Viral Video : 3400 kiss मार्क्स वाली कार पर ₹5500 चालान, क्या भारत में गैरकानूनी है कार सजाना?

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ग्वालियर में 3400 से ज्यादा किस मार्क्स वाली स्विफ्ट कार पर ₹5500 का चालान चर्चा में है. लेकिन क्या कार पर किस मार्क्स बनाना सच में गैरकानूनी है?

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मध्य प्रदेश के ग्वालियर में इन दिनों एक सफेद स्विफ्ट कार खूब चर्चा में है. वजह है कार पर बने करीब 3,400 से ज्यादा लिपस्टिक के किस मार्क्स. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कार मालिक आदित्य सिकरवार की गर्लफ्रेंड ने ये किस मार्क्स बनाए थे. मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और फिर पुलिस ने कार मालिक का ₹5,500 का चालान कर दिया.

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जब मैंने अपने एक ऑफिस कलिग को ये बात बताई तो उसका रिएक्शन था कि चालान क्यों काटा गया? ये कोई अपराध है क्या? अब सवाल उठता है कि क्या कार को इस तरह सजाना सच में गैरकानूनी है? इस लेख में हम आपको आसान भाषा में बताएंगे कि पुलिस ने ऐसा क्यों किया. लेकिन उससे पहले देखिए यह वीडियो...

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मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 52 में क्या है

  • दरअसल चालान क्यों किया गया, इसका जवाब इसी में छिपा है. मोटर व्हीकल्स एक्ट 1988 की धारा 52 गाड़ियों में किए जाने वाले बदलाव यानी Alteration(संशोधन) से जुड़ी है.
  • सीधी भाषा में कहें तो गाड़ी खरीदने के बाद उसमें ऐसा बदलाव नहीं किया जा सकता, जिससे उसकी मूल बनावट, जरूरी फीचर्स या कंपनी द्वारा पहले से तय स्पेसिफिकेशन बदल जाए.
  • कानून में भी Alteration(संशोधन) का मतलब गाड़ी की स्ट्रक्चर में ऐसा बदलाव बताया गया है, जिससे उसकी बेसिक फीचर बदल जाए.

तो क्या किस मार्क्स बनाना भी ऑल्टरेशन है?

  • ऐसा कहना सही नहीं होगा कि कार पर कुछ बना दिया या उसे ऑल्टरेशन कह देंगे और वह अपने-आप धारा 52 का उल्लंघन हो गया.
  • धारा 52 के उल्लंघन का मतलब गाड़ी की स्ट्रक्चर और बेसिक फीचर्स में बदलाव से है. यानी हर छोटा-मोटा कॉस्मेटिक या अस्थायी बदलाव अपने-आप इस धारा के तहत नहीं आ जाता.
  • उदाहरण के लिए, अगर कार पर ऐसा डिजाइन या डेकोरेशन किया गया है जिसे आसानी से हटाया जा सकता है और उससे गाड़ी की स्ट्रक्चर या बेसिक फीचर में कोई बदलाव नहीं हुआ, तो उसे सीधे तौर पर धारा 52 का उल्लंघन नहीं माना जाता है.हालांकि अपवाद हो सकते हैं.

तो क्या ग्वालियर की कार पर बने किस मार्क्स सिर्फ अस्थायी डेकोरेशन थे या पुलिस ने इसे किसी दूसरे नियम के तहत अनधिकृत बदलाव माना? आगे लेख में बताएंगे, लेकिन उससे पहले ये जानते है कि गाड़ी की RC यानी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट में क्या जरूरी इंफॉर्मेशन होता है जिसे चेंज करने पर ऑल्टरेशन के तहत अपराध माना जाता है.

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RC में दर्ज जानकारी क्यों महत्वपूर्ण है?

  • हर गाड़ी की RC यानी Registration Certificate में उसकी जरूरी जानकारी दर्ज होती है. इसमें गाड़ी का रंग और दूसरी अहम डिटेल्स शामिल होती हैं.
  • मान लीजिए किसी कार की RC में रंग सफेद दर्ज है और मालिक उसकी पूरी बॉडी का रंग बदलकर लाल कर देता है. ऐसे मामले में गाड़ी की वास्तविक स्थिति और RC में दर्ज जानकारी अलग हो सकती है. तब मामला सिर्फ सजावट का नहीं रह जाता.
  • लेकिन किसी अस्थायी स्टिकर, डिजाइन या डेकोरेशन को भी उसी कैटेगरी में रख देना सही नहीं होता. यहां यह देखना जरूरी है कि उससे गाड़ी की मूल पहचान, स्ट्रक्चर या बेसिक फीचर वास्तव में बदले गए हैं या नहीं.

