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जो भारत की व्यवस्था और कानून का सम्मान नहीं कर सकते हैं उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए : साक्षी महाराज

नयी दिल्ली : मुंबई में 1993 में हुए सिलिसलेवार बम विस्फोटों में सजा-ए-मौत पानेवाले याकूब अब्दुल रज्जाक मेमन की फांसी पर राजनीति तेज हो गयी है. एमआइएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया है कि सरकार धर्म को आधार बनाकर मेमन को फांसी पर लटका रही है जो ठीक नहीं है. ओवैसी ने कहा […]

नयी दिल्ली : मुंबई में 1993 में हुए सिलिसलेवार बम विस्फोटों में सजा-ए-मौत पानेवाले याकूब अब्दुल रज्जाक मेमन की फांसी पर राजनीति तेज हो गयी है. एमआइएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया है कि सरकार धर्म को आधार बनाकर मेमन को फांसी पर लटका रही है जो ठीक नहीं है. ओवैसी ने कहा कि याकूब मेमन को फांसी देना मान लिया जाये सही है लेकिन मजहब को आधार बनाकर किसी को फांसी देना ठीक नहीं.

ओवैसी के इस बयान पर भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने कहा है कि जो लोग भारत की व्यवस्था और कानून का सम्मान नहीं कर सकते हैं उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए. उनके लिये पाकिस्तान के दरवाजे खुले हैं. आपको बता दें कि इससे पहले भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना पहले ही कह चुकी है कि मेमन की फांसी को लेकर राजनीति नहीं होनी चाहिए.

इधर, भाजपा प्रवक्ता शहनवाज हुसैन ने कहा कि 1993 के धमाके में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोगों ने अपनी जान गंवायी थी. मेमन की फांसी पर ओवैसी अनावश्‍यक राजनीति कर रहे हैं जिसकी निंदा की जानी चाहिए. कानून के ऊपर कोई नहीं है. हमें देश के कानून का सम्मान करना चाहिए.

वहीं दूसरी ओर, मुंबई में 1993 में हुए सिलिसलेवार बम विस्फोटों में सजा-ए-मौत पानेवाले याकूब अब्दुल रज्जाक मेमन ने 30 जुलाई को दी जानेवाली सजा की तामील पर रोक के लिए फिर से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. इस बार याकूब ने अपनी याचिका में कहा है कि उसे फांसी नहीं दी जा सकती, क्योंकि टाडा कोर्ट का डेथ वारंट गैरकानूनी है. अभी सभी कानूनी रास्ते बंद नहीं हुए हैं. उसने महाराष्ट्र के राज्यपाल को भी दया याचिका भेजी है.

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