चीन की सीमा पर एयर स्ट्रिप, हैलीपैड और रेलवे लाइन, सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हम सोये नहीं रह सकते
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 10 Nov 2021 4:22 PM
सुप्रीम कोर्ट ने चारधाम हाईवे परियोजना के तहत सड़क चौड़ीकरण से जुड़ी एक अर्जी पर सुनवाई के दौरान सरकार ने अपने जवाब में कहा कि हम 1962 की तरह सोते हुए नहीं रह सकते. तीर्थयात्रियों से ज्यादा महत्वपूर्ण है देश की सुरक्षा.
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद अबतक नहीं सुलझा है. चीन लगातार सीमा पर अपनी ताकत बढ़ा रहा है. भारत भी खुद को सीमा के क्षेत्रों में मजबूत करने में लगा है. अब सुप्रीम कोर्ट ने सभी स्पष्ट कर दिया है कि हम 1962 की तरह सोते हुए नहीं रह सकते.
सुप्रीम कोर्ट ने चारधाम हाईवे परियोजना के तहत सड़क चौड़ीकरण से जुड़ी एक अर्जी पर सुनवाई के दौरान सरकार ने अपने जवाब में कहा कि हम 1962 की तरह सोते हुए नहीं रह सकते. तीर्थयात्रियों से ज्यादा महत्वपूर्ण है देश की सुरक्षा.
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हमें सेना की जरूरतों का ध्यान रखना होगा. चीन ने अपनी सड़कें मजबूत कर ली है इसलिए जरूरी है कि भारत भी सभी जरूरी तैयारी कर ले. इन रास्तों पर सड़क का चौड़ीकरण जरूरी है ताकि जरूरत पड़ने पर भारी वाहन भी आसानी से इन रास्तों पर जा सकें. 1962 जैसी जंग को टालने के लिए सेना को चौड़ी और बेहतर सड़कों की जरूरत है.
इस संबंध में सरकार ने कोर्ट ने को बताया कि ऋषिकेश से गंगोत्री, ऋषिकेश से माना और तनकपुर से पिथौरागढ़ जैसी सड़कें जो देहरादून और मेरठ के आर्मी कैम्प को चीन की सीमा से जोड़ती हैं. इन कैम्प में मिसाइल लॉन्चर और हेवी आर्टिलरी है.
हाल ही में भारत-चीन सीमा पर जो भी हुआ, उसे देखते हुए आर्मी को बेहतर सड़कों की जरूरत होगी सीमा के उस पार बुनियादी ढांचा तैयार कर लिया गया है. चीन ना सिर्फ सड़कें बल्कि हैलीपैड, रेलवे लाइन , एयरसट्रिप पर भी काम कर रहा है.
आर्मी को ट्रूप्स, टैंक्स, हेवी आर्टिलरी और मशीनरी पहुंचाने की जरूरत है. 1962 की जंग के वक्त चीन सीमा पर राशन की सप्लाई भी नहीं पहुंच सकी थी. अगर दो लेन की सड़क नहीं बनती है, तो उसका कोई मतलब ही नहीं रह जाएगा.
इस पूरे मामले पर कोर्ट ने भी स्पष्ट तौर पर कहा है कि सीमा पर विरोधी बुनियादी ढांचा तैयार कर रहा है. कोर्ट ने कहा, ‘हम हिमालय की स्थिति को जानते हैं. सैनिकों को चंडीगढ़ से सीमा तक एक बार एयरलिफ्ट नहीं किया जा सकता. आज भले ही हमारे पास C130 हरक्यूलिस जैसे हेवी ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट हैं, लेकिन फिर भी सेना को आने-जाने में समय तो लगेगा ही.’
1962 के बाद से चीन की सीमा तक जाने वाली सड़कों में कोई खास बदलाव भी नहीं देखा गया है.8 सितंबर 2020 को कोर्ट ने एक आदेश जारी किया था जिसमें सड़क की चौड़ाई 5.5 मीटर रखने का निर्देश दिया गया था.
रक्षा मंत्रालय ने इसी आदेश में संशोधन की मांग की याचिका दायर की थी. आदेश में संशोधन की मांग करते हुए रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि आज के समय में चीन सीमा पर देश की सुरक्षा खतरे में है. अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह स्पष्ट है कि भारत भी इन इलाकों में खुद को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेगा.
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