ड्रैगन ने भारतीय सीमा पर थियानमेन चौक के नरसंहार में शामिल लेफ्टिनेंट जनरल को सौंपी कमान, जानिए कौन है वो...

Author : Rajneesh Anand Published by : Prabhat Khabar Updated At : 22 Jun 2020 3:47 PM

विज्ञापन

India china border dispute china handed over command to Lieutenant General Xu Qiling : भारत के साथ चीन ने गलवान घाटी में जिस तरह का धोखा किया, जिसकी वजह से हमारे 20 जांबाज सैनिकों को शहीद होना पड़ा उस धोखेबाजी का मुख्य साजिशकर्ता है लेफ्टिनेंट जनरल शू कीलिंग. शू कीलिंग को चीन ने उस थियेटर कमांड का जिम्‍मा सौंपा है जिस पर भारत से लगी सीमा की जिम्‍मेदारी है. इस कमांड के पास एलएसी की सुरक्षा की जिम्‍मेदारी है.

विज्ञापन

नयी दिल्ली : भारत के साथ चीन ने गलवान घाटी में जिस तरह का धोखा किया, जिसकी वजह से हमारे 20 जांबाज सैनिकों को शहीद होना पड़ा उस धोखेबाजी का मुख्य साजिशकर्ता है लेफ्टिनेंट जनरल शू कीलिंग. शू कीलिंग को चीन ने उस थियेटर कमांड का जिम्‍मा सौंपा है जिस पर भारत से लगी सीमा की जिम्‍मेदारी है. इस कमांड के पास एलएसी की सुरक्षा की जिम्‍मेदारी है.

शू कीलिंग को पीएलए में ‘राइजिंग स्टार’ के निकनेम से बुलाया जाता है. शू कीलिंग वह शख्स है जिसने थियानमेन चौक नरसंहार में भी अहम भूमिका निभाई थी. थियानमेन चौक के नरसंहार में चीन के 10 हजार लोग मारे गये थे. इस नरसंहार को अंजाम देने में अहम भूमिका निभाने वाला शख्स कैसा व्यक्ति हो सकता है, यह बात आसानी से समझी जा सकती है.

शू कीलिंग का जन्म चीन के शेडोंग प्रांत के एक किसान परिवार में हुआ था. वह मात्र 16 साल की उम्र में ट्रेनी के रूप में वायु सेना में शामिल हो गया था. अपनी क्षमता की बदौलत वह लगातार सेना में आगे बढ़ता गया और आज इस मुकाम पर पहुंचा है. 1980 के दशक में कीलिंग राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के कुलीन वर्ग में शामिल हुए. चीन के समाज सुधारक और सबसे बड़े नेता माने जाने वाले डेंग जियाओपिंग पर भी शू कीलिंग का प्रभाव था. थियानमेन चौक पर एक फाइटर जेट उड़ाकर शू कीलिंग ने डेंग को प्रभावित किया था.

41साल की उम्र में शू को मेजर जनरल बनाया गया था. बाद में वह 54वीं सेना कॉर्प के चीफ ऑफ स्टाफ बने.इस आर्मी कॉर्प ने थियानमेन चौक के विद्रोह और तिब्बत में 1959 के आंदोलन को दबाने में अहम भूमिका निभाई थी. 2015 में इस ग्रुप का विलय 83वें आर्मी कॉर्प में हो गया.2017 में शू कीलिंग सबसे उम्र के जेनरल में शामिल हुआ.चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2017 में शू कीलिंग को सेंट्रल मिलिट्री कमीशन का उपाध्यक्ष बनाया.

शू कीलिंग को शी जिनपिंग का खास बताया जाता है.शू कीलिंग ने चीनी सरकार के तानाशाही रवैये को सफल बनाने में अहम भूमिका निभायी है.ऐसी चर्चा है कि भारत-चीन सीमा पर उसे अहम जिम्मेदारी देकर शी जिनपिंग भारत के खिलाफ षडयंत्र करना चाह रहा है.यह शू कीलिंग के लिए अग्निपरीक्षा है, इसलिए वह तमाम पैंतरे अपनाने की फिराक में है.

गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से भारत-चीन सीमा पर तनाव है और दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर वार्ता भी चल रही है. इसी बीच 15 जून की रात को दोनों देशों की सेना के बीच झड़प हुई. जिसमें भारत के 20 जवान शहीद हो गये.

विज्ञापन
Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola