Maharashtra Politics : महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव के बाद क्या बड़ा खेल होने वाला है? क्या एनसीपी एक साथ आ जाएगी? क्या चाचा शरद पवार के पास फिर से चले जाएंगे अजित पवार? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जो राजनीतिक गलियारों में उठ रहे हैं. इसकी वजह हाल में हुए कुछ घटनाक्रम हैं. इसके बारे में हम आपको नीचे बताएंगे, इससे पहले उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने क्या कहा है उसे जान लेते हैं.
महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव के बाद एनसीपी के दोनों गुट साथ रहेंगे या नहीं? इस सवाल पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा कि अभी इस बारे में कोई फैसला नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि 13 जनवरी यानी मंगलवार को प्रचार का आखिरी दिन है. इसलिए पूरा ध्यान मतदान को ठीक से कराने पर है. इस मुद्दे पर अभी सोचा नहीं गया है. अजित पवार ने कहा कि इस पर सिर्फ कार्यकर्ताओं से नहीं, बल्कि दोनों गुटों के नेताओं से भी चर्चा करनी होगी. पार्टी को नेता ही चलाते हैं. इसलिए पहले आपसी बातचीत जरूरी है.
चुनाव से पहले पवार परिवार और ठाकरे भाइयों के एकजुट होने को लेकर न्यूज एजेंसी एएनआई ने अजित पवार से सवाल किया. इसे महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री ने पॉजिटिव बताया. उन्होंने कहा कि यह एक अच्छी बात है. अजित पवार ने बताया कि पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में संयुक्त चुनावी रणनीति कार्यकर्ताओं की कोशिशों से बनी. ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें लगा कि आपस में लड़ने से वोट बंट जाएंगे. कार्यकर्ता किसी भी हालत में चुनाव जीतना चाहते थे. दोनों पार्टियों के कुछ लोगों ने मिलकर समाधान निकालने की कोशिश की. शुरुआत में बात नहीं बनी, लेकिन बाद में कुछ गलत बयान और खबरें चलने लगीं. अजित पवार ने साफ किया कि उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि सिर्फ ‘घड़ी’ चुनाव चिह्न का ही इस्तेमाल किया जाए.
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एनसीपी (शरद पवार गुट) और एनसीपी (अजित गुट) यहां आए साथ
3 दिन पहले एनसीपी (शरद पवार गुट) और एनसीपी (अजित गुट) के द्वारा पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निकाय चुनावों से पहले संयुक्त मेनिफेस्टो जारी किया गया है. सांसद सुप्रिया सुले और अजित पवार एक साथ मंच पर नजर आए. इसके बाद सोमवार को सुले ने कहा कि उनके परिवार में कभी कोई विवाद नहीं रहा है.

