क्या है 'रेड लाइट ऑन गाड़ी ऑफ' अभियान? इससे जीतेंगे प्रदूषण के विरुद्ध युद्ध

Updated at : 21 Oct 2020 2:05 PM (IST)
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क्या है 'रेड लाइट ऑन गाड़ी ऑफ' अभियान? इससे जीतेंगे प्रदूषण के विरुद्ध युद्ध

मुहिम का नाम रेड लाइट ऑन गाड़ी ऑफ है. इसके मुहिम के तहत दिल्ली में सभी वाहन चालकों से अपील की जा रही है कि वे रेड लाईट में अपनी गाड़ी का इंजन बंद कर लें.

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नयी दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में प्रदूषण स्तर में कमी लाने के लिए केजरीवाल सरकार ने नई मुहिम शुरू की है. इस मुहिम का नाम रेड लाइट ऑन गाड़ी ऑफ है. इसके मुहिम के तहत दिल्ली में सभी वाहन चालकों से अपील की जा रही है कि वे रेड लाईट में अपनी गाड़ी का इंजन बंद कर लें. सरकार का मानना है कि इस छोटी से कोशिश से प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में बड़ी कामयाबी हासिल की जा सकती है.

रेड लाईट ऑन गाड़ी ऑफ कैंपेन

रेड लाईट ऑन गाड़ी ऑफ कैंपेन को सफल बनाने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के जवान, सामाजिक कार्यकर्ता, स्टूडेंट वॉलेंटियर्स और दिल्ली सरकार के कई मंत्री अलग-अलग स्थानों पर सड़कों में मौजूद हैं. ये सभी लोग वाहन चालकों से अपील कर रहे हैं कि वे रेड लाईट में रूकने पर अपनी गाड़ी का ईंजन कुछ देर के लिए बंद करें.

21 अक्टूबर से शुरू हुआ कैंपेन

इस कैंपेन की शुरुआत 21 अक्टूबर से की गई. तस्वीरों में दिखा कि वॉलेंटियर्स और कई मंत्री लोगों को गुलाब का फूल देकर इस कैंपेन का हिस्सा बनने की अपील करते नजर आये. वॉलेंटियर्स के हाथों में तख्तियां थीं जिसमें लिखा था, प्रदूषण के विरुद्ध एक युद्ध. कई लोग रेड लाईट ऑन गाड़ी ऑफ लिखी तख्तियां लिए भी नजर आये. जानकारी के मुताबिक लोगों ने इस अपील को स्वीकार किया और पहले दिन सरकार का बखूबी साथ दिया.

श्रम मंत्री गोपाल राय भी आए नजर

कैंपेन के बारे में मीडिया से बात करते हुए दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने बताया कि राजधानी में 1 करोड़ गाड़ियां पंजीकृत हैं. यदि 10 फीसदी वाहन भी रेड लाईट ऑन होने पर अपनी गाड़ी बंद कर लेंगे तो पूरे साल पीएम 10 के बराबर कार्बन उत्सर्जन को रोका जा सकता है. श्रम मंत्री गोपाल राय खुद कैंपेन के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए सड़क पर नजर आए. कई अन्य मंत्री अधिकारी भी इस दौरान सड़कों पर नजर आये.

सर्दियों में वायु प्रदूषण का बढ़ा कहर

बता दें कि भारत में सर्दियों ने दस्तक दी है. लॉकडाउन खुलने के बाद सड़कों में बड़ी संख्या में गाड़ियां दिखने लगी हैं. फैक्ट्रियां खुल गई हैं. निर्माण कार्य शुरू कर दिए गए हैं. पंजाब और हरियाणा में किसान खेतों में पराली जला रहे हैं. इन सब कारकों की वजह से दिल्ली में प्रत्येक साल की तरह इस साल भी प्रदूषण स्तर में इजाफा होने लगा है. दिल्ली सरकार और निगम अपने-अपने स्तर से प्रदूषण स्तर को कम करने का प्रयास कर रही है.

एचसीएनजी से चलेंगी 50 नई बसें

इस दिशा में एक और प्रयास 20 अक्टूबर से भी शुरू किया गया है. दिल्ली में सीएनजी से चलने वाली 50 नई बसें चलाई जा रही हैं. ये बसें एचसीएनजी यानी हाइड्रोजन युक्त सीएनजी बसें चलाई जाएंगी. कहा जा रहा है कि ये ईंधन सीएनजी से भी बेहतर हैं. इन बसों के चलने से दिल्ली में प्रदूषण का स्तर काफी कम हो जाएगा.

Posted By-Suraj Thakur

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