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26/11 मुंबई टेरर अटैक का साजिशकर्ता तहव्वुर राणा जल्द लाया जा सकता है भारत, US में याचिका खारिज

Updated at : 20 Apr 2023 5:55 PM (IST)
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26/11 मुंबई टेरर अटैक का साजिशकर्ता तहव्वुर राणा जल्द लाया जा सकता है भारत, US में याचिका खारिज

लॉस एंजिलिस और कैलिफोर्निया के जिला अदालत की जस्टिस जैकलीन चूलजियान ने जून, 2021 में इस मुद्दे पर पिछली सुनवाई की थी और जुलाई 2021 में कागजातों का आखिरी सेट अदालत में सौंपा गया था. इस अदालत ने राणा को भारत को प्रत्यर्पित किए जाने के अमेरिकी सरकार के अनुरोध पर फैसला अभी सुनाया नहीं है.

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वाशिंगटन/मुंबई : आज से करीब 15 साल पहले वर्ष 2008 में मुंबई आतंकवादी हमले का साजिशकर्ता तहव्वुर राणा जल्द ही भारत लाया जा सकता है. मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की एक अदालत ने 2008 के मुंबई आतंकवादी हमला मामले में वांछित पाकिस्तानी मूल के कनाडाई व्यापारी तहव्वुर राणा की अभियोजन पक्ष के साथ बैठक संबंधी एक याचिका (स्टेटस कॉन्फ्रेंस) यह कहते हुए खारिज कर दिया है. अदालत ने कहा कि अगले 30 दिन में उसे भारत को प्रत्यर्पित किये जाने पर फैसला आ जाने की उम्मीद है.

जून, 2021 में हुई थी पिछली सुनवाई

समाचार एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के अनुसार, लॉस एंजिलिस और कैलिफोर्निया के जिला अदालत की जस्टिस जैकलीन चूलजियान ने जून, 2021 में इस मुद्दे पर पिछली सुनवाई की थी और जुलाई 2021 में कागजातों का आखिरी सेट अदालत में सौंपा गया था. इस अदालत ने राणा को भारत को प्रत्यर्पित किए जाने के अमेरिकी सरकार के अनुरोध पर फैसला अभी सुनाया नहीं है.

पिछले महीने तहव्वुर राणा ने दायर की थी याचिका

पिछले महीने अपने वकील के माध्यम से दायर याचिका में तहव्वुर राणा (62) ने अनुरोध किया था कि अदालत अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष को इस मामले और अपराध कबूल करने पर सजा कम करने संबंधी प्रावधान पर चर्चा करने की अनुमति दे. उसके वकील ने कहा कि इस मामले में पिछली अदालती बहस 21 जुलाई, 2021 को हुई थी. इतना समय बीत जाने और राणा के लगातार सलाखों के पीछे रहने के मद्देनजर इस अदालत और वकीलों के लिए इस मामले की वर्तमान स्थिति पर चर्चा करना उपयुक्त जान पड़ता है. उसके वकील ने सुझाव दिया कि ‘स्टेटस कॉन्फ्रेंस’ 25 अप्रैल को हो, लेकिन अदालत ने 17 अप्रैल को अपने एक आदेश में इस आवेदन को खारिज कर दिया.

भारत प्रत्यर्पण पर 30 दिन में आएगा फैसला

अदालत के आदेश में कहा गया है कि याचिका में जो यह अनुरोध किया गया है कि अदालत संबंधित पक्षों को इस मामले की नवीनतम स्थिति से अवगत कराता रहे, वह मंजूर किया जाता है. संबंधित पक्षों को सलाह दी जाती है कि अदालत को 30 दिन में इस मामले पर फैसला जारी हो जाने का अनुमान है. अदालत के इसी आदेश में कहा गया है कि अदालत स्टेटस कॉन्फ्रेंस के अनुरोध को खारिज करती है, क्योंकि अदालत की राय है कि यह कार्यवाही अनावश्यक है और इससे इस मामले के निस्तारण में अदालत को कोई मदद नहीं मिलेगी.

एक हफ्ते में रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश

अदालती आदेश में कहा गया कि हालांकि, नए घटनाक्रम की स्थिति में संबंधित पक्ष अदालत के संज्ञान में इसे लाएंगे. वकीलों को इस संबंध में सात दिन के भीतर संयुक्त स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया जाता है. अदालती सुनवाई के दौरान संघीय अभियोजकों ने दलील दी थी कि राणा को पता था कि बचपन का उसका दोस्त डेविड कोलमैन हेडली लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा था और हेडली की सहायता कर तथा उसकी गतिविधियों पर पर्दा डालकर वह आतंकवादी संगठन और उसके सहयोगियों की मदद कर रहा था.

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साजिश को जानता था तहव्वुर राणा

अभियोजकों ने कहा था कि तहव्वुर राणा डेविड कोलमैन हेडली की बैठकों से अवगत था कि किस तरह की चर्चा हुई और हमलों की साजिश रची जा रही थी. अमेरिकी सरकार ने कहा कि तहव्वुर राणा साजिश का हिस्सा था. हालांकि, उसके वकील ने उसके प्रत्यर्पण का विरोध किया है. वर्ष 2008 में मुंबई पर लश्कर ए तैयबा के हमले में छह अमेरिकियों समेत 166 लोगों की जान चली गई थी.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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