'वर्षों की नींद के बाद जागे जैक डोर्सी', ट्विटर के पूर्व CEO जैक डोर्सी के दावे पर कांग्रेस और BJP आमने-सामने

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 13 Jun 2023 12:59 PM

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चंद्रशेखर ने कहा कि जैक के समय ट्विटर पर पक्षपातपूर्ण रवैये का यह स्तर था कि उन्हें भारत में इस मंच से गलत सूचनाओं को हटाने में दिक्कत थी, जबकि अमेरिका में अनेक घटनाओं में उन्होंने खुद ऐसा किया. जानें सरकार की ओर से मामले पर क्या कहा गया

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भारत द्वारा दबाव पर ट्विटर के पूर्व सीईओ जैक डोर्सी के दावे पर कांग्रेस हमलावर हो गयी है. कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत का बयान मामले को लेकर आया है. श्रीनेत ने कहा कि लोकतंत्र की जननी में लोकतंत्र की हत्या कैसे हो रही है ये बताने के लिए आज प्रेस कांन्फ्रेंस बुलायी गयी है. उन्होंने कहा कि एक साल से अधिक समय से जब किसान सर्दी, गर्मी और बारिश को झेलते हुए दिल्ली की सीमा पर आंदोलन कर रहे थे, तब उन्हें ‘मवाली, खालिस्तानी, पाकिस्तानी और आतंकवादी’ कहा जा रहा था और ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म से कहा जा रहा था कि अगर किसानों को दिखाया तो उन्हें भारत में बंद कर दिया जाएगा और छापेमारी की जाएगी.

इधर उद्धव ठाकरे गुट के नेता और सांसद संजय राउत ने कहा कि मैंने देखा है कि कैसे देश का लोकतंत्र और आजादी खतरे में है और कैसे पर्दे के पीछे लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है. ट्विटर के पूर्व सीईओ जैक डोर्सी के बयान से यह स्पष्ट होता है. मामले पर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का बयान भी आया है. उन्होंने अपने ट्विटर वॉल पर लिखा कि ट्विटर के पूर्व सीईओ जैक डोर्सी को धन्यवाद….उन्होंने भारत में शक्तिशाली पदों पर बैठे उन लोगों को बेनकाब करने का काम किया जिन्होंने आप पर ट्विटर अकाउंट बंद करने का दबाव डाला.

ट्विटर के को-फाउंडर और पूर्व CEO जैक डोर्सी के बयान पर किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि उस समय भी हमें जानकारी थी कि किसान आंदोलन की जितनी पहुंच फेसबुक और ट्विटर पर आनी चाहिए वो नहीं आ रही थी. ये(सरकार) स्थानीय स्तर पर इसे रोकने का प्रयास करते थे. इसका(ट्विटर) जो मालिक था उसने अब स्पष्ट कहा है. उसने(जैक डोर्सी) ठीक कहा है, भारत सरकार ने प्रयास किये होंगे.

सरकारी दबाव के जैक डोर्सी के दावों को केंद्र ने झूठा बताया

इधर, ट्विटर के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) जैक डोर्सी ने दावा किया है कि इस सोशल मीडिया मंच को देश में किसानों के प्रदर्शन के दौरान सरकारी दबाव और बंद किये जाने की धमकियों का सामना करना पड़ा था. उनके इस बयान को केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने झूठा करार दिया है. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री चंद्रशेखर ने डोर्सी के दावों को खारिज करते हुए ट्वीट किया कि ‘‘डोर्सी के समय ट्विटर प्रशासन को भारतीय कानून की संप्रभुता को स्वीकार करने में दिक्कत होती थी.’’ उन्होंने कहा कि कोई जेल नहीं गया और ना ही ट्विटर बंद किया गया.

