''मन की बात'' में राम जन्मभूमि का जिक्र: बोले पीएम मोदी- इस दिवाली प्रकाश को दें विस्तार, शत्रुता को करें समाप्त

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Oct 2019 11:24 AM

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नयी दिल्ली : इस दिवाली प्रकाश को विस्तार दें और शत्रुता की भावना को समाप्त करें. यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कही. कार्यक्रम के माध्‍यम से देश की जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आजकल दुनिया के अनेक देशों में दिवाली मनायी जाती है. इसमें सिर्फ भारतीय […]

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नयी दिल्ली : इस दिवाली प्रकाश को विस्तार दें और शत्रुता की भावना को समाप्त करें. यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कही. कार्यक्रम के माध्‍यम से देश की जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आजकल दुनिया के अनेक देशों में दिवाली मनायी जाती है. इसमें सिर्फ भारतीय समुदाय शामिल होता है, ऐसा नहीं है बल्कि अब कई देशों की सरकारें, वहां के नागरिक,सामाजिक संगठन दिवाली को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं. एक प्रकार से वहां ‘भारत’ खड़ा कर देते हैं. उन्होंने कहा कि हमारे यहां हर राज्य, क्षेत्र के अपने-अपने इतने विभिन्न उत्सव होते हैं. दूसरे देशों के लोगों की तो इनमें बहुत दिलचस्पी होती है. इसलिए, भारत में फेस्टिव टूरिज्म बढ़ाने में, देश के बाहर रहने वाले भारतीयों की भूमिका भी बहुत अहम है.

पीएम मोदी ने कहा कि मेरे प्यारे देशवासियो, पिछले ‘मन की बात’ कार्यक्रम में हमने तय किया था कि इस दीपावली पर कुछ अलग करेंगे. मैंने कहा था – आइये, हम सभी इस दीपावली पर भारत की नारी शक्ति और उनकी उपलब्धियों को सेलिब्रेट करें, यानी भारत की लक्ष्‍मी का सम्मान… सोशल मीडिया पर अनगिनत inspirational stories का अम्बार लग गया. ट्विटर पर सक्रिय रहने वाली गीतिका स्वामी का कहना है कि उनके लिये मेजर खुशबू कंवर भारत की लक्ष्‍मी है जो बस कंडक्टर की बेटी है. उन्होंने असम राइफल की All – Women टुकड़ी का नेतृत्व किया था.

550 प्रकाश पर्व

कार्यक्रम में आगे प्रधानमंत्री ने कहा कि 12 नवंबर, 2019…यह वो दिन है, जिस दिन दुनिया भर में, श्री गुरुनानक देव जी का 550 प्रकाश पर्व मनाया जाएगा. गुरुनानक देव जी का प्रभाव भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व मे है. श्री गुरुनानकदेव जी, सेवा को हमेशा सर्वोपरि रखा. गुरुनानकदेव जी मानते थे कि निस्वार्थ भाव से किये गये सेवा कार्य की कोई क़ीमत नहीं हो सकती. वे छुआ-छूत जैसे सामाजिक बुराई के खिलाफ मजबूती के साथ खड़े रहे. गुरुनानक देव जी तिब्बत भी गये, जहां के लोगों ने, उन्हें, ‘गुरु’ माना…वे उज्बेकिस्तान में भी पूजनीय हैं. अपनी एक उदासी के दौरान, उन्होंने, बड़े पैमाने पर इस्लामिक देशों की भी यात्रा की, जिसमें, साऊदी अरब,इराक और अफगानिस्तान भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि अभी कुछ दिन पहले ही, करीब 85 देशों के राजदूत, दिल्ली से अमृतसर गये थे। वहां राजदूतों ने गोल्डन टेंपल के दर्शन तो किये ही, उन्हें, सिख परम्परा और संस्कृति के बारे में भी जानने का अवसर मिला। इसके बाद कई राजदूतों ने सोशल मीडिया पर वहां की तस्वीरें साझा की…मेरी कामना है कि गुरु नानक देव जी के 550 प्रकाश पर्व हमें उनके विचारों और आदर्शों को अपने जीवन में उतारने की और अधिक प्रेरणा दें. एक बार फिर मैं शीश झुकाकर गुरु नानक देव जी को नमन करता हूं.

लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल

‘मन की बात’ कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि 31 अक्तूबर, भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जन्म जयंती का है जो देश को एकता के सूत्र में पिरोने वाले महानायक थे. सरदार साहब की कार्यशैली के विषय में जब पढ़ते हैं, सुनते हैं, तो पता चलता है कि उनकी प्लानिंग कितनी जबरदस्त होती थी. भारत के प्रथम गृहमंत्री के रूप में सरदार वल्लभभाई पटेल ने, रियासतों को, एक करने का ऐतिहासिक काम किया। एक तरफ उनकी नज़र हैदराबाद, जूनागढ़ और अन्य राज्यों पर केन्द्रित थी वहीं उनका ध्यान दूर-सुदूर दक्षिण में लक्षद्वीप पर भी था. लक्षद्वीप कुछ द्वीपों का समूह है. 1947 में भारत विभाजन के तुरंत बाद हमारे पड़ोसी की नज़र लक्षद्वीप पर थी और उसने अपने झंडे के साथ जहाज भेजा था. सरदार पटेल ने बगैर समय गंवाये, तुरंत, कठोर कार्यवाही शुरू कर दी. आज, लक्षद्वीप भारत की प्रगति में, अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है. यह एक आकर्षक पर्यटन स्थल भी है. मुझे उम्मीद है कि आप सब भी इसके खुबसूरत द्वीपों और समुद्र तटों की यात्रा करेंगे.

स्टैचू ऑफ यूनिटी का जिक्र

उन्होंने कहा कि सरदार साहब की याद में बना स्टैचू ऑफ यूनिटी देश और दुनिया को समर्पित किया गया था. यह दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है. अमेरिका में स्थित ‘#StatueOfLiberty’ से भी ऊंचाई में दोगुनी है. स्टैचू ऑफ यूनिटी के पास अनेक आकर्षण के केंद्र लगातार विकसित होते चले जा रहे हैं और इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल रहा है और लोगों को रोज़गार के नए अवसर भी मिल रहे हैं. पर्यटन उद्योग के लिए, स्टैचू ऑफ यूनिटी एक अध्ययन का विषय हो सकता है. हम सब इसके साक्षी हैं कि कैसे 1 साल के भीतर एक स्थान, विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित होता है. बहुत बड़ी अर्थव्यवस्था का विकास हो रहा है. सरकार भी अपनी भूमिका निभा रही है. पिछले दिनों टाईम मैग्जीन ने दुनिया के 100 महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल में स्टैचू ऑफ यूनिटी को भी अहम स्थान दिया है. मुझे आशा है कि आप सभी लोग अपने कीमती समय से कुछ वक़्त निकाल कर स्टैचू ऑफ यूनिटी देखने जाएंगे.

‘राष्ट्रीय एकता दिवस’

2014 से हर साल 31 अक्तूबर को ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ मनाया जाता है. यह दिन, हमें, अपने देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा की हर कीमत पर रक्षा करने का सन्देश देता है. 31 अक्तूबर को, हर बार की तरह रन फॉर यूनिटी का आयोजन भी किया जा रहा है. मैराथन को लेकर के एक शौक और जूनून देखने को मिल रहा है. रन फॉर यूनिटी भी तो ऐसा ही provision है. यहां दौड़ना, फिट इंडिया के भाव को चरितार्थ भी करते हैं, साथ-साथ, एक भारत श्रेष्ठ भारत, ये उद्देश्‍य से भी हम जुड़ जाते हैं. मेरे प्यारे देशवासियो, सरदार पटेल ने देश को एकता के सूत्र में बांधा. एकता का ये मंत्र हमारे जीवन में संस्कार की तरह है और भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में हमें हर स्तर पर, हर डगर पर, हर मोड़ पर, हर पड़ाव पर, एकता के इस मंत्र को मज़बूती देते रहना चाहिए.

