राजीव गांधी हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची केंद्र सरकार, पढ़ें अबतक की खास बातें

Edited by Amitabh Kumar
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केंद्र सरकार की ओर से शर्ष अदालत में कहा गया कि छह में से चार दोषी श्रीलंकाई थे. भारत के पूर्व प्रधान मंत्री की हत्या के जघन्य अपराध के लिए इन्हें आतंकवादी बताकर दोषी ठहराया गया था. यह एक अंतरराष्ट्रीय मामला था.

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सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या में दोषी ठहराए गये छह लोगों को रिहा करने का आदेश दिया था. अब केंद्र सरकार की ओर से फैसले की समीक्षा करने का अनुरोध किया गया है. आपको बता दें की राजीव गांधी की हत्या साल 1991 में की गयी थी. आइए जानते हैं अबतक मामले में क्या हुआ है.

-केंद्र सरकार ने राजीव गांधी हत्याकांड के छह दोषियों की समय-पूर्व रिहाई के आदेश पर पुनर्विचार के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया हैं. केंद्र की ओर से कहा गया है कि वह इस मामले में एक आवश्यक पक्षकार रहा है, लेकिन उसकी दलीलें सुने बिना ही पूर्व प्रधानमंत्री के हत्यारों को रिहा करने का आदेश दे दिया गया.

-केंद्र की ओर से कहा गया है कि सरकार ने कथित प्रक्रियात्मक चूक को उजागर करने का काम किया. केंद्र ने कहा कि समय से पहले रिहाई की मांग करने वाले दोषियों ने औपचारिक रूप से केंद्र को एक पक्षकार के तौर पर शामिल नहीं किया. इसके परिणामस्वरूप मामले में उसकी गैर-भागीदारी हो गयी.

-केंद्र सरकार की ओर से शर्ष अदालत में कहा गया कि छह में से चार दोषी श्रीलंकाई थे. भारत के पूर्व प्रधान मंत्री की हत्या के जघन्य अपराध के लिए इन्हें आतंकवादी बताकर दोषी ठहराया गया था. यह एक अंतरराष्ट्रीय मामला था.

-आपको बता दें कि मई 1991 में तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में कांग्रेस पार्टी की ओर से चुनाव प्रचार करने राजीव गांधी पहुंचे थे जहां उनकी हत्या कर दी गयी. एक आत्मघाती हमलावर ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को धमाके में उड़ा दिया. मामले में सात लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गयी थी.

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-छह लोगों को रिहा करते हुए अदालत ने कहा था कि कैदियों के अच्छे व्यवहार को देखते हुए यह फैसला लिया गया. दोषी ठहराए एजी पेरारीवलन का जिक्र करते हुए अदालत ने कहा था कि गिरफ्तारी के समय वह 19 साल का था और 30 साल से अधिक समय तक वह जेल में बिता चुका है. उसे 29 साल एकान्त कारावास में रखा गया.

-कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और राजीव गांधी की पत्नी, जिन्होंने चार दोषियों की मौत की सजा को कम करने को कहा था. हालांकि कोर्ट का फैसला आने के बाद कांग्रेस ने इसकी तीखी आलोचना की. कांग्रेस की ओर से कहा गया कि पूर्व पीएम राजीव गांधी के बाकी हत्यारों को रिहा करने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला पूरी तरह से अस्वीकार्य है. यह पूरी तरह से गलत है.

-कोर्ट का फैसला अपने के बाद कई लोगों ने इसका स्वागत किया. स्वागत करने वालों में डीएमके पार्टी भी शामिल थी. डीएमके ने दोषियों की सजा को अनुचित माना था और इसे साजिश का हिस्सा बताया था.

-1987 में भारतीय शांति सैनिकों को श्रीलंका भेजने के बाद राजीव गांधी की हत्या की गयी थी. हत्या को बदले की कार्रवाई के रूप में देखा जाता है.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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