FSSAI का एक्शन : '100% शुद्ध' दावे वाले डाबर के शहद और घी की बिक्री पर रोक
FSSAI ने डाबर पर रोक लगाई
देश की प्रमुख एफएमसीजी कंपनी डाबर के शहद, घी, तेल समेत कई उत्पाद खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI की जांच के दायरे में आ गए हैं. ऑनलाइन बिक्री के दौरान उत्पादों के लेबल पर किए गए दावों को लेकर FSSAI ने आपत्ति जताई है.
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने डाबर इंडिया को '100% शुद्ध' या '100%' जैसे दावे वाले कुछ खाद्य उत्पाद बेचने से रोक दिया है. FSSAI का कहना है कि ऐसे दावों की पूरी तरह पुष्टि नहीं की जा सकती और इससे ग्राहक गुमराह हो सकते हैं.
FSSAI ने सोमवार (3 अगस्त) को कहा कि उसने डाबर इंडिया के खिलाफ आदेश जारी किया है. यह कार्रवाई शहद, एप्पल साइडर विनेगर, वर्जिन नारियल तेल, तिल का तेल, गाय का घी, नारियल पानी और नारियल दूध जैसे उत्पादों पर '100%' या '100% शुद्ध' जैसे भ्रामक दावे करने के कारण की गई है.
FSSAI के अनुसार, डाबर की वेबसाइट पर कई उत्पादों के साथ '100% Natural', '100% Pure', '100% Purity Guaranteed', '100% Organic' और '100% Tender Coconut Water' जैसे दावे किए गए थे. नियामक का कहना है कि ऐसे दावों की पूरी तरह पुष्टि करना संभव नहीं है. इससे ग्राहकों के गुमराह होने की आशंका रहती है.
FSSAI का कहना है कि इस तरह के दावे फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (एडवरटाइजिंग एंड क्लेम्स) रेगुलेशंस, 2018 का उल्लंघन करते हैं. नियामक के मुताबिक, कंपनियां ऐसे दावे नहीं कर सकतीं जो ग्राहकों को गुमराह करें या जिनकी पूरी तरह पुष्टि न की जा सके.
FSSAI ने क्या कहा आपत्ति को लेकर
FSSAI ने कहा कि डाबर के हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर और डाबर ऑर्गेनिक हनी पर वैध FSSAI ऑर्गेनिक मंजूरी के बिना 'जैविक भारत' लोगो का इस्तेमाल किया जा रहा था. इसके अलावा, डाबर के Homemade Coconut Milk पर किए गए '100% शुद्धता' के दावे पर भी नियामक ने आपत्ति जताई है. FSSAI के मुताबिक, 2018 के विज्ञापन और दावों से जुड़े नियमों के तहत इस तरह का दावा मिश्रित खाद्य पदार्थों (Compound Foods) के लिए मान्य नहीं है. नियामक का कहना है कि ऐसे उत्पादों को लेकर '100% शुद्ध' जैसे दावे नहीं किए जा सकते.
डाबर को नोटिस पहले किया गया था जारी
FSSAI ने कहा कि उसने इससे पहले भी डाबर को नोटिस जारी कर ऐसे भ्रामक '100%' दावों को बंद करने का निर्देश दिया था. लेकिन नियामक के अनुसार, कंपनी की ओर से इस मामले में कोई संतोषजनक सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया. इसके बाद FSSAI ने डाबर के खिलाफ कार्रवाई की.
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By अमिताभ कुमार
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अमिताभ 1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है.
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