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कर्नाटक देश का सबसे भ्रष्ट राज्य, नीति आयोग के सर्वेक्षण में हुआ खुलासा

Updated at : 28 Apr 2017 9:05 AM (IST)
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कर्नाटक देश का सबसे भ्रष्ट राज्य, नीति आयोग के सर्वेक्षण में हुआ खुलासा

नयी दिल्ली : घूसखोरी के आधार पर तैयार एक सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्नाटक देश का सबसे भ्रष्ट राज्य है. इसके बाद आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर और पंजाब में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार दर्ज किया गया. नीति आयोग के सेंटर फॉर मीडिया स्टडीजकी 11वीं इंडिया करप्शन स्टडी-2017 रिपोर्ट में कहा गया है कि […]

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नयी दिल्ली : घूसखोरी के आधार पर तैयार एक सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्नाटक देश का सबसे भ्रष्ट राज्य है. इसके बाद आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर और पंजाब में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार दर्ज किया गया.

नीति आयोग के सेंटर फॉर मीडिया स्टडीजकी 11वीं इंडिया करप्शन स्टडी-2017 रिपोर्ट में
कहा गया है कि इन राज्यों में सार्वजनिक सेवाओं के लिए जनता को घूस देना पड़ा है. देश के 29 में से 20 राज्यों में किये गये सर्वे के आधार पर हिमाचल प्रदेश, केरल और छत्तीसगढ़ को सबसे कम भ्रष्ट राज्य माना गया है.

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रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्वे में करीब एक तिहाई लोगों ने माना कि पिछले साल उन्हें कहीं न कहीं रिश्वत देनी पड़ी. सर्वेक्षण में गांव और शहरी क्षेत्र के 3,000 लोगों की राय ली गयी. इनमेंसे आधे से अधिक ने माना कि नोटबंदी के दौरान घूूसखोरी में कमी आयी थी. रिपोर्ट में आकलन किया गया है कि 20 राज्योंके लोगों ने 10 सार्वजनिक सेवाओं के लिए 6,350 करोड़ रुपये की रिश्वत 2017 में दी. वर्ष 2005 में लोगों ने 20,500 करोड़ रुपये रिश्वत दी थी. इस साल कराये गये अध्ययन में 53 फीसदी लोगों ने रिश्वत देने की बात कबूल की थी.

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सरकारी काम कराने के लिए दिये जानेवाले घूसों के आधार पर तैयार रिपोर्टमेंकहागयाहैकि देश में भ्रष्टाचार घट रहा है,लेकिन अभी भी बहुत कुछ करनेकी जरूरत है. पिछले साल 31% लोगों को स्कूल, अदालत, बैंक या अन्य कामों के लिए 10 रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक की रिश्वत देनी पड़ी. 2005 में 53% लोगों को रिश्वत देनी पड़ती थी. यानी भ्रष्टाचार में 22 फीसदी की कमी आयी है.

कहां, कितने लोगों ने दी रिश्वत

कर्नाटक77.0 फीसदी
आंध्रप्रदेश74.0 फीसदी
तमिलनाडु68.0 फीसदी
हिमाचल प्रदेश03.0 फीसदी


नोटबंदी और भूमि सुधार से और कम होगा भ्रष्टाचार : देबरॉय
रिपोर्ट जारी करते हुए नीति आयोग के सदस्य बिबेक देबराॅय ने कहा कि नोटबंदी और भूमि सुधार के कारण आनेवाले साल में भ्रष्टाचार में और कमी आयेगी. सेंटर की महानिदेशक पीएन वासंती का कहना है कि यह लोगों में जागरूकता का असर है.


एक फीसदी लोग ही करते हैंआरटीआइ का इस्तेमाल
सर्वे में 58% लोगों ने बताया कि उन्हें सूचना का अधिकार कानून (आरटीआइ) की जानकारी है, लेकिन इनमें से सिर्फ एक फीसदी लोग ही उसका इस्तेमाल करते हैं. एलपीजी के ‘आधार’ से लिंक होने के चलते भी भ्रष्टाचार कम हुआ है.


इन सेवाओं को मानक बनाया गया
जिनसेवाओं को मानक माना गया, उनमें खाद्य आपूर्ति, बिजली, पानी, अस्पताल, स्कूल, पुलिस, अदालत, बैंक, जमीन रजिस्ट्रेशन और टैक्स शामिल हैं.


बिना पैसा लिये काम नहीं करतीं अदालतें और पुलिस
लोगों का अनुभव है कि अदालतों और पुलिस को पैसे न दिये जायें, तो वे जनता का काम नहीं करते. घूस नहीं देने पर 3.5% लोगों को अदालत से मनचाही तारीख या आदेश की सत्यापित कॉपी नहीं मिली. उन्हें सिर्फ तारीख मिली. घूस न देने पर 1.8% लोगों की पुलिस ने एफआइआर तक नहीं लिखी.

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