Air pollution in Delhi : दिल्ली में 18 नवंबर तक सभी स्कूल बंद, सरकार ने IMD के अलर्ट का दिया हवाला
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 08 Nov 2023 2:22 PM
New Delhi: Vehicles ply on a road amid low visibility due to a thick layer of smog, in New Delhi, Saturday, Nov. 05, 2022. Air quality in the national capital continues to remain in the 'severe' category. (PTI Photo/Kamal Kishore)(PTI11_05_2022_000032A)
शिक्षा विभाग के आदेश में यह भी कहा गया है कि शीतकालीन अवकाश के शेष दिनों को कब शेड्यूल किया जाए इसपर फैसला बाद में किया जाएगा. फिलहाल दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति बहुत खराब है इसलिए स्कूलों को पूरी तरह बंद रखने का आदेश दिया गया है.
Air pollution in Delhi school closed : दिल्ली में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए दिल्ली सरकार ने स्कूलों में सर्दी की छुट्टी पहले देने का आदेश जारी किया है. दिल्ली सरकार ने स्कूल प्रबंधन को यह आदेश दिया है कि वे नौ से 18 नवंबर तक स्कूलों में शीतकालीन अवकाश दें. गौरतलब है कि दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार कड़े कदम उठा रही है.
Delhi government announces early winter break in schools from 9th to 18 November amid severe air pollution in the national capital pic.twitter.com/c2oECE0GXw
— ANI (@ANI) November 8, 2023
शिक्षा निदेशक हिमांशु गुप्ता की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि स्कूल प्रबंधन जल्दी से जल्दी बच्चों के अभिभावकों को इस बारे में सूचित करें. शिक्षा विभाग के आदेश में यह भी कहा गया है कि शीतकालीन अवकाश के शेष दिनों को कब शेड्यूल किया जाए इसपर फैसला बाद में किया जाएगा. फिलहाल दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति बहुत खराब है इसलिए स्कूलों को पूरी तरह बंद रखने का आदेश दिया गया है. स्कूलों में ना तो बच्चे आएंगे और ना ही शिक्षक.आदेश में इस बात का उल्लेख भी किया गया है कि मौसम विभाग ने यह आशंका जताई है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति और भी बिगड़ सकती है. गौरतलब है कि सर्दी के बढ़ते ही दिल्ली में एक्यूआई 400 के करीब पहुंच गया है जो बहुत ही गंभीर स्थिति का सूचक है.
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दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने आज बताया कि उन्होंने दिल्ली में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए कल से ही स्माॅग टाॅवर को पूरी क्षमता के साथ काम करने का आदेश दिया है. साथ ही बायोमास बर्निंग को रोकने के लिए भी कई टीम गठित की गई है. गोपाल राय ने बताया कि प्रदूषण रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जो सुझाव दिए थे, उनपर भी काम हो रहा है और जल्दी ही स्थिति पर काबू पा लिया जाएगा.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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