कोयला घोटाला : मधु कोड़ा और नवीन जिंदल पर अब 30 जून को होगी सुनवाई
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Jun 2015 11:05 AM
नयी दिल्ली : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा नवीन जिंदल व कुछ अन्य लोगों की कथित संलिप्तता वाले कोयला घोटाले के मामले की सुनवाई को विशेष अदालत ने 30 जून तक के लिए स्थगित कर दी है. इससे पहले जांच कर रहे सीबीआइ के एक अधिकारी को विशेष अदालत ने चेतावनी दी. साथ ही […]
नयी दिल्ली : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा नवीन जिंदल व कुछ अन्य लोगों की कथित संलिप्तता वाले कोयला घोटाले के मामले की सुनवाई को विशेष अदालत ने 30 जून तक के लिए स्थगित कर दी है. इससे पहले जांच कर रहे सीबीआइ के एक अधिकारी को विशेष अदालत ने चेतावनी दी. साथ ही अपने काम में सुधार करने के लिए कहा, क्योंकि कुछ दस्तावेज अदालत में सौंपे बिना ही आरोपियों को थमा दिये गये थे.
सीबीआइ निरीक्षक विजय चेत्तियार ने अदालत में इस मुद्दे पर लिखित स्पष्टीकरण दाखिल किया और कहा कि ऐसे कुछ व्यक्तियों के बयान ‘गलती से’ आरोपियों के पास चले गये, जिनके नाम प्राथमिकी में थे, लेकिन आरोप पत्र में शामिल नहीं है. उनके स्पष्टीकरण के बाद विशेष सीबीआइ न्यायाधीश भरत पराशर ने उनसे पूछा कि ये दस्तावेज कैसे आरोपियों के पास चले गये, जबकि ये अदालत में सौंपी गई ‘ई-चालान’ की प्रति में शामिल नहीं थे.
न्यायाधीश ने कहा कि अदालत में सौंपी गयी ई-चालान की स्कैन की हुई प्रति में ये बयान शामिल नहीं थे, लेकिन आरोपियों की दी गयी प्रति में ये बयान शामिल थे. यह कैसे हुआ. अदालत के सवाल का जवाब देते हुए जांच अधिकारी ने कहा कि आरोपियों को जो ई-प्रति दी गयी थी उसे बाद में तैयार किया गया था और ये दस्तावेज गलती से उनके पास चले गये होंगे. यह मामला झारखंड में राझरा उत्तर कोयला खदान के आवंटन में कथित अनियमितताआओं से संबंधित है.
इसका आवंटन कोलकाता आधारित कपंनी विनी आयरन एंड स्टील उद्योग लिमिटेड (वीआइएसयूएल) को किया गया था. इस मामले में कोड़ा के अलावा पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता व झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव अशोक कुमार बसु सहित आठ लोग आरोपी हैं. सम्मन के मद्देनजर उपस्थित होने के बाद अदालत ने पहले आठ आरोपियों को जमानत दे दी थी.
क्या है आरोप : अपने आरोप पत्र में सीबीआइ ने कहा था कि वीआइएसयूएल ने आठ जनवरी, 2007 को राझर उत्तर कोयला खदान के लिए कोयला मंत्रलय के पास आवेदन किया था. आरोप है कि झारंखड सरकार और इस्पात मंत्रालय ने कोयला खदान आवंटन की अनुशंसा नहीं है, लेकिन 36वीं स्क्रीनिंग कमेटी ने आरोपी कंपनी को खदान देने की सिफारिश की.
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