विधायकों के इस्तीफे पर निर्णय हो, तब कमलनाथ सरकार शक्ति परीक्षण के लिए तैयार : दिग्विजय सिंह

Kamal Nath government ready for power test : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने गुरुवार को कहा कि कांग्रेस के 22 विधायकों के इस्तीफे पर निर्णय होने के बाद मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार शक्ति परीक्षण का सामना करने के लिए तैयार है.
भोपाल : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने गुरुवार को कहा कि कांग्रेस के 22 विधायकों के इस्तीफे पर निर्णय होने के बाद मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार शक्ति परीक्षण का सामना करने के लिए तैयार है.
विधानसभा सचिवालय में राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन पत्र भरने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए सिंह ने सवाल किया कि ये विधायक विधानसभा अध्यक्ष से खुद मिलकर उन्हें अपना इस्तीफा क्यों नहीं सौंप रहे हैं? यदि भाजपा इसे कांग्रेस का आतंरिक मामला बता रही है तो इन विधायकों के त्यागपत्र भाजपा के नेता भूपेन्द्र सिंह क्यों विधानसभा अध्यक्ष को सौंपते हैं? सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदेश में संवैधानिक संकट के लिए भाजपा जिम्मेदार है तथा वह सत्ता हथियाने के लिए जिस प्रकार के हथकंडे अपना रही है, उसे देश को समझना चाहिए.
उन्होंने कहा, ‘‘जैसा कि कमलनाथ जी (मुख्यमंत्री) पहले ही कह चुके हैं कि हम शक्ति परीक्षण के लिए तैयार हैं, लेकिन शक्ति परीक्षण के पहले विधायकों के इस्तीफे पर निर्णय होना चाहिए.” भाजपा पर कांग्रेस विधायकों को कब्जे में रखने का आरोप लगाते हुए सिंह ने कहा, ‘‘यह प्रजातांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है.वह उन्हें छोड़े. अगर स्पीकर साहब (विधानसभा अध्यक्ष) के सामने वे अपना पक्ष खुद रखते हैं, उसके बाद जो भी निर्णय होगा, उसे हम स्वीकार करेंगें.” पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘बात ये है कि इस्तीफे मंजूर कब होंगे.इस्तीफे तब मंजूर होंगे जब ये विधायक (विधानसभा) अध्यक्ष जी के सामने खुद बैठकर कहेंगे कि मेरे दस्तखत हैं. मुझ पर कोई दबाव नहीं है और जब तक इस्तीफों पर निर्णय नहीं होता है तब तक फ्लोर टेस्ट (शक्ति परीक्षण) कैसे करवा लें?”
फोन उनके ले लिए गए हैं.” उन्होंने कहा, “ ये भी अजीब बात है कि कांग्रेस पार्टी के विधायकों के इस्तीफे भाजपा के विधायक भूपेन्द्र सिंह लेके आते हैं और उम्मीद करते हैं कि इस्तीफे मंजूर हो जायें. फिर कहते हैं कि कांग्रेस का आतंरिक मामला है. अगर हमारा आतंरिक मामला है तो उन लोगों (विधायकों) को आपने कैद क्यों कर रखा है, छोड़िए उन्हें.” कांग्रेस नेता ने कहा, “उनसे बयान दिलवा रहे हैं, वीडियो भिजवा रहे हैं.लेकिन स्पीकर के सामने उनको पेश क्यों नहीं किया जा रहा है?” सिंह ने कहा कि उन्होंने कभी अपनी विचाराधारा के साथ समझौता नहीं किया है और अपनी राजनीतिक जवाबदेही पर विश्वास करते हैं.
इससे पहले सिंह ने कांग्रेस नेताओं, अपने मंत्री पुत्र जयवर्धन सिंह और पत्नी अमृता सिंह के साथ विधानसभा सचिवालय में निर्वाचन अधिकारी के समक्ष राज्यसभा के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया. इसके बाद सिंह ने उनके प्रति विश्वास जताने और राज्यसभा में कांग्रेस का उम्मीदवार बनाने के लिए कांग्रेस की कार्यवाहक अध्यक्ष सोनिया गांधी, पार्टी नेता राहुल गांधी और मुख्यमंत्री कमलनाथ के प्रति आभार व्यक्त किया.पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के मंगलवार को कांग्रेस छोड़ने के बाद कांग्रेस के 22 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया. इनमें से 19 विधायक फिलहाल बेंगलुरु में ठहरे हुए हैं जबकि तीन मध्यप्रदेश में ही हैं.
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By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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