गाड़ियों में किस तरह के बदलाव पर लागू होते हैं नियम ?

ऐसे बदलाव जिनसे गाड़ी की मूल बनावट या काम करने के तरीके पर असर पड़ता है, उन पर मोटर व्हीकल नियम ज्यादा सख्त होता है.

  • जैसे इंजन बदलना
  • फ्यूल सिस्टम में बदलाव करना
  • चेसिस या बॉडी स्ट्रक्चर में बदलाव करना
  • पेट्रोल गाड़ी को CNG जैसे दूसरे ईंधन पर चलाने के लिए कन्वर्जन किट लगाना

ऐसे बदलाव मनमाने तरीके से नहीं किए जा सकते. इनके लिए तय नियमों और जरूरी मंजूरी का पालन करना पड़ता है.

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ऑल्टरेशन के बाद क्या करना होता है?

  • अगर गाड़ी में ऐसा ऑल्टरेशन (Alteration) किया गया है, जिसकी जानकारी कानून के तहत देना जरूरी है, तो सिर्फ बदलाव कर लेना ही काफी नहीं है. इसकी जानकारी रजिस्ट्रिंग अथॉरिटी यानी संबंधित परिवहन विभाग को भी देनी पड़ सकती है.
  • मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 52 के मुताबिक, जहां ऑल्टरेशन की रिपोर्ट करना जरूरी हो, वहां वाहन मालिक को ऑल्टरेशन किए जाने के 14 दिनों के भीतर इसकी जानकारी संबंधित रजिस्ट्रिंग अथॉरिटी को देनी होती है.
  • इसके लिए RC जमा करनी पड़ सकती है और निर्धारित फीस भी देनी होती है. इसके बाद अगर बदलाव नियमों के मुताबिक है, तो संबंधित अथॉरिटी वाहन के रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड यानी RC में जरूरी अपडेट कर सकती है.
  • सीधी भाषा में समझें तो गाड़ी में ऐसा स्थायी बदलाव किया है जो RC या वाहन की मूल जानकारी को प्रभावित करता है, तो उसे छिपाने के बजाय समय पर परिवहन विभाग को इसकी जानकारी देना जरूरी हो सकता है.

फिर ₹5,500 का चालान कैसे लगा?

अब सवाल यह है कि आखिर किस नियम या अपराध के तहत आदित्य सिकरवार की किस मार्क्स वाली कार का चालान किया गया?

  • मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, आदित्य सिकरवार की कार पर ₹5,000 + ₹500 यानी कुल ₹5,500 के जुर्माने लगाई गई है
  • मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 182A(4) के तहत अगर कोई व्यक्ति तय नियमों का पालन किए बिना गाड़ी में ऑल्टरेशन यानी बदलाव करता है, तो उस पर ₹5,000 तक का जुर्माना, 6 महीने तक की जेल, या दोनों हो सकते हैं.
  • वहीं धारा 177 उन ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन में लागू होती है, जिनके लिए कानून में अलग से कोई सजा तय नहीं है. पहली बार के उल्लंघन पर इसमें ₹500 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.

हालांकि, पुलिस ने इस मामले में चालान में कौन-कौन सी धाराएं लगाई हैं और किस नियम के तहत कितना जुर्माना लगाया है. इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं है. यानी आसान भाषा में कहें तो किस मार्क्स वाली कार पर पूरे देश में ₹5,500 का फिक्स चालान नहीं है.

क्या कार सजाना गैरकानूनी है?

यहां एक सवाल ये भी है कि क्या भारत में कार सजाना गैरकानूनी है? इसका जवाब है, नहीं. कार को सजाना गैरकानूनी नहीं है.

  • लेकिन सजावट या मॉडिफिकेशन ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे ट्रैफिक नियमों या सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हो.
  • उदाहरण के लिए, ऐसा डेकोरेशन जो नंबर प्लेट को ढक दे, ड्राइवर की विजिबिलिटी कम करे, लाइट्स को प्रभावित करे या विंडशील्ड पर ऐसा कुछ लगा दे जिससे सड़क साफ दिखाई न दे, वह परेशानी खड़ी कर सकता है.
  • इसी तरह गाड़ी में स्थायी बदलाव करने से पहले यह देखना जरूरी है कि वह RC, निर्माता की मूल स्पेसिफिकेशन और मोटर व्हीकल नियमों के मुताबिक है या नहीं. पढ़िए देश दुनिया और बिहार झारखंड की ओरिजिनल खबर


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