ePaper

फैसला आने तक महिलाओं को सबरीमाला में प्रवेश दिया जाये : तृप्ति देसाई

Updated at : 14 Nov 2019 3:50 PM (IST)
विज्ञापन
फैसला आने तक महिलाओं को सबरीमाला में प्रवेश दिया जाये : तृप्ति देसाई

नयी दिल्ली : महिला अधिकार कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने बृहस्पतिवार को कहा कि सबरीमाला मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की सात सदस्यीय पीठ के फैसला सुनाने तक मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी जानी चाहिए. साथ ही देसाई ने मंदिर के कपाट खुलने पर वहां जाकर पूजा अर्चना करने का संकल्प लिया. पुणे में […]

विज्ञापन

नयी दिल्ली : महिला अधिकार कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने बृहस्पतिवार को कहा कि सबरीमाला मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की सात सदस्यीय पीठ के फैसला सुनाने तक मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी जानी चाहिए. साथ ही देसाई ने मंदिर के कपाट खुलने पर वहां जाकर पूजा अर्चना करने का संकल्प लिया. पुणे में रहने वाली देसाई ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पत्रकारों से कहा, ‘‘ मैंने जो समझा है उसके अनुसार अदालत का आदेश आने तक महिलाओं के लिए प्रवेश खुला है और किसी को इसका विरोध नहीं करना चाहिए.

जो लोग कहते हैं कि कहीं कोई भेदभाव नहीं है वे गलत हैं क्योंकि विशेष आयु वर्ग की महिलाओं को वहां जाने की अनुमति नहीं है. मैं 16 नवंबर को पूजा करने जा रही हूं.’ देसाई ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा केरल के मशहूर अयप्पा मंदिर में 10 से 50 वर्ष की आयुवर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर रोक हटाने के बाद पिछले साल नवंबर में मंदिर में प्रवेश करने की नाकाम कोशिश की थी. सुप्रीम कोर्ट ने सदियों पुरानी इस हिंदू प्रथा को गैरकानूनी और असंवैधानिक बताया था.

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मामले में दिए गए उसके फैसले की समीक्षा की मांग करने वाली याचिकाएं सात न्यायाधीशों की वृहद पीठ के पास भेजते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि धार्मिक स्थलों में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध केवल सबरीमाला तक ही सीमित नहीं है बल्कि अन्य धर्मों में भी ऐसा है. सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर और मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश तथा दाऊदी बोहरा समाज में स्त्रियों के खतना सहित विभिन्न धार्मिक मुद्दे सात सदस्यीय संविधान पीठ को सौंपे हैं. महिला अधिकार कार्यकर्ता कविता कृष्णन ने सवाल किया कि पुनर्विचार याचिका को वृहद पीठ के पास क्यों भेजा गया.

उन्होंने आपसी सहमति से समलैंगिक संबंध पर न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए ट्वीट किया, ‘‘ सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया. धारा 377 में पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी गयी. लेकिन सबरीमला पर फैसला वृहद पीठ के पास भेज दिया! सुप्रीम कोर्ट हमें ऐसा सोचने पर विवश कर रहा है कि सत्ता में बैठे लोगों की पसंद/नापसंदगी से प्रभावित होकर फैसले दिए जा रहे हैं और पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई की जा रही है.’

सबरीमाला मामले में याचिकाकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता राहुल ईश्वर ने मामले को सात सदस्यीय पीठ के पास भेजने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया. उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यह सही दिशा में सकारात्मक कदम है और हमें इसका स्वागत करना चाहिए. कृपया आस्था के किसी मामले में हस्तक्षेप न करें, भारत अनेकवाद और आस्था की आजादी वाला देश है. यह भारत की महानता है कि हम सांस्कृतिक रूप से काफी विविध हैं.’

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola