मोदी अब भी PM की पहली पसंद, 48.7% का भरोसा, आज चुनाव हुए तो NDA को 326 सीटें, MOTN
पीएम मोदी, फोटो- एएनआई (File Photo)
India Today-CVoter सर्वे के अनुसार जानें आज चुनाव हुए तो NDA को कितनी सीटें मिलेंगी और कौन है जनता की पहली पसंद.
अगर आज लोकसभा चुनाव होते हैं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाला NDA एक बार फिर सरकार बनाने की मजबूत स्थिति में दिखाई देता है. India Today-CVoter Mood of the Nation (MOTN) सर्वे के मुताबिक, NDA को 326 सीटें मिलने का अनुमान है. हालांकि जनवरी 2026 के पिछले सर्वे में गठबंधन के लिए 352 सीटों का अनुमान लगाया गया था, यानी इस बार NDA के अनुमानित आंकड़े में 26 सीटों की कमी आई है.
इसके बावजूद 326 सीटों का आंकड़ा NDA को स्पष्ट बहुमत से काफी आगे रखता है. 543 सदस्यीय लोकसभा में बहुमत के लिए 272 सीटों की जरूरत होती है. यानी सीटों में गिरावट के बावजूद सत्तारूढ़ गठबंधन अभी भी मजबूत स्थिति में है.
48.7% लोगों की PM के तौर पर पहली पसंद मोदी
सर्वे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत लोकप्रियता भी NDA के लिए बड़ी ताकत के तौर पर सामने आई है. 48.7 फीसदी लोगों ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए पहली पसंद बताया. हालांकि जनवरी 2026 के MOTN सर्वे में मोदी के पक्ष में यह आंकड़ा 55 फीसदी था. यानी करीब छह महीने में उनकी लोकप्रियता में लगभग 6 प्रतिशत अंक की कमी आई है.
इसके बावजूद प्रधानमंत्री पद की पसंद के मामले में मोदी सबसे आगे हैं. यह आंकड़ा बताता है कि चुनावी सीटों के अनुमान में कुछ गिरावट के बावजूद मोदी की व्यक्तिगत लोकप्रियता अभी भी NDA के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनी हुई है.
BJP को 261 सीटें, फिर भी 2024 से बेहतर अनुमान
पार्टीवार आंकड़ों पर नजर डालें तो BJP अभी भी सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई है. सर्वे के मुताबिक, अगर आज चुनाव होते हैं तो भाजपा को 261 सीटें मिलने का अनुमान है. जनवरी 2026 के MOTN सर्वे में BJP के लिए 287 सीटों का अनुमान लगाया गया था. यानी छह महीने में पार्टी के अनुमानित आंकड़े में 26 सीटों की कमी आई है.
हालांकि 261 सीटों का अनुमान भाजपा के लिए अब भी मजबूत प्रदर्शन का संकेत देता है. 2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 240 सीटें जीती थीं. इस लिहाज से मौजूदा सर्वे का अनुमान 2024 के वास्तविक प्रदर्शन से 21 सीट ज्यादा है.
कांग्रेस की सीटों में भी उछाल
जहां BJP के आंकड़ों में गिरावट दिखाई दे रही है, वहीं कांग्रेस ने अनुमानित सीटों के मामले में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की है. अगस्त 2026 के MOTN सर्वे में कांग्रेस को 106 सीटें मिलने का अनुमान है. जनवरी 2026 में कांग्रेस के लिए यह अनुमान 80 सीटों का था. यानी छह महीने में पार्टी के अनुमानित आंकड़े में 26 सीटों की बढ़ोतरी हुई है.
अगस्त 2025 के MOTN में कांग्रेस के लिए 97 सीटों का अनुमान लगाया गया था. इस लिहाज से मौजूदा आंकड़ा पिछले साल के अनुमान से भी बेहतर है और पार्टी की बढ़ती चुनावी संभावनाओं की ओर इशारा करता है.
INDIA गठबंधन को 185 सीटों का अनुमान
पूरे विपक्षी INDIA गठबंधन की बात करें तो अगस्त 2026 के सर्वे में उसे 185 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है. जनवरी 2026 के सर्वे में गठबंधन के लिए 182 सीटों का अनुमान था. यानी छह महीने में इसमें केवल 3 सीटों की बढ़ोतरी हुई है.
हालांकि यह आंकड़ा 2024 लोकसभा चुनाव में INDIA गठबंधन द्वारा जीती गई 234 सीटों से काफी कम है. 2024 में विपक्षी गठबंधन ने 2014 के बाद पहली बार NDA के सामने मजबूत चुनौती पेश की थी. इसलिए मौजूदा सर्वे में कांग्रेस की व्यक्तिगत बढ़त जरूर दिखाई देती है, लेकिन पूरे INDIA गठबंधन की तस्वीर में बहुत बड़ा बदलाव नहीं आया है.
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वोट शेयर में भी NDA आगे
सीटों के साथ वोट शेयर के आंकड़े भी NDA की बढ़त को दिखाते हैं। अगस्त 2026 के MOTN सर्वे में NDA को 45.1 फीसदी वोट शेयर मिलने का अनुमान लगाया गया है.
जनवरी 2026 में NDA का अनुमानित वोट शेयर 47 फीसदी था। यानी इसमें करीब 2 प्रतिशत अंक की कमी आई है. अगस्त 2025 के सर्वे के बाद से यह NDA का सबसे कम अनुमानित वोट शेयर है. उस समय NDA के लिए 46.7 फीसदी वोट शेयर का अनुमान लगाया गया था. फिर भी मौजूदा अनुमान 2024 लोकसभा चुनाव में NDA को मिले करीब 44 फीसदी वोट शेयर से थोड़ा अधिक है.
वहीं INDIA गठबंधन को अगस्त 2026 के सर्वे में 39.1 फीसदी वोट शेयर मिलने का अनुमान है। जनवरी में यह आंकड़ा 39 फीसदी था. यानी विपक्षी गठबंधन के वोट शेयर में केवल 0.1 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है.
इस तरह NDA और INDIA गठबंधन के बीच अनुमानित वोट शेयर का अंतर करीब 6 प्रतिशत अंक बना हुआ है.
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Gen Z और शिक्षा के मुद्दे से भाजपा की चुनौती बढ़ी
सर्वे के आंकड़ों में BJP और NDA के लिए कुछ चुनौतीपूर्ण संकेत भी दिखाई देते हैं. खास तौर पर Gen Z और शिक्षा से जुड़े मुद्दे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं. परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं को लेकर युवाओं में नाराजगी की चर्चा सामने आई. जुलाई में दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों ने लगातार विरोध प्रदर्शन भी किए. इसके बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया.
यह मोदी सरकार के दौर की अपेक्षाकृत दुर्लभ राजनीतिक घटनाओं में से एक रही. ऐसे में 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले युवाओं, खासकर Gen Z, के बीच बदलते राजनीतिक रुझान और उनकी प्राथमिकताएं NDA के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन सकती हैं.
कांग्रेस की राजनीतिक सक्रियता बढ़ी
दूसरी ओर कांग्रेस पिछले कुछ समय से विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लगातार उठा रही है. महिला आरक्षण से लेकर 20 जुलाई को छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों को लेकर पार्टी ने सरकार को घेरने की कोशिश की.
कांग्रेस की इस लगातार राजनीतिक सक्रियता ने उसे सार्वजनिक बहस में अधिक जगह दिलाई है. हालांकि केवल सर्वे के आंकड़ों के आधार पर यह निश्चित रूप से कहना संभव नहीं है कि कांग्रेस की सीटों में बढ़ोतरी सीधे किसी एक मुद्दे या रणनीति का परिणाम है.
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