Indian Railways : रेलवे के 166 साल के इतिहास में पहली बार हुआ ऐसा, जानें पूरी बात
Author : Amitabh Kumar Published by : Prabhat Khabar Updated At : 09 Jun 2020 8:39 AM
Indian Railways news, Railway Minister Piyush Goyal, IRCTC News: भारतीय रेलवे (Indian Railways) देश के लोगों की रीढ़ है. दूर की यात्रा के लिए यह सबसे सस्ता और सुगम यातायात का साधन है. हालांकि कुछ लोग ऐसे भी हैं जो रेल की यात्रा करने से डरते हैं कारण दुर्घटना...कोरोना संक्रमण (coronavirus in india) को रोकने के लिए जब लॉकडाउन की घोषणा की गयी तो इस दौरान भी रेलने ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी और श्रमिक स्पेशल ट्रेन (shramik special train) चलायी.
Indian Railways news, Railway Minister Piyush Goyal, IRCTC: भारतीय रेलवे (Indian Railways) देश के लोगों की रीढ़ है. दूर की यात्रा के लिए यह सबसे सस्ता और सुगम यातायात का साधन है. हालांकि कुछ लोग ऐसे भी हैं जो रेल की यात्रा करने से डरते हैं कारण दुर्घटना…कोरोना संक्रमण (coronavirus in india) को रोकने के लिए जब लॉकडाउन की घोषणा की गयी तो इस दौरान भी रेलने ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी और श्रमिक स्पेशल ट्रेन (shramik special train) चलायी.
आपको बता दें कि पिछले दशकों में कई बड़ी रेल दुर्घटना देखने को मिली है जिसने लोगों को डरने पर मजबूर कर दिया. इसी बीच रेल यात्रा से डरने वाले लोगों के लिए एक अच्छी खबर आयी है. जी हां, सरकार के अनुसार, पिछले वर्ष के दौरान इंडियन रेलवे का अबतक का सबसे अच्छा सुरक्षा प्रदर्शन रहा है. अप्रैल, 2019 के बाद से रेल दुर्घटना में एक भी यात्री की जान नहीं गयी है.
इस संबंध में रेल मंत्रालय की ओर से एक रिलीज जारी किया गया है. इस रिलीज के अनुसार भारतीय रेलवे ने अप्रैल 2019- मार्च 2020 के दौरान अब तक का सर्वश्रेष्ठ सुरक्षा रिकॉर्ड दर्ज किया है. इस वर्ष भी (01.04.2019 से 08.06.2020 तक) किसी रेल दुर्घटना में किसी भी यात्री की मृत्यु नहीं हुई है. भारत में 166 वर्ष पहले 1853 में रेलवे प्रणाली शुरू होने के बाद से वर्ष 2019-2020 में पहली बार रेलवे ने यह उपलब्धि हासिल की है.
Best ever safety performance by Indian Railways during the past one year
Zero passenger fatalities due to Railway accident since April 2019.https://t.co/4wI1B7Tn2h pic.twitter.com/aLyUFQ8n7g
— Ministry of Railways (@RailMinIndia) June 8, 2020
रेल मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि पिछले 15 महीनों में एक भी यात्री की मृत्यु न होना सभी मामलों में सुरक्षा प्रदर्शन में सुधार लाने की दिशा में भारतीय रेल द्वारा निरंतर किए गए प्रयासों का परिणाम है. सुरक्षा हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है, इसलिए सुरक्षा की स्थिति में सुधार लाने के लिए किए गए उपायों में मानव युक्त रेलवे क्रॉसिंग को हटाया जाना, रोड ओवर ब्रिज (आरओबी)/ रोड अंडर ब्रिज(आरयूबी) का निर्माण,पुलों का जीर्णोद्धार, सबसे अधिक पटरियों का नवीकरण, वर्ष के दौरान सेल से अधिकतम रेलों की आपूर्ति, पटरियों काप्रभावी रखरखाव, सुरक्षा पहलुओं की कड़ी निगरानी, रेलवे कर्मचारियों का बेहतर प्रशिक्षण, सिग्नल प्रणाली में सुधार, सुरक्षा कार्यों के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग, परम्परागत आईसीएफ कोचों से आधुनिक और सुरक्षित एलएचबी कोचों में रुपांतरण आदि शामिल हैं.
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1. वर्ष 2018-19 में 631 मानवयुक्त रेलवे क्रॉसिंग को समाप्त करने की तुलना में 2019-20 में रिकॉर्ड संख्या में 1274 मानवयुक्त रेलवे क्रॉसिंग(पिछले वर्ष से दोगुना) को समाप्त किया गया है. पहली बार इतनी अधिक संख्या में रेलवे क्रॉसिंग्स को खत्म किया गया है.
2. रेलवे नेटवर्क पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए 2019-20 में कुल 1309 आरओबी / आरयूबी का निर्माण किया गया.
3. 2019-20 के दौरान 1367 पुलों (पिछले वर्ष से 37 प्रतिशतअधिक) का जीर्णोद्धार किया गया, पिछले साल 1013 पुलों का जीर्णोद्धार किया गया था.
4. 2019-20 में अधिकतम 5,181 ट्रैक किमी (टीकेएम) रेलों का नवीकरण (पिछले वर्ष से20 प्रतिशत अधिक)किया गया, जबकि 2018-19 में 4,265 टीकेएम रेलों का नवीकरण किया गया था.
5. वर्ष के दौरान सेल की ओर से रेलों की (13.8 लाख टन) की अधिकतम आपूर्ति हुई. 6.4 लाख टन लंबी रेलों की आपूर्ति के साथ, फील्ड वेल्डिंग की गुंजाइश काफी कम हो गई है, जिससे परिसंपत्ति की विश्वसनीयता बेहतर हुई है.
6. 2019-20 में 285 लेवल क्रॉसिंग (एलसी) को सिग्नलों के द्वारा इंटरलॉक किया गया है, इसके साथ ही संचयी इंटरलॉक्ड एलसी की संख्या 11,639 हो गई है.
7. 2019-20 के दौरान 84 स्टेशनों की सुरक्षा में सुधार करने के लिए उनमें यांत्रिक सिग्नलिंग के स्थान पर इलेक्ट्रिकल / इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलिंग की गई.
8. उपरोक्त सभी उपाय वर्ष 2017-18 में शुरू किए गए राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष (आरआरएसके) के रूप में व्यवस्था में इनपुट किए जाने के कारण संभव हो सके हैं, अगले पांच वर्षों में खर्च की जाने वाली 1 लाख करोड़ रुपये की राशि के साथ जिसका वार्षिक परिव्यय 20,000 करोड़ रुपये था. इस कोष की वजह से तत्काल आवश्यकता वाले अत्यंत महत्वपूर्ण सुरक्षा कार्यों को करना संभव हो सका और जिसके परिणाम स्पष्ट हैं.
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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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