ट्विटर के सह-संस्थापक और पूर्व सीईओ डोर्सी ने आरोप लगाया है कि देश में किसानों के प्रदर्शन के दौरान भारत सरकार ने ट्विटर पर दबाव डाला था और सरकार का कहना नहीं मानने पर भारत में ट्विटर को बंद करने, उसके कर्मचारियों के घरों पर छापे मारने की धमकियां दी गयी थीं. चंद्रशेखर ने ट्वीट किया कि डोर्सी और उनकी टीम के समय ट्विटर लगातार और बार-बार भारतीय कानून का उल्लंघन कर रहा था. उन्होंने 2020 से 2022 तक बार-बार कानूनों की अवमानना की और जून 2022 में ही उन्होंने अंतत: अनुपालन शुरू किया.

Also Read: किसान आंदोलन के दौरान भारत ने ट्विटर को बैन करने की दी थी धमकी? जैक डोर्सी के आरोप पर आया सरकार का जवाब


भारत का संविधान मानना पड़ेगा

ट्विटर के पूर्व सीईओ जैक डोर्सी के भारत के ‘दबाव’ वाले दावे पर भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि ट्विटर के लोग उस समय भारत का संविधान और कानून नहीं मानते थे…भारत में सारे सोशल मीडिया का पूरा सम्मान है. भारत एक लोकतंत्र है लेकिन भारत का संविधान मानना पड़ेगा.


वर्षों की नींद के बाद जागे जैक डोर्सी

जैक डोर्सी के भारत द्वारा दबाव वाले दावे पर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि जो कहा गया है वो सफेद झूठ है. वर्षों की नींद के बाद जागे जैक डोर्सी, अपने काले कारनामों पर परदा डालना चाहते हैं. जब दूसरे व्यक्ति द्वारा ट्वीटर को खरीदा गया तब ट्विटर फाइल्स में खुलासा हुआ कि किस तरह इस प्लैटफॉर्म का दुरुपयोग किया जाता था और पक्षपात किया जाता था…जब भारत में चुनाव आते हैं तब कई सारी विदेशी ताकते जागती हैं. उनका प्रयास दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में विघ्न पैदा करना होता है.


राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने क्या कहा

ट्विटर के पूर्व सीईओ जैक डोर्सी के भारत के ‘दबाव’ वाले दावे पर राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि सबसे पहले मैं जानना चाहूंगा कि जैक डोर्सी ऐसा बयान क्यों देंगे? राजीव चंद्रशेखर कहते हैं कि यह झूठ है, वो झूठ क्यों बोलेगा? जैक डोर्सी के पास झूठ बोलने का कोई कारण नहीं है कि जब विरोध प्रदर्शन चल रहे थे तो उन्होंने(सरकार) ट्विटर को धमकी दी थी कि वे ट्वीटर के कार्यालयों को बंद कर देंगे और ट्विटर के तत्कालीन कर्मचारियों पर छापा मारेंगे.


कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने क्या कहा

ट्विटर के सह-संस्थापक और पूर्व सीईओ जैक डोर्सी के भारत द्वारा दबाव वाले दावे पर कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार की निरंकुशता स्थापित हो चुकी थी. ट्वीटर के पूर्व संस्थापक और सीईओ जैक डोर्सी ने कहा है कि मोदी सरकार और पीएम किसानों और उनके संगठनों के खातों को ब्लॉक करने के लिए कहते थे. सरकार कहती थी कि पत्रकारों के एकाउंट को ब्लॉक किया जाए अन्यथा ट्विटर ऑफिस पर छापा मारा जाएगा. इससे साबित होता है कि देश में लोकतंत्र की आड़ में तानाशाही है.


कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने क्या कहा

ट्विटर के पूर्व सीईओ जैक डोर्सी के भारत के ‘दबाव’ वाले दावे पर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि जैक डॉर्सी ने जो कहा है वह जरा भी आश्चर्यजनक नहीं है. पिछले 9 वर्षों में, 2014 के बाद, देश में भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिक स्वतंत्रता का व्यवस्थित क्षरण हुआ है. दुर्भाग्य से, यह घटना केवल केंद्र सरकार तक ही सीमित नहीं है. कुछ राज्य सरकारें भी समान रूप से कठोर और निरंकुश रही हैं जिस तरह से वे असहमति को दबाने और वैकल्पिक आवाजों को दबाने की कोशिश करती हैं.

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लेखक के बारे में

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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