राम जन्मभूमि

पीएम मोदी ने कहा कि सितम्बर 2010 में जब राम जन्मभूमि पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया. जरा उन दिनों को याद कीजिये. भांति-भांति के कितने लोग मैदान में आ गये थे. कैसे-कैसे इंटरेस्ट ग्रुप उस परिस्थितियों का अपने-अपने तरीके से फ़ायदा उठाने के लिए खेल रहे थे. उन्होंने कहा कि कुछ बयानबाजों ने, बड़बोलों ने सिर्फ और सिर्फ खुद को चमकाने के इरादे से न जाने क्या-क्या बोल दिया था, हमें सब याद है. लेकिन ये सब, पांच दिन, सात दिन, दस दिन, चलता रहा, लेकिन, जैसा ही फैसला आया, एक आनंददायक, आश्चर्यजनक बदलाव देश ने महसूस किया. सितम्बर 2010 में जब राम जन्मभूमि पर फैसला आया तब सरकार ने, राजनैतिक दलों ने, सामाजिक संगठनों ने, सिविल सोसाइटी ने, सभी सम्प्रदायों के प्रतिनिधियों ने, साधु-संतों ने बहुत ही संतुलित और संयमित बयान दिये.

इंदिरा गांधी को किया याद
31 अक्टूबर, हमारे देश की पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा जी की हत्या भी उस दिन हुई थी. देश को एक बहुत बड़ा सदमा लगा था. मैं आज उनको भी श्रद्दांजलि देता हूं.

स्वच्छ सियाचिन
आज, घर-घर की अगर कोई एक कहानी सब ओर सुनाई देती है, हर गांव की कोई एक कहानी सुनाई देती है तो वो है स्वच्छता की कहानी…स्वच्छता का यह प्रयास सवा-सौ करोड़ हिन्दुस्तानियों का प्रयास है. उन्होंने कहा कि विश्व का सबसे ऊंचा battlefield, जहां तापमान 50-60 डिग्री माइनस में चला जाता है. इतनी विपरीत हालात में रहना किसी पराक्रम से कम नहीं. ऐसे हालात में, हमारे बहादुर जवान न सिर्फ देश की सीमाओं की सुरक्षा कर रहे हैं, बल्कि, वहां स्वच्छ सियाचिन अभियान भी चला रहे हैं.

लोकल चीजें खरीदें

पीएम मोदी ने कहा कि उत्सव, हम सबके जीवन में एक नई चेतना को जगाने वाला पर्व होता है, दिवाली में तो खासतौर पर कुछ-न-कुछ नया खरीदना, बाजार से कुछ लाना हर परिवार में कम-अधिक मात्रा में होता ही होता है. मैंने एक बार कहा था कि हम कोशिश करें – लोकल चीजों को खरीदें. उन्होंने क‍हा कि जितना ज्यादा हम अपने लोकल चीजें खरीदने का प्रयास करेंगे, ‘गांधी-150’, अपने आप में एक महान अवसर बन जाएगा और मेरा तो आग्रह रहता ही है कि हमारे बुनकरों के हाथ से बना हुआ, हमारे खादी वालों के हाथ से बना हुआ, कुछ-न-कुछ तो हमें खरीदना ही चाहिए. उन्होंने कहा कि मैं दीपावली के पावन पर्व पर आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं. दिवाली में हम पटाखे का उपयोग करते हैं. लेकिन, कभी-कभी असावधानी में आग लग जाती है. मेरा आग्रह है कि खुद को भी संभालिये और उत्सव को बड़े उमंग से मनाइये. मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं…

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