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PM CARES Fund में दान करने वाले धोखेबाजों से रहें सचेत, देश में रन कर रहा है फेक यूपीआई आईडी

Updated at : 03 Apr 2020 7:14 PM (IST)
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PM CARES Fund में दान करने वाले धोखेबाजों से रहें सचेत, देश में रन कर रहा है फेक यूपीआई आईडी

देश में फैले कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ जंग में योगदान देने के लिए सरकार की ओर से पीएम केयर्स फंड यानी प्रधानमंत्री राहत कोष का गठन किया गया है, लेकिन पीएम केयर्स फंड के नाम पर फर्जीवाड़ा करने के लिए इससे मिलता-जुलता फेक यूपीआई आईडी भी देश में रन कर रहा है.

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नयी दिल्ली : देश में फैले कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ जंग में योगदान देने के लिए सरकार की ओर से पीएम केयर्स फंड यानी प्रधानमंत्री राहत कोष का गठन किया गया है, लेकिन पीएम केयर्स फंड के नाम पर फर्जीवाड़ा करने के लिए इससे मिलता-जुलता फेक यूपीआई आईडी भी देश में रन कर रहा है. गफलत में आप कभी भी धोखेबाजों के शिकार हो सकते हैं. साइबर सुरक्षा से संबंधित निगरानी संस्था सीईआरटी-इन ने लोगों को पीएम-केयर्स फंड से मिलते-जुलते फर्जी यूपीआई आईडी से आगाह किया है और अपील की है कि दान करने से पहले वे आईडी की सत्यता जांच लें.

सरकार ने कोरोना वायरस महामारी का मुकाबला करने के लिए पीएम-केयर्स कोष बनाया है, जिसमें आम आदमी से लेकर बड़े कॉरपोरेट घराने तक सभी योगदान कर सकते हैं, लेकिन सरकार को जानकारी मिली है कि धोखेबाजों ने लोगों को धोखा देने के लिए पीएनबी, एचडीएफसी बैंक, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक और यस बैंक सहित कई भारतीय बैंकों के यूपीआई हैंडल पर आईडी बनाये हैं.

निगरानी संस्था ने कहा है कि सीईआरटी-इन को फर्जी यूपीआई आईडी के बारे में कई खबरें मिली हैं, जो ‘आपातकालीन दशाओं में प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और राहत कोष’ (पीएम-केयर्स) की यूपीआई आईडी से मिलती हैं.

सीईआरटी-इन ने कहा कि पीएम-केयर्स फंड में योगदान के लिए असली यूपीआई आईडी pmcares@sbi है और पंजीकृत खाते का नाम PM CARES है. इसके अलावा, कोई भी आईडी फर्जी है. सीईआरटी-इन ने कहा कि पीएम-केयर्स में कोई भी योगदान करने से पहले यूपीआई आईडी और पंजीकृत नाम की पुष्टि कर लें.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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