जामिया ने छात्रों व स्टाफ के लिए शुरू की टेली-काउंसलिंग सेवा
Author : Rajneesh Anand Published by : Prabhat Khabar Updated At : 01 Apr 2020 1:03 PM
Jamia millia islamia कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए हुए लॉकडाउन में छात्रों की समस्याओं को दूर करने के लिए जामिया मिलिया इस्लामिया ने टेली-काउंसलिंग सेवा शुरू की है.
नयी दिल्ली : कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए हुए लॉकडाउन में छात्रों की समस्याओं को दूर करने के लिए जामिया मिलिया इस्लामिया ने टेली-काउंसलिंग सेवा शुरू की है.
विश्वविद्यालय के काउंसलिंग एवं गाइडेंस सेंटर द्वारा शुरू की गयी इस सेवा के माध्यम से जामिया के शिक्षण व गैर-शिक्षण स्टाफ और छात्रों को कोरोना वायरस के चलते उत्पन्न हुए तनाव को कम करने के लिए सहयोग प्रदान किया जायेगा. इतना ही नहीं विश्वविद्यालय के जामिया टीचर्स एसोसिएशन (जेटीए) के सभी सदस्य स्वेच्छा से महामारी से लड़ने के प्रयासों में योगदान देने के लिए अपना एक दिन का वेतन दान करेंगे.
जामिया की वाइस चांसलर नजमा अख्तर ने 29 मार्च को एक पत्र लिखकर सभी जामिया कर्मचारियों से प्रधानमंत्री राहत कोष में अपने एक दिन के वेतन का योगदान देने की अपील की थी. जेटीए कार्यकारी समिति ने सभी शिक्षकों से अप्रैल महीने के वेतन से योगदान करने का आग्रह किया था, जिस पर सभी सदस्यों ने सहमति जतायी है.
इस वक्त पूरा देश कोरोना वायरस से लड़ रहा है. 21 दिनों के लॉकडाउन की वजह से पूरा देश ठहर गया है, जिससे अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान हो रहा है. आपदा की इस स्थिति में विभिन्न संस्थान अपने स्तर पर सहयोग व फंड देने के लिए आगे बढ़ रहे हैं. जामिया ने अपने इस प्रयास से कोरोना के खिलाफ लड़ाई में साथ देने की दिशा में अहम कदम उठाया है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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