अटल टनल से बढ़ेगी देश की सुरक्षा और समृद्धि : नरेंद्र मोदी, कहा- आत्मनिर्भर भारत के आत्मविश्वास का बनेगा प्रतीक

Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 03 Oct 2020 4:07 PM

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सोलंग : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मनाली को लाहौल-स्पीति घाटी से जोड़नेवाली 9.02 किलोमीटर लंबी अटल सुरंग का शनिवार को उद्घाटन करने के बाद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आज सिर्फ अटल जी का ही सपना नहीं पूरा हुआ है, आज हिमाचल प्रदेश के करोड़ों लोगों का भी दशकों पुराना इंतजार खत्म हुआ है. इस टनल से मनाली और केलॉन्ग के बीच की दूरी 3-4 घंटे कम हो ही जायेगी. उन्होंने कहा कि अटल टनल से देश की सुरक्षा और समृद्धि बढ़ेगी. साथ ही यह अटल टनल आत्मनिर्भर भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक भी बनेगा.

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सोलंग : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मनाली को लाहौल-स्पीति घाटी से जोड़नेवाली 9.02 किलोमीटर लंबी अटल सुरंग का शनिवार को उद्घाटन करने के बाद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आज सिर्फ अटल जी का ही सपना नहीं पूरा हुआ है, आज हिमाचल प्रदेश के करोड़ों लोगों का भी दशकों पुराना इंतजार खत्म हुआ है. इस टनल से मनाली और केलॉन्ग के बीच की दूरी 3-4 घंटे कम हो ही जायेगी. उन्होंने कहा कि अटल टनल से देश की सुरक्षा और समृद्धि बढ़ेगी. साथ ही यह अटल टनल आत्मनिर्भर भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक भी बनेगा.

उन्होंने कहा कि अटल टनल भारत के बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को नयी ताकत देनेवाली है. यह विश्वस्तरीय बॉर्डर कनेक्टिविटी का जीता-जागता प्रमाण है. यह देश की सुरक्षा और समृद्धि, दोनों के लिए बहुत बड़ा संसाधन है. कनेक्टिविटी का देश के विकास से सीधा संबंध होता है. ज्यादा से ज्यादा कनेक्टिविटी यानी उतना ही तेज विकास. बॉर्डर एरिया में तो कनेक्टिविटी सीधे-सीधे देश की रक्षा जरूरतों से जुड़ी होती है. लेकिन, इसे लेकर जैसी गंभीरता और राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत थी, वैसी दिखाई नहीं गयी थी. जैसे-जैसे भारत की वैश्विक भूमिका बदल रही है, हमें उसी तेजी से, उसी रफ्तार से अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को, अपने आर्थिक और सामरिक सामर्थ्य को भी बढ़ाना है. आत्मनिर्भर भारत का आत्मविश्वास आज जनमानस की सोच का हिस्सा बन चुका है. अटल टनल इसी आत्मविश्वास का प्रतीक है.

छह वर्षों में किया 26 वर्षों का काम

प्रधानमंत्री ने कहा कि साल 2002 में अटल जी ने इस टनल के लिए अप्रोच रोड का शिलान्यास किया था. स्थिति ऐसी थी कि साल 2013-14 तक मात्र 1300 मीटर काम हो पाया था. एक्सपर्ट बताते हैं कि जिस रफ्तार से 2014 तक अटल टनल का काम हो रहा था, अगर उसी रफ्तार से काम होता, तो ये सुरंग साल 2040 में पूरा हो पाता. 2014 के बाद, काम में अभूतपूर्व तेजी लायी गयी. नतीजा हुआ कि जहां प्रतिवर्ष 300 मीटर सुरंग बन रही थी, गति बढ़ कर 1400 मीटर प्रति वर्ष हो गयी. सिर्फ छह साल में हमने 26 साल का काम पूरा कर लिया.

कोसी सेतु का हो चुका लोकार्पण

अटल टनल की तरह ही कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स के साथ ऐसा ही व्यवहार किया गया. लद्दाख में दौलत बेग ओल्डी के एयर स्ट्रिप 40-45 साल तक बंद रही. अटल जी के साथ ही एक और पुल का नाम जुड़ा है- कोसी महासेतु का. बिहार में कोसी महासेतु का शिलान्यास भी अटल जी ने ही किया था. 2014 में सरकार में आने के बाद कोसी महासेतु के काम में तेजी आयी. कुछ दिन पहले ही कोसी महासेतु का भी लोकार्पण किया जा चुका है.

देशहित और देश रक्षा से बड़ा कुछ नहीं

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश हित से बड़ा और देश की रक्षा से बड़ा, हमारे लिए और कुछ नहीं. देश में आधुनिक अस्त्र-शस्त्र बने, मेक इन इंडिया हथियार बनें, इसके लिए बड़े रिफॉर्म्स किये गये. लंबे इंतजार के बाद चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अब हमारे सिस्टम का हिस्सा हैं. देश की सेनाओं की आवश्यकताओं के अनुसार तेज गति और उत्पादन दोनों में बेहतर समन्वय स्थापित हुआ है.

लाहौल-स्पीति और पांगी में होगी आर्थिक उन्नति, बढ़ेगा रोजगार

अटल टनल से लाहौल-स्पीति और पांगी के किसान हों, बागवानी से जुड़े लोग हों, पशुपालक हो, स्टूडेंट हों, नौकरीपेशा हों, व्यापारी-कारोबारी हों, सभी को लाभ होनेवाला है. अब लाहौल के किसानों की गोभी, आलू और मटर की फसल बरबाद नहीं होगी, तेजी से मार्केट तक पहुंचेगी. स्पीति घाटी में स्थित देश में बौद्ध शिक्षा के एक अहम केंद्र ताबो मठ तक दुनिया की पहुंच और सुगम होनेवाली है. यानी, एक प्रकार से ये पूरा इलाका पूर्वी एशिया समेत विश्व के अनेक देशों के बौद्ध अनुयायियों के लिए भी एक बड़ा सेंटर बननेवाला है. ये टनल इस पूरे क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के अनेक अवसरों से जोड़नेवाली है. कोई होम स्टे चलाएगा, कोई गेस्ट हाउस, कोई ढाबा, कोई दुकान करेगा, तो वहीं अनेक साथियों को गाइड के रूप में भी रोजगार उपलब्ध होगा.

हमीरपुर में 66 मेगावॉट के धौलासिद्ध हाइड्रो प्रोजेक्ट को दे दी गयी है स्वीकृति

उन्होंने कहा कि हमीरपुर में 66 मेगावॉट के धौलासिद्ध हाइड्रो प्रोजेक्ट को स्वीकृति दे दी गयी है. इस प्रोजेक्ट से देश को बिजली तो मिलेगी ही, हिमाचल के अनेकों युवाओं को रोजगार भी मिलेगा. प्रधानमंत्री ने कहा कि अभी तक स्थिति ये थी कि देश में अनेक सेक्टर ऐसे थे, जिनमें बहनों को काम करने की मनाही थी. हाल में जो श्रम कानूनों में सुधार किया गया है, उनसे अब महिलाओं को भी वेतन से लेकर काम तक के वो सभी अधिकार दे दिये गये हैं, जो पुरुषों के पास पहले से हैं. समाज और व्यवस्थाओं में सार्थक बदलाव के विरोधी जितनी भी अपने स्वार्थ की राजनीति कर लें, ये देश रुकनेवाला नहीं है.

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