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G-7 Countries: वन अर्थ, वन हेल्थ मंत्र की पूरी दुनिया ने की सराहना, जानिए भारत-चीन जैसे देश क्यों नहीं हैं G-7 का हिस्सा, किसने भारत को शामिल करने का दिया था प्रस्ताव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने G-7 (Group of Seven) देशों के शिखर सम्मेलन के संपर्क (आउटरीच) सत्र को संबोधित किया. पीएम मोदी ने एक धरती, एक स्वास्थ्य (One World, One Health) का मंत्र दिया. उनके स्पीच की पूरी दुनिया ने सराहना की. जर्मन की चांसलर मार्केल ने अपने भाषण में इसका उल्लेख भी किया. लेकिन एक सवाल जो अक्सर सबके जेहन में उठता है कि भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश जी-7 का सदस्य क्यों नहीं है.

By Prabhat khabar Digital
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PM Narendra Modi to Addresses G7 Summit, One World, One Health, Know What is G-7: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने G-7 (Group of Seven) देशों के शिखर सम्मेलन के संपर्क (आउटरीच) सत्र को संबोधित किया. पीएम मोदी ने एक धरती, एक स्वास्थ्य (One World, One Health) का मंत्र दिया. उनके स्पीच की पूरी दुनिया ने सराहना की. जर्मन की चांसलर मार्केल ने अपने भाषण में इसका उल्लेख भी किया. लेकिन एक सवाल जो अक्सर सबके जेहन में उठता है कि भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश जी-7 का सदस्य क्यों नहीं है. क्यों दुनिया के सात देश ही इसके मेंबर हैं.

विकसित देशों का समूह है जी-7: सबसे पहले यह जान लें कि ग्रुप 7 सात विकसित देशों का एक समूह है, जिसमें अमेरिका (America), ब्रिटेन(Britain), फ्रांस(France), कनाडा(Canada), जापान(Japan), इटली(Italy) और जर्मनी (Germany) शामिल हैं. हालांकि, शुरुआत में रूस भी इस संगठन का हिस्सा था. लेकिन बाद में उसे हटा दिया गया. वहीं, कनाडा शुरू में जी-7 का हिस्सा नहीं था, लेकिन बाद में उसे शामिल किया गया.

दुनिया के अग्रणी देश में जी-7 के सदस्यः गौरतलब है कि जी-7 में शामिल देश दुनिया के सबसे धनवान और विकसित देश हैं. जहां प्रति व्यक्ति आय बहुत ज्यादा है. बता दें, जी-7 में शामिल देश दुनिया में सबसे बड़े निर्यातक हैं. सबसे ज्यादा सोनै का भंडार इन्ही देशों के पास है. प्रति व्यक्ति आय सबसे ज्यादा है. 2018 के आंकड़ो की माने तो दुनिया के 58 फीसदी पैसा इन्हीं देशों के पास था.

जी-7 समूह के क्या है कामः सात विकसित देशों ने समूह बनाकर जी-7 बनाया. अब सवाल है कि विश्व स्तर पर इस समूह का क्या काम है. दरअसल, इस समूह का मुख्य काम- दुनिया में कानून व्यवस्था बनाए रखना, वैश्विक चुनौतियों को मिलकर खत्म करना, पर्यावरण बचाव संबंधी अभियान, गरीब देशों की आर्थिक उन्नति के लिए काम करना, मानवाधिकारों की रक्षा ये सब इस संस्था के काम हैं. फिलहाल कोरोना को लेकर यह समूह काम कर रहा है.

भारत-चीन जैसे देश क्यों नहीं है हिस्साः अब सवाल है कि भारत-चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश जी-7 का हिस्सा क्यों नहीं है, तो बता दें, अत्यधिक आबादी होने के कारण चीन में प्रति-व्यक्ति आय बहुत कम है. इसलिए उसे इस ग्रुप में शामिल नहीं किया गया है. वहीं, भारत को भी इसलिए ही इस समूह में हिस्सेदारी नहीं मिली है क्योंकि उसकी भी प्रति व्यक्ति आय काफी कम है.

पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने की थी भारत के लिए सिफारिशः वहीं, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान भारत को जी-7 में शामिल करने का प्रस्ताव दिया था. उन्होंने कहा था कि भारत जैसी बड़ी आर्थिक ताकत को इसका हिस्सा होना चाहिए. वहीं, भारत ने भी इस ग्रुप में शामिल होना चाहता है, ताकी ताकि, देशी उद्योगों को यूरोपीय बाजार में रियायत मिले.

Posted by; Pritish Sahay

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