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31 जनवरी से शुरू होगा बजट सत्र, आम बजट के साथ रेल बजट भी होगा पेश

Updated at : 07 Jan 2017 5:39 PM (IST)
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31 जनवरी से शुरू होगा बजट सत्र, आम बजट के साथ रेल बजट भी होगा पेश

नयी दिल्ली : पांच राज्यों के विधानसभा सभा चुनाव के मद्देनजर केंद्रीय बजट की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की गयी थी. अब पीटीआई के हवाले से खबर आ रही है कि बजट सत्र की शुरूआत 31 जनवरी से शुरू होगी और 1 फरवरी को आम बजट पेश होगा. इसके साथ रेल बजट भी पेश […]

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नयी दिल्ली : पांच राज्यों के विधानसभा सभा चुनाव के मद्देनजर केंद्रीय बजट की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की गयी थी. अब पीटीआई के हवाले से खबर आ रही है कि बजट सत्र की शुरूआत 31 जनवरी से शुरू होगी और 1 फरवरी को आम बजट पेश होगा. इसके साथ रेल बजट भी पेश किया जायेगा.

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इसमें संदद के दोनों सदनों में राष्ट्रपति के संबोधन के कार्यकम का भी उल्लेख है. खबर के मुताबिक, पहली फरवरी को ही सदन में आर्थिक सर्वे रखा जायेगा. इस साल से रेल बजट औऱ आम बजट एक साथ पेश होना है. कैबिनेट कमिटी ने भी बजट सत्र 31 जनवरी से शुरू होने की अनुशंसा की है.

दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने एक फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किये जाने से पर विपक्ष की आपत्तियों पर केंद्र से जवाब मांगा है. मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा को पत्र लिख कर उनसे इस बारे में 10 जनवरी तक जवाब देने को कहा है. आयोग ने कल कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, बसपा और सपा समेत विपक्षी दलों के पत्र को आगे बढाया था, जिसमें इन पार्टियों ने पांच राज्यों में चुनाव को देखते हुए फरवरी में बजट सत्र बुलाने पर आपत्ति की है. इन दोनों की मांग है किआठ मार्च को मणिपुर और उत्तर प्रदेश के आखिरी चरण के चुनाव होने तक बजट पेश न करने के लिए आयोग सरकार को निर्देश दे.

सूत्रों के मुताबिक सरकार का रख बिल्कुल स्पष्ट है. नियमों एवं प्रक्रियाओं के मुताबिक केंद्रीय बजट को राज्यों के विधानसभा चुनाव के दौरान आयोजित करने को लेकर कोई वैधानिक समस्या नहीं है. समय से पूर्व बजट सत्र बुलाने में भी कोई संवैधानिक बाधा नहीं है. आम तौर पर बजट सत्र का आयोजन फरवरी के तीसरे सप्ताह में किया जाता है.
संसदीय मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने हाल में बजट सत्र की शरआत 31 जनवरी से करने और एक फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किये जाने की सिफारिश की थी, ताकि एक अप्रैल से नये वित्तीय वर्ष में नये प्रावधानों को अमल में लाया जा सके.
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने पांच जनवरी को चुनाव आयुक्त से भेंट के बाद संवाददाताओं को बताया था, ‘‘वर्ष 2012 में इन पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव को लेकर विपक्षी दलों की आपत्ति के बाद कांग्रेस ने केंद्रीय बजट 28 फरवरी की बजाय 16 मार्च को पेश किया था. हम चाहते हैं कि चुनावों के खत्म होने तक बजट नहीं पेश किया जाना चाहिए.’
आजाद ने कहा कि चुनावी कानून स्पष्ट तौर पर कहता है कि सत्तारुढ दल को चुनाव के दौरान कोई लाभ नहीं मिलना चाहिए और विपक्षी दल और सत्ता पक्ष दोनों समान स्थिति में होने चाहिए. कांग्रेस नेता आजाद ने कहा कि एक फरवरी को बजट पेश किये जाने से संतुलन भाजपा की तरफ झुक सकता है क्योंकि वह रियायत देकर मतदाताओं को लुभाने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकती है.
वहीं केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यह कहते हुए इस कदम का बचाव किया कि विपक्षी दल इसको लेकर क्यों भयभीत हैं, जबकि उनका दावा है कि नोटबंदी बहुत ही अलोकप्रिय फैसला है.बजट सत्र को समय से पहले बुलाये जाने (31 जनवरी से शुरु) के विरोध में 16 राजनीतिक दल पहले ही राष्ट्रपति और चुनाव आयोग को पत्र लिख चुके हैं.
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