ईपीएफ पर लगाये गये टैक्स को वापस ले सकती है सरकार

Updated at : 01 Mar 2016 7:13 PM (IST)
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ईपीएफ पर लगाये गये टैक्स को वापस ले सकती है सरकार

नयी दिल्ली : सरकार द्वारा ईपीएफ पर लगाये गये टैक्स को लेकर चौतरफा विरोध हो रहा है. इस विरोध के बाद सरकार ने फैसला किया है कि इस पर एक बार फिर विचार किया जायेगा. हालांकि सरकार ने भविष्य निधि निकासी पर कर लगाए जाने के बजट प्रस्ताव से उपजे भ्रम को दूर करते हुए […]

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नयी दिल्ली : सरकार द्वारा ईपीएफ पर लगाये गये टैक्स को लेकर चौतरफा विरोध हो रहा है. इस विरोध के बाद सरकार ने फैसला किया है कि इस पर एक बार फिर विचार किया जायेगा. हालांकि सरकार ने भविष्य निधि निकासी पर कर लगाए जाने के बजट प्रस्ताव से उपजे भ्रम को दूर करते हुए सरकार ने आज कहा कि भविष्य निधि कोष में एक अप्रैल 2016 के बाद कर्मचारी द्वारा किये गये अंशदान के 60 प्रतिशत हिस्से पर मिलने वाले ब्याज पर ही कर लिया जायेगा. हालांकि, लोक भविष्य निधि (पीपीएफ) की निकासी कर मुक्त बनी रहेगी. राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने आज यहां एक साक्षात्कार में कहा कि एक अप्रैल 2016 के बाद भविष्य निधि में किये गये अंशदान पर अर्जित ब्याज पर ही प्रस्तावित कर लगाया जायेगा.

