Digital Arrest Scam: 400 से अधिक खातों में करोड़ों का ट्रांजेक्शन ड्राइवर-कर्मचारियों के नाम पर कंपनियां

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डिजिटल ठगी की सांकेतिक इमेज (PC : AI)

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 2.60 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का भंडाफोड़ किया है. इस ठगी के पैसों को 400 से अधिक खातों में बांटा गया था, और हैरान करने वाली बात यह है कि ठगी के नेटवर्क में ड्राइवर और कर्मचारियों के नाम पर बनी कंपनियां शामिल थीं.

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Digital Arrest Scam : गोवा की एक महिला से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 2.60 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का खुलासा किया है. ED के मुताबिक, ठगी की रकम सिर्फ कुछ बैंक खातों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे कई स्तरों पर अलग-अलग खातों और कंपनियों के जरिए घुमाया गया.

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न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार यह मामला मई-जून 2025 का है. साइबर अपराधियों ने महिला को यह विश्वास दिलाया था कि वह एक जांच के घेरे में है. उसे वीडियो कॉल के जरिए लगातार निगरानी में रखा गया और 'सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट' बताकर अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया.

400 से ज्यादा खातों में पहुंची रकम

ED की जांच में सामने आया कि महिला से मिली रकम कुछ ही घंटों में पहले निष्क्रिय और नए खोले गए बैंक खातों में पहुंचाई गई. इसके बाद रकम को 400 से ज्यादा लाभार्थी खातों में ट्रांसफर, नकद निकासी, सेल्फ चेक और पेमेंट गेटवे के जरिए बांटा गया.

जांच एजेंसी के मुताबिक, इसके बाद पैसों का नेटवर्क कमोडिटी, ट्रेडिंग, ट्रैवल और विदेशी मुद्रा से जुड़ी कंपनियों तक पहुंचा. इन कंपनियों ने मिलकर 27,850 करोड़ रुपये से ज्यादा के बैंकिंग लेनदेन किए थे.

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ड्राइवर और कर्मचारियों के नाम पर थीं कंपनियां

ED ने बताया कि जिन कंपनियों के जरिए ठगी की रकम को आगे बढ़ाया गया, उनमें कुछ के डायरेक्टर ऐसे लोग थे जिनकी आर्थिक स्थिति बेहद सामान्य थी. इनमें कर्मचारी, ड्राइवर और एक कमरे के किराए के मकानों में रहने वाले लोग शामिल थे.

जांच के अनुसार, रिकॉर्ड में इन लोगों को कंपनियों का डायरेक्टर दिखाया गया था, जबकि कंपनियों के बैंक खातों और कामकाज का नियंत्रण दूसरे लोगों के हाथ में था.

20 राज्यों में 163 FIR और 330 शिकायतें

ED के अनुसार, जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों के खिलाफ 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 330 पीड़ितों की शिकायतें और 163 FIR दर्ज हैं. इन मामलों में कुल 417.49 करोड़ रुपये के नुकसान की जानकारी सामने आई है.

एजेंसी ने यह भी बताया कि 101 मामलों में एक ही पीड़ित की रकम एक ही धोखाधड़ी के दौरान नेटवर्क से जुड़ी दो या उससे अधिक कंपनियों में पहुंची. इससे जांच एजेंसी को इन खातों के एक साझा नेटवर्क की तरह इस्तेमाल होने का पता चला.

3.25 करोड़ रुपये नकद जब्त

ED ने 17 जुलाई को मुंबई और गोवा में 20 ठिकानों पर PMLA के तहत तलाशी ली थी. इसके बाद 21 अगस्त को भी कुछ और ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया. एजेंसी के मुताबिक, इस दौरान 3.25 करोड़ रुपये नकद जब्त किए गए.

इसके अलावा 30 करोड़ रुपये से अधिक बैलेंस वाले सिंडिकेट के खातों को फ्रीज किया गया है. जांच एजेंसी ने डिजिटल डिवाइस, अकाउंट बुक, रिकॉर्ड और वैधानिक रजिस्टर भी अपने कब्जे में लिए हैं.

दो आरोपी गिरफ्तार

ED के पणजी जोनल ऑफिस ने 23 अगस्त को फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुईन सैयद को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया. दोनों को 24 अगस्त को गोवा की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 29 अगस्त तक पांच दिन की ED हिरासत में भेज दिया गया.

ED ने लोगों को किया अलर्ट

ED ने लोगों को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी को लेकर सावधान किया है. एजेंसी ने स्पष्ट किया कि भारत में कोई भी जांच या कानून प्रवर्तन एजेंसी किसी व्यक्ति को 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती और न ही वीडियो कॉल के जरिए जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने को कहती है.

अगर किसी व्यक्ति को ऐसी कॉल आती है, तो उसे तुरंत कॉल काटकर साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करनी चाहिए या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करनी चाहिए.

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