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भूकंप के झटकों से हिला मिजोरम का चम्फाई और गुजरात का कच्छ, देश में लगातार आ रहा भूकंप

By Prabhat khabar Digital
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आइजोल : साल 2020 आपदाओं के साल के रूप में देखा जा रहा है. कोरोनावायरस महामारी के बीच भारत में 50 से ज्यादा बार भूकंप के झटके महसूस किये गये. रविवार 5 जुलाई 2020 को पूर्वोत्तर के मिजोरम के चम्फाई में और गुजरात के कच्छ में भूकंप के झटके महसूस किये गये हैं. नैशनल सिस्मोलॉजी सेंटर ने बताया कि मिजोरम में भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.6 मापी गयी. वहीं गुजरात में 4.2 तीव्रता का भूकंप आया. भूकंप के कारण जान माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है.

15 दिनों के अंदर मिजोरम से यह सातवीं बार भूकंप आया है. नैशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र मिजोरम के चम्फाई से दक्षिम पश्चिम की ओर 25 किलोमीटर दूर था. यहां भूकंप शाम 5 बजकर 26 मिनट पर आया. गुजरात के कच्छ जिले में रविवार शाम को 4.2 तीव्रता का भूकंप आया जिसका केंद्र भचाऊ से करीब 14 किलोमीटर दूर था. एक अधिकारी ने यह जानकारी दी.

अधिकारी ने बताया कि उससे पहले दोपहर को एक बजकर 50 मिनट से लेकर चार बजकर 32 मिनट तक 1.8, 1.6, 1.7 और 2.1 तीव्रता के चार हल्के भूकंप आये थे. गांधीनगर के भारतीय भूगर्भ विज्ञान अनुसंधान केंद्र के अधिकारी ने कहा, ‘कच्छ जिले में रविवार शाम को पांच बजकर 11 मिनट पर 4.2 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया. उसका केंद्र भचाऊ के उत्तर-उत्तरपूर्व में 14 किलोमीटर की दूरी पर था.'

इसी क्षेत्र में 14 जून को 5.3 तीव्रता का भूकंप आया था जिसे पूरे सौराष्ट्र क्षेत्र में महसूस किया गया था और लोग अपने घरों से बाहर आ गये थे. मिजोरम के चम्फाई जिले में ही शुक्रवार 3 जुलाई को भी दोपहर में 4.6 तीव्रता वाला भूकंप आया था. भूकंप दोपहर करीब दो बज कर 35 मिनट पर आया था. इसका केंद्र चम्फाई के 52 किमी दक्षिण-दक्षिण पूर्व में था. इसकी गहराई 25 किमी थी.

तीन जुलाई को ही राजस्थान के अलवर जिले में भी 4.7 तीव्रता का भूकंप आया था. भूकंप के झटके दिल्ली और एनसीआर सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में महसूस किये गये. भूकंप शाम सात बजे महसूस किया गया जो राजस्थान के अलवर जिले में 35 किलोमीटर की गहराई पर केंद्रित था. रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 4.7 मापी गयी. इसमें भी जानमाल के नुकसान की तत्काल कोई खबर नहीं है. अप्रैल से लेकर अब तक दिल्ली और इसके आसपास 20 बार भूकंप आ चुका है जिनमें से दो की तीव्रता 4 से ऊपर थी.

विभिन्न भूकंप का इतिहास बताता है कि दिल्ली-एनसीआर में 1720 में दिल्ली में 6.5 तीव्रता का भूकंप आया था. मथुरा में सन 1803 में 6.8 तीव्रता, सन 1842 में मथुरा के पास 5.5 तीव्रता, बुलंदशहर के पास 1956 में 6.7 तीव्रता, फरीदाबाद में 1960 में 6 तीव्रता और मुरादाबाद के पास 1966 में 5.8 तीव्रता का भूकंप आया था. दिल्ली-एनसीआर की पहचान दूसरे सर्वाधिक भूकंपीय खतरे वाले क्षेत्र के रूप में की गयी है.

Posted By: Amlesh Nandan Sinha.

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