पाकिस्तानी आतंकियों की घुसपैठ को नाकाम करेगी भारत की ‘तीसरी आंख’, सीमा पर तैनात होंगे 5500 ड्रोन

डीजी बीएसएफ ने बताया, हम ड्रोन विरोधी मोर्चे पर काफी कुछ कर रहे हैं. हमने सीमाओं पर प्रणालियां तैनात की हैं जो बहुत प्रभावी और उपयोगी रही हैं. पाकिस्तान की ओर से आने वाले ड्रोन का पता लगाने के लिए नयी तकनीक का भी परीक्षण कर रहे हैं और कुछ राज्य पुलिस के साथ मिलकर हमने अतिरिक्त तैनाती भी की है.
हाल के दिनों में भारतीय सीमा पर पाकिस्तानी ड्रोन की हलचल बढ़ गयी है. जिसे रोकने के लिए और उसपर कड़ी निगरानी रखने के लिए भारतीय सेना ने कमर कस ली है. भारतीय सीमा पर आतंकवादी घटनाओं और दुश्मन के ड्रोन पर नजर रखने के लिए 5500 ड्रोन तैनात किये जा रहे हैं. जिसके बारे में DG, BSF पंकज कुमार सिंह ने जानकारी दी.
30 करोड़ रुपये खर्च कर भारतीय सीमा पर तैनात होंगे 5500 ड्रोन
डीजी बीएसएफ ने बताया, हम ड्रोन विरोधी मोर्चे पर काफी कुछ कर रहे हैं. हमने सीमाओं पर प्रणालियां तैनात की हैं जो बहुत प्रभावी और उपयोगी रही हैं. पाकिस्तान की ओर से आने वाले ड्रोन का पता लगाने के लिए नयी तकनीक का भी परीक्षण कर रहे हैं और कुछ राज्य पुलिस के साथ मिलकर हमने अतिरिक्त तैनाती भी की है. डीजी बीएसएफ ने बताया, हम इस साल लगभग 5,500 अतिरिक्त कैमरे लगाएंगे. हमें इसके लिए लगभग 30 करोड़ रुपये मिले हैं और हम किसी भी तरह की घुसपैठ या किसी भी तरह के अन्य नापाक मंसूबों की दिन-रात निगरानी करने के लिए बड़े पैमाने पर ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं.
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पंजाब में भारत-पाकिस्तान सीमा पर दो पाकिस्तानी ड्रोन मार गिराए गए
पंजाब में भारत-पाकिस्तान सीमा पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) द्वारा दो पाकिस्तानी ड्रोन को मार गिराया गया और अमृतसर व तरनतारन जिलों में सीमा पार से मादक पदार्थों की तस्करी की कोशिशों को नाकाम कर दिया गया. दो ‘हेक्साकॉप्टर’ ड्रोन के जरिये करीब 10 किलोग्राम हेरोइन की तस्करी की जा रही थी जिसे बीएसएफ कर्मियों ने बरामद कर लिया. एक अधिकारी ने बताया कि सोमवार देर रात 10 बजकर 57 मिनट पर वडई चीमा सीमा चौकी पर एक और ड्रोन दिखा. बीएसएफ कर्मियों ने उस मानरहित यान पर गोलियां चलाईं, जिसके बाद वह पाकिस्तान की सीमा में लौट गया. इससे पहले बीएसएफ ने पिछले शुक्रवार भी अमृतसर में अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट एक पाकिस्तानी ड्रोन को मार गिराया था.
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By अरबिंद कुमार मिश्रा
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झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.
करियर का सफरनामा
अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग
खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:
34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.
पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.
पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.
शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)
UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.
बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.
एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.
लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.
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