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नि:संतान दंपति अब केवल करीबी रिश्तेदारों से ही किराये पर ले सकते हैं कोख, जानिये क्यों...?

Updated at : 03 Jul 2019 9:12 PM (IST)
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नि:संतान दंपति अब केवल करीबी रिश्तेदारों से ही किराये पर ले सकते हैं कोख, जानिये क्यों...?

नयी दिल्ली : सरोगेसी नि:संतान दंपतियों को संतान प्राप्ति का सुख प्रदान करती है, लेकिन अब देश में केवल करीबी रिश्तेदारों से ही किराये पर कोख लेकर बच्चे पैदा किये जा सकते हैं. इसका कारण यह है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को सरोगेसी (नियमन) विधेयक 2019 को मंजूरी प्रदान कर दी, जिसमें बच्चे पैदा […]

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नयी दिल्ली : सरोगेसी नि:संतान दंपतियों को संतान प्राप्ति का सुख प्रदान करती है, लेकिन अब देश में केवल करीबी रिश्तेदारों से ही किराये पर कोख लेकर बच्चे पैदा किये जा सकते हैं. इसका कारण यह है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को सरोगेसी (नियमन) विधेयक 2019 को मंजूरी प्रदान कर दी, जिसमें बच्चे पैदा करने में अक्षम दंपति को केवल करीबी रिश्तेदारों से कोख किराये पर लेने की अनुमति दी गयी है.

इसे भी देखें : ‘सरोगेसी’ को सकारात्मक रूप में देखना जरूरी : पत्रलेखा

सूत्रों ने बताया कि सरोगेसी (नियमन) विधेयक 2019 के माध्यम से भारत में किराये की कोख की व्यवस्था के नियमन का प्रस्ताव किया गया है, जिसके लिए केंद्रीय स्तर पर राष्ट्रीय सरोगेसी बोर्ड और राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश के स्तर पर राज्य सरोगेसी बोर्ड के गठन का प्रस्ताव किया गया है. उन्होंने बताया कि प्रस्तावित कानून के जरिये सरोगेसी के नियमन की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी. साथ ही, वाणिज्यिक सरोगेसी को निषेध बनाकर नैतिक किराये की कोख की व्यवस्था की अनुमति दी जा सकेगी.

सूत्रों ने बताया कि इसके माध्यम से सरोगेसी में अनैतिक व्‍यवहारों का नियंत्रण, किराये की कोख के वाणिज्यिकरण पर रोक और सरोगेसी से मां बनने वाली महिलाओं और सरोगेसी से पैदा होने वाले बच्‍चों का संभावित शोषण रुकेगा. वाणिज्यिक सरोगेसी निषेध में मानव भ्रूण तथा युग्‍मक की खरीद और बिक्री शामिल हैं. प्रजनन क्षमता से वंचित दंपत्ति की आवश्‍यकता को पूरा करने के लिए निश्चित शर्तों को पूरा करने पर और विशेष उद्देश्‍यों के लिए नैतिक सरोगेसी की अनुमति दी जायेगी.

उन्होंने बताया कि इससे नैतिक सरोगेसी सुविधा के इच्‍छुक और प्रजनन क्षमता से वंचित विवाहित दंपत्तियों को लाभ होगा. गौरतलब है कि सरोगेसी विधेयक दिसंबर, 2018 में लोकसभा में पारित हुआ था, लेकिन 16वीं लोकसभा का कार्यकाल खत्म होने के कारण यह समाप्त हो गया.

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