ऊर्जा संकट के बीच हवाई यात्रा को महंगी होने से बचाने के लिए कैबिनेट ने 10,000 करोड़ रुपए की सहायता को मंजूरी दी

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 03 Jun 2026 4:42 PM

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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव

Ashwini Vaishnaw : केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया को कैबिनेट की बैठक के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया के बीच हवाई यात्रा महंगी ना हो इसके लिए सरकार ने एक फंड बनाया है, जिसमें 10 हजार करोड़ रुपए की सहायता एक बार में दी जा रही है.

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Ashwini Vaishnaw : केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों से मीडिया को अवगत कराते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट की वजह से विमानों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन (Aviation Turbine Fuel) की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ गई हैं. मार्च 2026 में जहां विमान के ईंधन की कीमत करीब 60 रुपये प्रति लीटर थी वह मई में बढ़कर 142 रुपये प्रति लीटर हो गई. इस समस्या के निराकरण के लिए सरकार ने एटीएफ प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड (ATF Price Stabilisation Fund) बनाया है. इस फंड का उद्देश्य संकट के वक्त भी उचित कीमत पर ईंधन की आपूर्ति है.

हवाई यात्रा को महंगी होने से बचाने के लिए कैबिनेट ने 10,000 करोड़ रुपए की सहायता दी

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि अभी ईंधन की कीमत 142 रुपये प्रति लीटर है. अगर एयरलाइंस को इसी कीमत पर ईंधन खरीदना पड़े, तो हवाई टिकट काफी महंगे हो सकते हैं. इस स्थिति से बचने और यात्रियों पर महंगे टिकट का बोझ ना पड़ने देने के लिए सरकार ने विमान के ईंधन की कीमत को 75.6 रुपए प्रति लीटर पर कैप कर दिया है. इससे एयरलाइंस को राहत मिली है और उड़ान सेवाएं भी प्रभावित नहीं हुई हैं. लेकिन इसका प्रभाव तेल बेचने वाली कंपनियों पर पड़ा है और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा पड़ रह है, क्योंकि उन्हें ईंधन उसी दाम पर मिल रहा है, जो वैश्विक बाजार में उसकी कीमत है. इसी वजह से सरकार ने एटीएफ प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड बनाया है, ताकि एयरलाइंस, यात्रियों और तेल बेचने वाली कंपनियों किसी पर भी अतिरिक्त बोझ ना पड़े. इस फंड में 10,000 करोड़ रुपए का मदद दिया जाएगा.

यह फंड कैसे काम करेगा?

संकट के दौरान एयरलाइंस को स्थिर और कम कीमत पर ईंधन मिलता रहेगा. तेल कंपनियों को होने वाले नुकसान की भरपाई इस फंड से की जाएगी. जब अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य हो जाएंगे और ईंधन की कीमतें कम हो जाएंगी, तब एक तय व्यवस्था के तहत यह राशि वापस की जाएगी. यानी सरकार ने ऐसा मॉडल बनाया है जिससे एयरलाइंस, तेल कंपनियां और यात्रियों तीनों को फायदा हो. सरकार का कहना है कि इस कदम से विमानन क्षेत्र में जुड़े लगभग 77 लाख रोजगारों को भी सुरक्षा मिलेगी और टिकटों की कीमतों में अचानक भारी बढ़ोतरी से बचा जा सकेगा.

NH-63 और NH-563 को चौड़ा करने की अनुमति

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कैबिनेट ने 3 जून को यह फैसला भी किया है कि तेलंगाना में NH-63 के आर्मूर-जगतियाल-मंचेरियल सेक्शन और NH-563 के जगतियाल-करीमनगर सेक्शन को 4 लेन स्टैंडर्ड तक चौड़ा किया जाएगा. यह प्रोजेक्ट 190.76 किमी लंबा है और इसमें कुल 7,597.16 करोड़ रुपये का निवेश होगा. अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यूनियन कैबिनेट ने रामेश्वर से पारादीप तक नए कोस्टल हाईवे के कंस्ट्रक्शन को भी मंजूरी दी है, जिसकी कुल लंबाई 163.180 किमी होगी. प्रोजेक्ट की कुल लागत 8300.79 करोड़ रुपये है.

पुराने ट्रकों और बसों को बदलने के लिए सरकार देगी मदद

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यूनियन कैबिनेट ने दिल्ली-एनसीआर में पुराने ट्रक और बसों को बदलने के लिए नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड बनाने को मंजूरी दी है. इस स्कीम का मकसद दिल्ली-एनसीआर में एयर पॉल्यूशन कम करना और क्लीनर मोबिलिटी को बढ़ावा देना है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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