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भूकंप को लेकर अटकलों पर नहीं जायें, लेकिन वैज्ञानिकों के अध्ययन पर ध्यान रख कर बरतें सावधानी

Updated at : 28 Apr 2015 3:13 PM (IST)
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भूकंप को लेकर अटकलों पर नहीं जायें, लेकिन वैज्ञानिकों के अध्ययन पर ध्यान रख कर बरतें सावधानी

नयी दिल्ली : नेपाल में आये विनाशकारी भूकंप ने न सिर्फ वहां, बल्कि पडोसी भारत व तिब्बत में भी तबाही मचायी है. इस हादसे में मृतकों की संख्या अबतक 4300 के पार जा चुकी है. दूसरी ओर सोशल मीडिया पर कुछ तत्व भूकंप को लेकर अफवाह फैला रहे हैं, जिस पर सरकार सख्त है. कुछ […]

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नयी दिल्ली : नेपाल में आये विनाशकारी भूकंप ने न सिर्फ वहां, बल्कि पडोसी भारत व तिब्बत में भी तबाही मचायी है. इस हादसे में मृतकों की संख्या अबतक 4300 के पार जा चुकी है. दूसरी ओर सोशल मीडिया पर कुछ तत्व भूकंप को लेकर अफवाह फैला रहे हैं, जिस पर सरकार सख्त है. कुछ के खिलाफ कार्रवाई भी की गयी है. भारत सरकार ने आम लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान नहीं दें. सरकार ने मीडिया से भी अपील की है कि वह अटलकलें न लगाये, बल्कि सही, प्रमाणिक व तथ्यात्मक खबरें भी भूकंप के संबंध में दिखाये, चलाये. लोगों के मन में यह भ्रम बना हुआ है कि क्या फिर से भूकंप आयेगा और आयेगा तो क्या होगा?

वैज्ञानिकों ने फिलहाल तुरंत किसी बडे भूकंप की आशंका को खारिज कर दिया है. आफ्टर शॉक का खतरा सोमवार को दोपहर 12 तक खत्म हो गया. इससे लोगों में थोडी राहत है. हालांकि इसके बावजूद नेपाल व बिहार में हल्के कंपन महसूस किये गये, जिससे जान माल की क्षति नहीं हुई. जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुख्य वैज्ञानिक आरके चढ्ढा ने भूकंप के पहले ही दिन एक समाचार एजेंसी से यह स्पष्ट कर दिया था कि इस भूकंप का असर अगले 10 से 15 दिनों तक रहेगा, लेकिन इसकी तीव्रता धीरे धीरे कम होती जायेगी.
अब एक प्रमुख अंगरेजी बिजनेस अखबार ने चढ्ढा व कुछ अन्य वैज्ञानिकों से बातचीत कर भूकंप के संबंध में विस्तृत खबर प्रकाशित की है. इस अखबार से आरके चढ्ढा ने कहा है कि साइसमेक डेटा एनालिसिस से मालूम होता है कि कि हिमायल क्षेत्र अभी 15 साल के पीरियड या साइकिल में है और यह 2018-20 तक चलेगा. ऐसे में इस अवधि में भूकंप के खतरे रहेंगे. उन्होंने कहा है कि भूकंप कब और कैसे आयेगा यह पक्का बता पाना मुश्किल होता है.
आरके चढ्ढा ने 150 साल के कि साइसमेक डेटा एनालिसिस के आधार पर कहा है कि हिमालय क्षेत्र अभी थर्ड साइकिल में है, जो 2004 में शुरू हुआ है और यह सामान्यत: 15 साल का होता है, यानी 2018-20 तक यह चलेगा. उन्होंने अपने शोध के आधार पर आशंका जतायी है कि नेपाल व हिमाचल प्रदेश जैसे क्षेत्र में इस साइकिल के अधिक खतरे हैं. उन्होंने कहा है कि यह जरूरी नहीं कि इसका असर सिर्फ भारत में हो, बल्कि दुनिया के किसी भी क्षेत्र में इसका असर हो सकता है.
ऐसी ही कुछ अध्ययन बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के सेंटर फॉर अर्थ साइंस के एसोसिएट प्रोफेसर कुशल राजेंद्रन का है. उन्होंने इस बिजनेस अखबार से कहा है कि वैज्ञानिकों के द्वारा लंबे समय से यह चेतावनी दी जाती रही है कि हिमालय क्षेत्र में एक बडा भूकंप आने की स्थिति बनी हुई है.
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