आज जी7 के शिखर सम्मेलन (G7 Summit) में आमंत्रित सदस्य के रूप में दुनिया को बताया कि कैसे भारत ने तय समय से 9 साल पहले गैर-जीवाश्म स्रोतों से 40 प्रतिशत ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य हासिल कर लिया.

क्या है नेट जीरो (What is Net Zero?)

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दशक में भारतीय रेलवे को ‘नेट जीरो’ बनाया जायेगा. इसका अर्थ यह नहीं है कि रेलवे की वजह से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बंद हो जायेगा. इसका अर्थ यह है कि रेलवे का इन्फ्रास्ट्रक्चर इस तरह से तैयार किया जायेगा कि आने वाले दशक में उतना ही गैस उत्सर्जित होगा, जितने गैस को अवशोषित करने की हमारी क्षमता होगी. नेट जीरो का अर्थ है नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन अर्थात उतना ही कार्बन का उत्सर्जन करना, जो जीवन के लिए नुकसानदायक न हो. पर्यावरण के लिए हानिकारक न हो.

कैसे हासिल करेंगे नेट जीरो का लक्ष्य

प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान के बाद सवाल उठने लगे हैं कि रेलवे इस लक्ष्य को कैसे हासिल करेगा. बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वन सन, वन ग्रिड की बात भी कही है. भारत में सोलर पावर पर काफी जोर दिया जा रहा है. सोलर एनर्जी से लैस दुनिया का पहला एयरपोर्ट भारत ने बनाया है. कोचीन में. रेलवे को भी सोलर पावर से चलाने का परीक्षण भारत में चल रहा है. सोलर एनर्जी सबसे क्लीन एनर्जी है. इससे ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं होता.

सोलर एनर्जी से हासिल करेंगे ‘नेट जीरो’ का लक्ष्य

भारत के कई राज्य ऐसे हैं, जहां सूर्य की चमक बहुत ज्यादा होती है. भारत सरकार उन राज्यों में ट्रेनों का परिचालन सोलर एनर्जी (Solar Energy) से करने पर विचार कर रही है. इतना ही नहीं भारत सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल के मिश्रण (Ethenol Blend) को भी मंजूरी दे दी है. इस तरह भारत क्लीन एनर्जी की दिशा में कई मोर्चे पर एक साथ काम कर रहा है. इसलिए उम्मीद की जा रही है कि जल्दी ही भारत रेलवे को ‘नेट जीरो’ बनाने के लक्ष्य को भी हासिल कर लेगा.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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