Coronavirus: WHO ने अब युवाओं से बुजुर्गों में संक्रमण फैलने की दी चेतावनी, जानें क्या कहा

जिनेवा : यूरोप के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख ने चेतावनी दी है कि युवाओं में कोविड-19 (Covid 19) के बढ़ते मामले का परिणाम अंतत: यह हो सकता है कि इससे वृद्धों में संक्रमण फैल सकता है जिससे इसकी चपेट में आने का खतरा अधिक होता है. यूरोप के लिए डब्ल्यूएचओ के प्रमुख डॉ हांस क्लूज के अनुसार इससे मृत्यु के मामले बढ़ सकते हैं.
जिनेवा : यूरोप के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख ने चेतावनी दी है कि युवाओं में कोविड-19 (Covid 19) के बढ़ते मामले का परिणाम अंतत: यह हो सकता है कि इससे वृद्धों में संक्रमण फैल सकता है जिससे इसकी चपेट में आने का खतरा अधिक होता है. यूरोप के लिए डब्ल्यूएचओ के प्रमुख डॉ हांस क्लूज के अनुसार इससे मृत्यु के मामले बढ़ सकते हैं.
डॉ क्लूज ने कहा कि यूरोप में ठंड बढ़ने के साथ ही युवाओं के वृद्ध लोगों के संपर्क में आने की संभावना है. उन्होंने डब्ल्यूएचओ यूरोप मुख्यालय कोपेनहेगेन से संवाददाताओं से कहा, ‘हम अनावश्यक पूर्वानुमान नहीं जताना चाहते लेकिन यह निश्चित तौर पर आशंकाओं में से एक है कि एक समय अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या और साथ ही मृत्यु दर में भी वृद्धि हो सकती है.’
क्लूज ने कहा कि डब्ल्यूएचओ के यूरोपीय क्षेत्र में 55 में से 32 परिक्षेत्रों में मामलों में वृद्धि देखी गयी है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य प्राधिकारी और अन्य अधिकारी फरवरी की तुलना में बेहतर तरीके से तैनात हैं और तैयार हैं, जब महाद्वीप में मामलों और मौतों की संख्या में भारी वृद्धि देखी गयी थी.
कोरोनावायरस से पीड़ित रह चुके व्यक्ति को दोबारा यह संक्रमण होने का पहला मामला इस हफ्ते हांगकांग से आया जिसके बाद बेल्जियम तथा नीदरलैंड से भी एक-एक इस तरह के मामले सामने आये. हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है घबराने की जरूरत नहीं है. कोविड-19 महामारी की रोकथाम के लिए सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता पर्याप्त नहीं होने संबंधी चिंताओं के बीच भारत और अन्य देशों के वैज्ञानिकों का कहना है कि और अधिक अध्ययनों की जरूरत है.
बेल्जियम के विषाणु विज्ञानी मार्क वान रांस्ट ने इस सप्ताह सामने आये ऐसे तीन मामलों के संबंध में पीटीआई से कहा कि कुछ मामलों से पुन: संक्रमण के व्यापक निष्कर्ष नहीं निकाले जा सकते. हांगकांग में वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन में कहा कि महामारी को सामूहिक प्रतिरोधक क्षमता से रोक पाना संभव नहीं होगा. सामूहिक प्रतिरक्षा क्षमता तब मानी जाती है जब किसी आबादी के एक बड़े हिस्से में बीमारी से उबरकर उसके खिलाफ रोग प्रतिरोधक शक्ति विकसित हो जाती है.
प्रतिरक्षा विज्ञानी सत्यजीत रथ ने कहा कि रोगी विशेष के मामले का अध्ययन करके वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रणाली पर निष्कर्ष नहीं निकाले जा सकते. नयी दिल्ली स्थित राष्ट्रीय प्रतिरक्षा विज्ञान संस्थान में कार्यरत रथ ने कहा, ‘हमें ऐसे रोगियों में प्रतिरक्षा प्रणाली और पुन: संक्रमण के बारे में कुछ नहीं पता. खासतौर पर उस समय जब कि केवल तीन ऐसे पुष्ट मामले अब तक सामने आये हैं.’ जम्मू के भारतीय समेकित चिकित्सा संस्थान (आईआईआईएम) के पूर्व निदेशक राम विश्वकर्मा ने बताया कि किसी रोगी विशेष के अध्ययन से पुन: संक्रमण पर व्याख्या के लिहाज से मानव की प्रतिरक्षा क्षमता एक जटिल विषय है.
Posted By: Amlesh Nandan Sinha.
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