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टिकट पर सब्सिडी छोड़ने का विकल्प देने की तैयारी में है रेलवे, महंगा होगा किराया

Updated at : 11 Jul 2019 6:20 AM (IST)
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टिकट पर सब्सिडी छोड़ने का विकल्प देने की तैयारी में है रेलवे, महंगा होगा किराया

गैस की तरह अब रेलवे भी यात्रियों को टिकट पर मिलने वाली सब्सिडी छोड़ने का विकल्प देने की तैयारी में है. रेलवे ने यह फैसला एनडीए के दूसरे कार्यकाल में पीएमओ के पहले 100 दिन कार्यक्रम के तहत लिया है. रेल मंत्रालय इसके लिए प्रस्ताव को अंतिम रूप दे रहा है. भारतीय रेलवे ‘गिव इट […]

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गैस की तरह अब रेलवे भी यात्रियों को टिकट पर मिलने वाली सब्सिडी छोड़ने का विकल्प देने की तैयारी में है. रेलवे ने यह फैसला एनडीए के दूसरे कार्यकाल में पीएमओ के पहले 100 दिन कार्यक्रम के तहत लिया है.
रेल मंत्रालय इसके लिए प्रस्ताव को अंतिम रूप दे रहा है. भारतीय रेलवे ‘गिव इट अप’ पॉलिसी के तहत यात्रियों से सब्सिडी छोड़ने की अपील करेगी. इस योजना के तहत रेलवे सिस्टम को आधुनिक बनाने के लिए सब्सिडी छोड़ने का विकल्प दिया जायेगा.
हालांकि, सब्सिडी छोड़ने का अंतिम अधिकार यात्रियों के पास होगा. जो लोग सब्सिडी छोड़ेंगे उन्हें अपनी यात्रा के लिए अधिक भुगतान करना पड़ेगा. जानकारी के मुताबिक, रेलवे को टिकटों के जरिये सिर्फ 53 फीसदी ही कमाई होती है. बाकी 47 फीसदी यात्रियों को सब्सिडी के रूप में दिया जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, टिकटों पर मिलने वाली सब्सिडी को छोड़ने का प्रस्ताव श्रेणीवार लागू होने की संभावना है.
सब्सिडी छोड़ने के विकल्प का चुनाव करने पर सेकेंड एसी के किराये में बढ़ोतरी हो जायेगी. टिकटों से सब्सिडी छोड़ने के प्रस्ताव से सरकार का उद्देश्य भारतीय रेलवे को हो रहे नुकसान से बचाना है. रेलवे का यह कदम रसोई गैस की सब्सिडी से अलग है क्योंकि यह सामान्य खजाने से नहीं बल्कि रेलवे की माल-भाड़ा ढ़ोने से होने वाली आय से दी जाती है.
सिस्टम को आधुनिक बनाने के लिए रेलवे ला रहा है योजना
सब्सिडी छोड़ने पर रेलवे के बचेंगे 56 हजार करोड़
रेलवे सूत्रों के मुताबिक, रेलवे को टिकटों की बिक्री के जरिये 50 हजार करोड़ रुपये की आय होती है. वित्तीय वर्ष 2019-20 में ‘गिव इट अप’ पॉलिसी के जरिये रेलवे ने 56 हजार करोड़ रुपये आय का लक्ष्य रखा है.
2017 में सीनियर सिटीजन के लिए आयी थी स्कीम
रेलवे ने जुलाई 2017 में सीनियर सिटिजन के लिए सब्सिडी छोड़ने की स्कीम निकाली थी. इसमें 48 लाख यात्रियों ने हिस्सा लिया जिससे रेलवे को 78 करोड़ रुपये की अधिक कमाई हुई थी.
53 % ही कमाई होती है रेलवे को टिकटों के जरिये
47 प्रतिशत यात्रियों को दिया जा रहा है सब्सिडी के रूप में
38 पैसे लेता है रेलवे प्रति किमी पर यात्रियों से (अनुमान)
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