दावा और सच्चाई : कोरोना वायरस की दवा अब तक नहीं बनी वायरल हो रही तस्वीर टेस्टिंग किट की है

Published by :Pritish Sahay
Published at :27 Mar 2020 1:21 AM (IST)
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दावा और सच्चाई : कोरोना वायरस की दवा अब तक नहीं बनी वायरल हो रही तस्वीर टेस्टिंग किट की है

दुनियाभर के वैज्ञानिक कोरोना की वैक्सीन खोजने में जुटे हैं. अभी तक इसकी कोई वैक्सवीन या दवा नहीं बन सकी है, लेकिन सोशल मीडिया पर यूजर्स दावा कर रहे हैं कि इसकी वैक्सीन बन चुकी है. कोविड-19 लिखी हुई किसी वैक्सीन की तस्वीर भी शेयर की जा रही है. हमारी पड़ताल में वायरल दावा झूठा साबित हुआ है.

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दुनियाभर के वैज्ञानिक कोरोना की वैक्सीन खोजने में जुटे हैं. अभी तक इसकी कोई वैक्सवीन या दवा नहीं बन सकी है, लेकिन सोशल मीडिया पर यूजर्स दावा कर रहे हैं कि इसकी वैक्सीन बन चुकी है. कोविड-19 लिखी हुई किसी वैक्सीन की तस्वीर भी शेयर की जा रही है. हमारी पड़ताल में वायरल दावा झूठा साबित हुआ है.

दावा : एक यूजर ने एक तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है. उसमें दावा किया गया है कि कारोना वायरस वैक्सीन तैयार हो गयी है. इंजेक्शन लेने के बाद तीन घंटे के भीतर रोगी को ठीक किया जा सकता है. अमेरिकी वैज्ञानिकों को सलाम. अभी ट्रंप ने घोषणा की कि रोशे मेडिकल कंपनी अगले रविवार को वैक्सीन लॉन्च करेगी और इसकी लाखों खुराक तैयार हैं. यह पोस्ट इंस्टाग्राम, ट्विटर पर भी शेयर किया गया है.

सच्चाई : जब इस दावे की पड़ताल की गयी, तो पता चला कि कोविड-19 लिखी जिस मेडिसिन की तस्वीर वायरल हो रही है, वो वैक्सीन नहीं है, बल्कि टेस्टिंग किट है, जिसे साउथ कोरिया द्वारा विकसित किया गया है. साउथ कोरिया की फार्मा कंपनी सुगेंटेक ने पोर्टेबल डायग्नोस्टिक किट विकसित की है. इससे सिर्फ 10 मिनट में यह पता चल जाता है कि कोरोना है या नहीं. वायरल तस्वीर में कंपनी का नाम भी लिखा हुआ देखा जा सकता है.

सरकारी वेबसाइट्स की विश्वसनीयता पर उठे सवाल

भारत सहित पूरे विश्व में कोरोना को लेकर भय और संशय का माहौल है. इसे लेकर हर दिन वैश्विक, राष्ट्रीय तथा राज्य स्तर पर सूचनाएं अपडेट की जा रही हैं. केंद्र सरकार की ओर से स्पष्ट निर्देश है कि केवल वैध या सरकारी स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं को ही प्रकाशित अथवा प्रसारित किया जाये. भ्रामक खबरों को प्रसारित करने पर कार्रवाई की जा सकती है.

ऐसी स्थिति में खुद भारत सरकार की तीन वेबसाइट्स पर अलग-अलग आंकड़े दिये जा रहे हैं, जिससे लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है. 25 मार्च को डीडी न्यूज के ट्विटर अकाउंट पर सुबह 7:07 बजे भारत में कोरोना के मरीजों की संख्या 469 बतायी गयी. ठीक हुए मरीजों की संख्या 39 और मृतकों की संख्या 10 बतायी गयी. वहीं, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल एसोसिएशन की वेबसाइट पर 25 मार्च की सुबह 10 बजे कोरोना के 539 मामले बताये गये. भारतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की वेबसाइट पर शाम 5:41 बजे पर कोरोना के 605 बताये गये, जबकि ठीक हुए मरीज 25 और मृतकों की संख्या 09 बतायी गयी.

रेल कोच को आइसोलेशन वार्ड में तब्दील करने पर विचार कर रहा है रेल मंत्रालय

नयी दिल्ली (ब्यूरो). कोरोना से लड़ने के लिए सरकार हर तरह की तैयारियों में जुटी है. रेल मंत्रालय रेल कोच को आइसोलेशन वार्ड में तब्दील करने की संभावना पर विचार कर रहा है. सभी जोनल ऑफिस को रेल कोच को तैयार करने की दिशा में काम करने को कहा गया है. मरीजों को आइसोलेट करने के लिए अस्पतालों के अलावा हर विभाग भी अपने स्तर पर इसका समाधान खोजने में जुटे हैं, ताकि मरीजों की संख्या ज्यादा हुई तो बेड कम न पड़े. रेलवे की ओर से 20 हजार कोच को तैयार किया जा रहा है.

मक्खी से नहीं फैलता कोरोना : सरकार

स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बात का खंडन किया है कि मक्खियों से कोरोना वायरस फैलता है. मालूम हो कि बुधवार को अभिनेता अमिताभ बच्चन ने कहा था कि मक्खी से कोरोना वायरस फैलता है. मंत्रालय के ज्वाइंट सेक्रेटरी लव अग्रवाल ने गुरुवार को बताया कि मक्खी से घबराने की जरूरत नहीं है, कोरोना वायरस इनसे नहीं फैलता.

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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