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इंफोसिस के नारायण मूर्ति ने कहा : देश में जो हो रहा है, उस पर युवाओं को बेबाकी से बोलने की जरूरत

Updated at : 13 Jul 2019 10:21 PM (IST)
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इंफोसिस के नारायण मूर्ति ने कहा : देश में जो हो रहा है, उस पर युवाओं को बेबाकी से बोलने की जरूरत

मुंबई : इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति का कहना है कि आज देश के विभिन्न हिस्सों में जो हो रहा है, उस पर युवाओं को बेबाकी से बोलने की जरूरत है, क्योंकि यह वह भारत नहीं जिसके लिए हमारे पूर्वजों ने हमें आजादी दिलायी. इंफोसिस के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी विशाल सिक्का का नाम लिये […]

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मुंबई : इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति का कहना है कि आज देश के विभिन्न हिस्सों में जो हो रहा है, उस पर युवाओं को बेबाकी से बोलने की जरूरत है, क्योंकि यह वह भारत नहीं जिसके लिए हमारे पूर्वजों ने हमें आजादी दिलायी. इंफोसिस के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी विशाल सिक्का का नाम लिये बगैर उनके साथ अपने मतभेदों का उदाहरण देते हुए मूर्ति ने कहा कि जब उन्होंने देखा कि जिन मूल्यों पर उन्होंने 33 सालों में कंपनी को खड़ा किया है, उन्हें ‘कचरे के डिब्बे’ में फेंका जा रहा है, तो उन्हें उनकी रक्षा के लिए खड़ा होना पड़ा.

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मूर्ति ने इसे समाज से जोड़ते हुए कहा कि हम भारतीय आमतौर पर किसी को ‘नाराज’ नहीं करना चाहते, यहां तक कि ऐसे समय में भी जब उसकी बहुत जरूरत हो. उन्होंने कहा कि यदि आप देखें कि आज देशभर के विभिन्न हिस्सों में क्या हो रहा है, तो यह समय है इसके विरोध में खड़े होने का, विशेषकर युवाओं को इसके खिलाफ खड़ा होना चाहिए, क्योंकि यह वह देश नहीं जिसके लिए हमारे पूर्वजों ने आजादी दिलायी. उन्होंने सवाल किया कि हम में से कितने ऐसा कर रहे हैं? दुर्भाग्य से कोई नहीं, यही वजह है कि यह देश इस हालत में हैं, क्योंकि कोई भी किसी को उसकी गलती बताकर नाखुश नहीं करना चाहता.

मूर्ति यहां सेंट जेवियर कॉलेज में एक संगोष्ठी में बोल रहे थे. उनसे उनकी सेवानिवृत्ति के बाद इंफोसिस की घटनाओं पर चिंताएं व्यक्त करने के संबंध में सवाल किया गया. मूर्ति ने कहा कि (सिक्का प्रकरण में) कंपनी की कारोबारी रणनीति और कार्यकारियों की कार्यशैली को लेकर उन्होंने जो बातें कही, उसका एक शब्द भी जनता के बीच नहीं आया.

उन्होंने कहा कि खैर, जब उन मूल्यों पर सवाल खड़ा हुआ, जिन्हें हमने 33 साल से ज्यादा समय के अपने त्याग के बाद बनाया और आपने देखा कि उन्हें कूड़ेदान में फेंका जा रहा है, तब स्वाभाविक तौर पर हमें खड़े होना पड़ा. मूर्ति ने कहा कि अन्यथा हम उन गलतियों को होने देते रहते. जैसे 2014 में मुख्य कार्यकारी अधिकारी का वेतन 55 फीसदी बढ़ाकर 70 लाख डॉलर कर दिया गया और मुख्य परिचालन अधिकारी को 30 प्रतिशत की वेतन वृद्धि दी गयी, जबकि मध्यम श्रेणी पर किसी का वेतन नहीं बढ़ाया गया, सुरक्षा गार्ड को बिना वेतन बढ़ाये एक दिन अतिरिक्त काम या ओवरटाइम करने के लिए बोल दिया गया. मेरे हिसाब से यह स्थापित मूल्यों का घोर उल्लंघन है.

उन्होंने कहा कि ऐसे में मेरे जैसा व्यक्ति जिसने छह कनिष्कों के साथ मिलकर कंपनी को एक-एक ईंट जोड़कर खड़ा किया, यदि वह उन मूल्यों के ह्रास के विरोध में खड़ा ना हो, तो मुझे लगता है कि मैं अपने कर्तव्य पालन में विफल रहता. उन्होंने कहा कि यदि कंपनी की निष्पक्षता, पादर्शिता और जवाबदेही जैसे मूल्यों पर ही धूल चढ़ने लगे, तब आपको उसके खिलाफ खड़े होने एवं अपनी निराशा और गुस्से को खुलकर जाहिर करने की जरूरत है.

मूर्ति एवं कंपनी के अन्य प्रवर्तक शेयरधारकों के साथ लगभग एक साल तक विवाद चलने के बाद सिक्का ने 2017 में इंफोसिस को छोड़ दिया. सिक्का इंफोसिस के पहले ऐसे मुख्य कार्यकारी रहे, जो उसके संस्थापकों में शामिल नहीं थे.

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