पूर्व पीएम राजीव गांधी की हत्या के मामले में रिहा किए गए दोषी संथन की मौत

Edited by Amitabh Kumar
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राजीव गांधी की हत्या के मामले में रिहा किए गए दोषी संथन का निधन हो गया है.जानें क्या जानकारी आई सामने

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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में रिहा किए गए दोषी संथन का निधन हो गया है. अस्पताल के अधिकारी ने बताया कि चेन्नई के राजीव गांधी सरकारी जनरल अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली. आपको बता दें कि राजीव गांधी हत्या मामले में दोषी ठहराए गए संथन को साल 2022 में बरी करने का काम किया गया था. संथन की बात करें तो वो एक श्रीलंकाई नागिरक था.

आज सुबह हुई मौत

अस्पताल के एक अधिकारी ने संथन की मौत को लेकर जो जानकारी दी है उसके अनुसार, संथन को लीवर से संबंधित बीमारियों की वजह से अस्पताल में भर्ती कराया गया था. बुधवार सुबह संथन ने राजीव गांधी सरकारी जनरल अस्पताल में अंतिम सांस ली.

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फांसी की सजा दी गई थी संथन को

संथन को राजीव गांधी की हत्या के मामले में फांसी का सजा दी गई थी, हालांकि इसे बाद में उम्रकैद में तब्दील करने का काम किया गया था. नवंबर 2022 में ही संथान सहित अन्य 5 हत्यारों को भी रिहा कर दिया गया था. इन्होंने करीब 32 साल की जेल की सजा काट ली थी. रिहाई के बाद भी इन्हें त्रिची सेंट्रल जेल के स्पेशल कैंपस में रखा गया था. इसके पीछे का कारण यह था कि ये मूल रूप से श्रीलंका के रहने वाले थे. दोषियों के पास ना तो पासपोर्ट था और ना ही ट्रैवल डॉक्युमेंट्स मौजूद था.

संथन ने कोर्ट में दाखिल की थी अर्जी

गौर हो कि संथन ने मद्रास हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी और अपनी मांग रखते हुए आग्रह किया था कि उन्हें श्रीलंका भेजने की व्यवस्था की जाए. ऐसा इसलिए क्योंकि वह अपनी बुजुर्ग मां से मिलना चाहते हैं. हालांकि इस पर कोई फैसला हो पाता इससे पहले ही संथन की ही लंबी बीमारी के बाद मौत हो गई.

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लेखक के बारे में

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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