उन्होंने कहा, ‘‘लोक भविष्य निधि (पीपीएफ) के मामले में कोई बदलाव नहीं किया गया है. पीपीएफ पर ईईई यानी तीनों स्तर पर कोई कर नहीं लगेगा. कोष में योगदान के समय, उस पर प्रतिफल मिलने पर और निकासी के समय, तीनों स्तरों पर कर से छूट जारी रहेगी. पीपीएफ पर 100 प्रतिशत कर छूट होगी. ‘ अधिया ने कहा कि ईपीएफ में 3.7 करोड़ सक्रिय अंशधारक हैं जिनमें उंचा वेतन पाने वाले कार्पोरेट क्षेत्र के करीब 70 लाख कर्मचारी हैं जो कि ईपीएफ ब्याज निकासी के समय कर लगाये जाने के ताजा बजट प्रस्ताव के दायरे में आयेंगे.
अधिया ने कहा, ‘‘करीब तीन करोड़ लोग हैं जिनकी मासिक आय 15,000 रुपये से कम है. ये ईपीएफ के पात्र सदस्य कहे जाते हैं. इन तीन करोड़ लोगों के लिए भविष्य निधि कराधान मामले में कोई बदलाव नहीं होगा. वे अपना 100 प्रतिशत मूलधन बिना किसी कर के वापस ले सकते हैं.’ उन्होंने कहा कि इन सभी बातों को अधिसूचना में स्पष्ट किया जायेगा.
वित्त वर्ष 2016-17 के आम बजट में ईपीएफ निकासी के 60 प्रतिशत हिस्से पर अर्जित ब्याज पर कर लगाने का प्रस्ताव किया गया है. हालांकि, निकाली गई राशि को यदि फिर से सेवानिवृति पेंशन कोष उत्पाद में निवेश किया जाता है तो इस पर पूरी तरह कर छूट होगी. अधिया ने कहा, ‘‘इस प्रस्ताव का मकसद राजस्व जुटाना नहीं है. हम चाहते हैं कि लोग पेंशन समाज की ओर बढें. इसलिए हमने अन्य प्रोत्साहन दिए हैं जिनमें लंबी अवधि के सेवानिवृत्ति उत्पादों में निवेश पर कर छूट का प्रावधान है. हालांकि, ऐसे उत्पाद पर हमेशा कर लगता है, लेकिन यहां संबंधित व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके कानूनी वारिस को कोष हस्तांतरण करने पर छूट प्रदान की गई है.’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें उन लोगों की चिंता है जो 100 प्रतिशत राशि सेवानिवृत्ति के समय निकाल लेते हैं और पेंशन उत्पादों में निवेश नहीं करते, अन्यथा उनकी स्वास्थ्य देखभाल की जिम्मेदारी सरकार पर आ जाती है.’ अधिया का कहना है कि सरकार ने वेतनभोगी वर्ग से कर लेने के लिए यह प्रावधान नहीं किया है बल्कि सरकार चाहती है कि लोग सेवानिवृत्ति के लिए बेहतर योजनायें बनायें, इसमें सरकार मदद करना चाहती है.
उन्होंने कहा, ‘‘हम कह रहे हैं कि ईपीएफ का 40 प्रतिशत हिस्सा सेवानिवृत्ति के समय उपलब्ध होगा. शेष 60 प्रतिशत के लिए हम आपको सेवानिवृत्ति पेंशन उत्पादों में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना चाहते हैं. इसलिए यदि आपकी कुल भविष्य निधि एक करोड़ रुपये है तो 40 लाख रुपये से आप मकान बनाइये अथवा दूसरे काम कीजिये और .. शेष 60 लाख रुपये आप सेवानिवृत्ति वाले पेंशन उत्पादों में निवेश कीजिये ताकि आपको पेंशन मिलती रहे.
केंद्रीय श्रम संगठनों ने हालांकि, बजट में ईपीएफ निकासी पर कर के प्रस्ताव का विरोध किया है और उनमें से 11 ने सरकार के एकतरफा श्रम सुधार और ईपीएफ निकासी पर कराधान समेत श्रम विरोधी नीतियों के विरोध में 10 मार्च को राष्ट्रव्यापी हडताल की योजना बनाई है. बीएमएस के महासचिव व्रजेश उपाध्याय ने कहा, ‘‘यह कामगार विरोधी बजट प्रस्ताव है. पीएफ पर कर लगाना दोहरा कराधान है.
भविष्य निधि वेतन से काटा जाता जिस पर कर्मचारी पहले की कर अदा कर चुका होता है … कर नई आय पर लगाया जाता है. भविष्य निधि धन सृजन या नई आय नहीं है.’ अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस के महासचिव गुरदास दासगुप्ता ने कहा कि इस मुद्दे को संसद में बजट चर्चा के दौरान उठाया जायेगा. ईपीएफओ द्वारा सामाजिक सुरक्षा के लिये चलाई जाने वाली योजना वर्तमान में पूरी तरह से कर मुक्त है. फिलहाल सामाजिक सुरक्षा योजनाएं सेवानिवृत्ति कोष ईपीएफओ तीनों स्तर जिनमें जमा, ब्याज संचय और निकासी पर कर मुक्त है.
चार्टर्ड अकाउंटेंसी कंपनी नांगिया एंड कंपनी ने कहा कि राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) का मौजूदा ढांचा इस मामले में पहले दो स्तर पर छूट-छूट- तीसरे स्तर यानी निकास के समय कर लगने वाला है. यही वजह है कि यह योजना अन्य प्रमुख सेवानिवृति योजनाओं के मुकाबले काफी नुकसान की स्थिति में है. नांगिया एंड कंपनी के कार्यकारी निदेशक नेहा मल्होत्रा ने कहा, ‘‘एनपीएस काराधान की अनिश्चितता और खामियां दूर करने के लिए ही सरकार ने ईपीएफओ पर निकासी के समय 40 प्रतिशत राशि पर राहत प्रदान की है ताकि सेवानिवृत्ति बचत को प्रोत्साहित किया जा सके.
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